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जिन्दगी एक डायरी

शादी से पहले काबिल

चल रहे है सेठ जी मुन्नी बिटिया के लिए लड़का देखने....?? 
मैं तो तैयार हूँ.... 
बिचौलिया रामप्रकाश बोला.... 
हां हां... बस तैयार है ..... ज़रा रवि को भी आ जाने दो... गाड़ी की धुलाई करवाने गया है .... लड़के वालों पर भी रौब ज़मना चाहिए ना हम ऐसे वैसे घर से नहीं.... अगर आप शहर के सबसे बड़े व्यापारी है तो हम भी छोटे ही सही सुनार है .....
सेठ जी मूँछों पर  तान देते हुए बोले... 
ये हुई ना बात ..... मिठाई भी बढ़िया वाली और लिफाफे भी तैयार  रखियेगा सेठ जी.... 
पहले हमें सब ठीक लगेगा तब लिफाफे की बात आयेगी रामप्रकाश ..... अभी कैसे..... ये सब बाद में देखेंगे.... 
सेठ जी कंधे पे साफी डालते हुए बोले.... 
भाई सेठ जी... बात तो ऐसा हो ही नहीं सकता कि ना बने.... 
मैं पूरी तरह से आश्वश्त हूँ.... एक लड़की वालों को और क्या चाहिए.... पैसे वाला घर ..... अच्छा लड़का.... लड़की राज कुमारी की तरह रहे.... घर में नौकर चाकर हो.... 
चलो अब वहीं चलके देखेंगे जो तुम बोल रहे वो कितना सच है ... 
तब तक गाड़ी भी आ गयी.... 
लड़के वालों के घर सभी पहुँचे .... 
नौकर ने दरवाजा खोला..... 
सभी को अंदर बैठाया.... 
रविन्द्र जी को बुला दीजिये... 
बिचौलिये ने कहा .... 
जी आ रहे है साहब.... 
देख रहे है सेठ जी कितने नौकर चाकर है ..... बिटिया राज करेगी राज.... 
हां लग तो रईश ही रहे है .... 
तब तब रविन्द्र जी भी आ गए.... 
जी मैं ज़रा ज़रूरी काम से बाहर जा रहा हूँ... 
तो मेन मुद्दे की बात करते है ..... 
हमें आपकी लड़की पसंद है .... राम प्रकाश जी ने फोटो दिखायी थी..... 
बेटी सिर्फ सुन्दर ही नहीं सब कामों में निपुण भी है भाई साहब..... पढ़ने में बहुत होशियार है ..... अगर आप आगे पढ़ायेंगे तो कुछ ना कुछ ज़रूर बन जायेगी.... 
जी वो सब ठीक है..... आप कितना खर्च कर सकते है ......? 
सीधा मुद्दे पे आयें रविन्द्र जी..... 
जी बताया होगा आपको राम प्रकाश जी ने ... एक दो लाख और बढ़ा दूँगा.... रिश्ता पक्का समझे फिर हम.... 
जी.... हमारी तरफ से पक्का है .... 
सेठ जी की ख़ुशी का ठिकाना ना था... तुरंत जेब से निकाल सबके हाथों में 1100 रूपये रख दिये ..... 
ज्यादा छानबीन करने की ज़रूरत ना समझी  उन्होने. .... 
ब्याह हो गया.... बिटिया खुश थी कि पापा ने कहा है कि आगे पढ़ने देंगे.... अपने विचारों की आजादी होगी..... 
पर यह क्या पढ़ाई तो दूर बेचारी पति के प्यार को तरस जाती..... बिजनेस ट्रिप के नाम पर ज्यादातर बाहर रहता पति ....पता चला कि पहले भी उसकी एक शादी हो चुकी थी..... 
बस एक कमरे में बंद रह गयी सेठ जी की सोन चिरइया ... घूट घूट के जीती.... 
एक दिन पिता को लिख भेजा..... बहुत नाजो से पाला  पापा आपने.... पर पैसों की चकाचौंध में आपकी लाडो कहीं अंधेरे में गुम हो गयी है .... अब बर्दाशत नहीं होता पापा... मुझे माफ करना... गलत कदम उठाने जा रही हूँ.... घर भी नहीं आ सकती..... अभी छोटी की भी शादी करनी है ...... उसकी शादी में मेरी वजह से दिक्कत ना आयें.... 
आपकी नाजो से पली मुन्नी....... 
सेठ जी के पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गयी..... खुद को कसूरवार  ठहराने लगे .... कि कैसे मैं झांसे में आ गया... बेटी मेरी खुश नहीं है .... अनहोनी होने से पहले बेटी को घर ले आयें .... और लड़के वालों के चेहरे पर एक तमाचा सा  पड़ा .....
मुन्नी की वजह  से छोटी बहन की शादी में कोई विघ्न नहीं आया बल्कि मुन्नी प्रवक्ता बन गयी  थी .... चारों तरफ उसकी वाहवाही हो रही थी..... 
बेटी की शादी की जल्दी ना करे... बस उसे काबिल बनाये....