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जिन्दगी एक डायरी

ट्रक वाले

अब ऐसा भी नही कि ट्रक ड्राइवर आपके भले की नही सोचते।ट्रकों के पीछे लिखी लाइनें पढ़िए।दुनिया का सारा ज्ञान ,सलाहें ,चेतावनियाँ,लानतें,धमकियाँ यही मौजूद हैं।ये चलते फिरते स्कूल हैं और इन्हें पढ़ने के बाद आपको किसी बाबा के आश्रम जाने की जरूरत नही है।

सबसे जरूरी बात जो ये बताते है वो है।बुरी नजर वाले तेरा मुँह काला। मुमकिन है इन्हें नजर लगाने की चिंता रहती हो हमेशा।ट्रकों के आगे पीछे लटके जूते तस्दीक़ करते है इसकी। मेरी समझ से ये नही आता कि इन आफत के परकालों को नजर कौन लगाएगा ? लोग तो इस बात से डरते हैं कि कहीं इनकी नजर मे न आ जाए।एक दूसरे ट्रक वाले ने तो बद्दुआ दी है ,खराब नजर वालों को। उसने लिखा। बुरी नजर वाले तू सौ साल जिए और तेरे बच्चे दारू पी पीकर मरे।हो सकता है ये आदमी बार बार नजर लगने ये परेशान हो। फिर भी मेरा ये मानना है कि ये बात उसने बस कहने के लिए ही कही होगी। क्योंकि ट्रक वाले गुस्सैल भले हों ,दिल के खराब नही होते।

अब सारे ही ट्रक वाले शराब के खिलाफ हो ऐसा भी नही। एक दूसरे ट्रक पर लिखा पढ़ा मैंने। राम राज मे दूध मिला ,कृष्ण युग मे घी। कलियुग मे दारू मिली,खूब दबा कर पी।अब इन महाराज ने दूसरे युगों के दूध दही के बारे मे कैसे पता किया ये तो वही जाने।पर इतना तो तय सा ही है कि भाई दारू का मुरीद है,दबा कर पीता है ,पी कर चलाता है और अपनी बीबी से भी नही डरता। 

एक ट्रक हांकने वाले नाराज लगे मुझे।पर थे स्पष्टवादी। पीठ पीछे से हमला करने के खिलाफ थे। ऐसे में उन्होंने अपने ट्रक के पीछे ,ट्रक की तरफ से ही लिखवाया। लटक मत ,पटक दूँगी।बेहतर हो आप इस अमर वाक्य पर स्त्री लिंग ,पुल्लिंग जैसी बहस न करें। भावनाओं को समझे।दरअसल ये जीवन दर्शन है। लटकना इंसान की फितरत है। समर्थ इंसान सबसे ज़्यादा लटकने वालों से ही परेशान रहता है। लोग आते है और लटक जाते हैं और तब तक लटके रहते हैं जब तक उनके मन की न हो जाए। 

एक दूसरे ट्रक के पीछे की इबारत थी। दम हो तो क्रास कर ,वरना बर्दाश्त कर। कितनी अच्छी बात कही इन जनाब ने।यदि किसी से तकलीफ है आपको तो उससे आगे निकलने का कोशिश करे। उससे बेहतर होकर दिखाएं और ऐसा न कर पाएं तो चुपचाप घर बैठे अपना। किसी को तरक़्क़ी करते देख कुढ़ना तो अपना ही खून जलाने जैसा है,ऐसे मे इस समझदार ट्रक वाले की बात गौर करने जैसी है। 

कुछ भले भी होते है ट्रक हांकने वालों मे से।आज्ञाकारी होते है माँ बाप के। लिहाज करते है वो उनका। एक ऐसे ही शरीफ आदमी ने व्हाया ट्रक बताया है कि खून तो अपना भी गरम है पर मां बाप की शरम है।बंदा साफ साफ बता रहा है कि मां बाप के दिए संस्कार न होते तो मैं कब का तुम्हें ठोक चुका होता।ऐसे मे हमें उस ट्रक वाले के माँ बाप का शुक्रगुज़ार होना ही चाहिए। भगवान ऐसी औलाद सबको दे। 

एक ट्रक पर लिखी चेतावनी भी गौर करने लायक़ थी। वाहन चलाते वक्त सौंदर्य दर्शन न करें वरना देव दर्शन हो सकते हैं। एक दूसरे ने इसी बात को और साफ किया।नजर हटी और सब्ज़ी पूड़ी बँटी।वो खैरख्वाह है आपके। चाहते है आप लंबा जिएँ। अपनी जान की ज़िम्मेदारी खुद लें ।सडक पर चले तो अपनी आँखें खुली रखें और उसके ट्रक से बचे रहें।एक और काबिल आदमी ने और बड़ी बात बताई ,बीबी से बहस,ज़िंदगी तहस नहस। यह मरने जीने से भी बड़ी बात है।जीवन मंत्र है ये। खुश रहने का रास्ता है। ऐसे मे हमें ऐेसे मार्गदर्शक ट्रक चलाने वालों की इज़्ज़त करनी ही चाहिए। 

सही बात तो ये कि ट्रक वाला जो कहे वो सही। दुनिया देखी होती है उन्होंने।फिर जबर भी हैं वो। उनसे जबानदराजी करना जान पर खेलने जैसा।और फिर हमेशा गहरी बात करते भी है वो। ऐसे में उन्हें अनदेखा न करें।गौर से सुने 
उनकी।मान लें। जब वो निकले तो थम जाएँ। उनके पिछवाड़े दर्ज ज्ञान को आत्मसात् करें। ऐसा करेंगे तो आपकी आत्मा आपके शरीर मे बची रहेगी। आपके बच्चे अनाथ नही होगे।और आपकी बीवी सदा सुहागन बनी रहेंगी।