दूसरा पन्ना
मखमली दुपट्टा
वो चारों एक दूसरे की बहुत पक्की दोस्त थीं मानों एक माला चार मोतियों की एक ही लड़ी में पहनाई गई हो साथ में रहना साथ में सोनाआखिर एक ही रूम जो था चारों का होस्टल की जिंदगी भी अलग ही दुनियां की होती है।
लेकिन उन्हें क्या पता था कि वो दुप्पटा जो सुरभि ने ले लिया है श्रापित है।
उस दिन सभी पास ही में लगा मेला देखने गई थी अचानक ही प्लान बना लिया था संडे को छुट्टी थी और मेला लगने का स्थान भी हॉस्टल के पास ही था तो क्यों न थोड़ी मस्ती की जाएं और चारों ने मस्ती भी बहुत की मेले पहुंच कर चाट खाई झूले का आंनद लिया और लौटते में थोड़ी रात हो गई।
शिल्पा - देखो न तुम लोगों ने इतनी रात कर दी अब गार्ड अंकल भी हम लोगों को डांटेंगे।
सुरभी- मैं बोल दूंगी की हमारी दोस्त की तबियत खराब थी इसलिए उसे देखने हॉस्पिटल चले गए तो देर हो गई और यही सोचकर आगें बढ़ रहीं थीं कि सुरभि को एक दुपट्टा बरगद के पेड़ पर नजर आया अरे देखो कितना सुंदर दुपट्टा है मख़मली दुपट्टा wow इतना सुंदर रेड कलर पर ये यहां क्यों लटका है ?
शिल्पा-छोड़ सुरभी हमें बहुत देर हो गई है पता नहीं किसका है हमें क्या चलो यहां से।
सुरभि-नहीं यार मुझे ये लेना है मैं इसे लेकर ही जाऊंगी।
मोना- पागल हो गई है क्या, चल पता नहीं किसका है बहुत देर हो गई चलो होस्टल चलते है।
आखिर सुरभि की जिद्द के सामने सभी को हारना पड़ा और सुरभि ने ही वो दुपट्टा बरगद के पेड़ से उतारा और गले में डाल लिया।
मोना- वाह ये नजदीक से तो और भी सुंदर लग रहा है। काफ़ी कीमती भी लग रहा है पर ये यहां आया कहां से ?
सुरभि-तूं अब शांत रह किसी का भी हो अब ये मेरा है मैं इसे किसी को भी नहीं दूंगी।
मोना-अच्छा बाबा मैंने कब कहा है तूं इसे किसी को दे अब इसे हमसे कोई ले भी नहीं सकता।
पर जैसे ही सुरभि वो दुपट्टा गले में डालती एक अलग ही बैचनी उसे होने लगती मानों वो दुपट्टा उसका गला दबाना चाहता हो पर उसने ये बात किसी को नहीं बताई। उसे डर था अगर किसी को ये बताया तो दुपट्टा उसके हाथ से गया और दुपट्टा वो खोना नहीं चाहती थी आखिर वो उसकी सबसे पसंदीदा चीज बन गई।
दो तीन दिनों में ही सुरभि काफी चिड़चिड़ी हो गई
उसका मन बेचैन होने लगा क्या जाने दुपट्टे ने उस पर क्या असर कर दिया था अब उसके मन में ऐसे ख्यालात आने लगे कि इस दुपट्टे से मैं फांसी लगा लूं हर पल मौत के आगोश में सोने का मन करता ऐसा लगता जैसे अब मौत ही उसका आखिरी रास्ता हो क्यों न अपने आप को मार दिया जाए मजा आएगा अब तो मर कर ही मुक्त हो पाएगी।
और सुरभि ने अपने मन में सोचा ये कैसे विचार मेरे मन में घर कर रहे है पर उसे क्या पता ये श्रापित दुप्पटा उसे मार कर ही चैन लेगा।
सुरभि मन में सोचती कि ये मैं क्या सोच रही हूं पर उसे अच्छा लगने लगा मरने की सोचने में।
अब तो सुरभि को रातों में जागना अच्छा लगने लगा उस दुप्पटे को गले में डालकर वो रात के वीरानों में भटकने लगी।
हालांकि उसकी सभी दोस्त कहती थीं सुरभि क्या सोचती रहती है आज कल गुमसुम भी होती जा रही है चलो बाहर कॉफी पीकर आते है पर सुरभि कोई जबाब न देती।
अब तो सुरभि रात में अकेले ही किसी से बात भी करने लगी थी।
काफी चिढ़ चिड़ा कर बोली नहीं मुझे नहीं जाना तुम लोग मुझे अकेला छोड़ दो।
तीनों कॉफी पीने जा चुकी थी और जब वापस आई तो देख कर दंग रह गई वो आखिरी मंजर सुरभि दुपट्टे से झूल रही थी वो फांसी लगा कर मर चुकी थी सभी रोने लगीं चारों ओर चीख पुकार मच गई हॉस्टल में सभी लड़कियां दंग रह गई आखिर ये क्या हो गया होस्टल में
आखिर सुरभि ने ऐसा क्यों किया सब दंग रह गए।
पुलिस की तहकीकात चालू हो गई पर मामला कुछ समझ नहीं आया वो दुप्पटा अब मोना के पास था और सोच रही थी कि आखिर सुरभि ने ऐसा क्यूं किया
पुलिस ने मामला कम नंबर आने पर खुदकुशी का डाल दिया पर आखिर सुरभि ने ऐसा क्यों किया मोना सोच रही थी।
रात में मोना के सपने में सुरभि आई और बोली देख मोना मैं अकेली हूं तूं भी मेरे पास आ जा मोना चीखती हुई उठ गई उसका बदन पसीना पसीना हो गया दुप्पटा कहा से आया और कैसे आया चारों ने इसका पता लगाने का निर्णय किया।
क्योंकि वो चारों समझ चुकी थी कि जैसे ही इस दुप्पटे को डाला जाता है खुदकुशी करने का मन करने लगता है
क्या ये श्रापित है?
क्यों न इसे जलाकर खत्म कर दिया जाए या इसे वहीं बरगद के पेड़ पर लटका दिया जाए जहां से ये आया है
पर हमारी सुरभि की आत्मा को शांति कैसे मिलेगी चारों बड़ी असमंजस में थी आखिर क्या किया जाएं इस दुप्पटे के साथ।
मोना बहुत दुखी हो रही थी जिस दुपट्टे ने उसकी दोस्त सुरभि की जान ले ली वो अब भी उसके पास है आज इसका किस्सा ही खत्म कर देती हूं गुस्से में उसने उस दुपट्टे को आग लगा दी और सो गई पर अचानक ही उसके कानों में जा रही हलचल की आवाज़ से वह उठ गई और देखती है कि दुपट्टा उसके सामने जैसा था वैसे ही रखा हुआ है आखिर ये ऐसे हो सकता है कुछ तो राज है कुछ जो उसे पता लगाना ही होगा और उसने भी मन में सोच लिया कि कुछ भी हो जाये इसका खुलासा वो करके रहेगी कि क्या ये श्रापित है अगर श्रापित है तो क्यों है आखिर क्या कारण है इसका अब मोना को वो दुप्पटा डालना ही पड़ेगा।
जब शाम को उसने अपने गले में दुपट्टा डाला उसके मन मे वही भावनाएं घर करने लगी वो सोचने लगी कि इससे तो अच्छा है मैं सुरभि के यहां ही चली जाती हूं हम दोनों साथ मे रहेंगे आखिर वो भी अकेली है यहीं मन मे विचार आने लगे तभी उसने अपना चेहरा आईने में देखा उसने देखा उसके दांत ऊपर के नीचे और नीचे के ऊपर हो गए है अरे ये मेरे दांतों को क्या हो गया मैं ऐसी बदसूरत कैसे लगने लगी हूं ये मुझे क्या हो गया और मोना जोर से चिल्लाई और चीखे मार मार कर रोने लगी तभी शिल्पा और अंजलि दोनों जल्दी से उठकर खड़ी हो गई
क्या हुआ मोना अब वो दोनों समझ चुकी थी इस दुप्पटे का इंतजाम जल्दी से जल्दी करना पड़ेगा नहीं तो मोना से उन्हें हाथ धोना पड़ेगा
तीनों ने मिलकर सुरभि की आत्मा को बुलाने का निर्णय किया और एक पुरानी किताब जो कभी अंजली के दादा जी के पास रखी हुई मिली थी उसमें से एक उपाय उसने खोज निकाला।
एक मोमबत्ती एक पुराना सिक्का एक सफेद कागज़ पर किसी लड़की के खून से लिखा गया वो चित्रनूमा मंत्र अब तैयार था सुरभि के लिए तीनों ने अपने खून से वो चित्र बनाया और तैयार हुआ सुरभि की आत्मा को बुलाने का शिलशिला कुछ देर बाद अचानक हवाओं का बहाव शांत हो गया वो रात काफी डरावनी हो गई।
घंटो प्रयास करने के बाद आखिर खड़े शिक्के में हरकत होने लगी वो सिक्का एकाएक चलने लगा तीनों की मेहनत रंग लाई तीनों ने रोंगटे खड़े कर देने वाली कपकपाहट को शांत किया क्योंकि वो एक दोस्त को खो चुकीं थी और अब दूसरी दोस्त को नहीं खोना चाहती थीं अब सुरभि भी उन तीनों से मिलने आ चुकी थी।
कुछ ही पल मे सुरभि की आत्मा मोना के अंदर घुस गई जोर जोर से चिल्लाकर बोलने लगी अब मैं इसे अपने साथ लेकर जाऊंगी अंजलि और शिल्पा दोनों रोने लगी और सुरभि से बोलीं देख हम कितने अच्छे दोस्त है तूं इस दुनिया में नहीं है तो क्या हम लोग तुझे आज भी अच्छा दोस्त मानते है तूं आज भी हमारी अच्छी दोस्त है हम लोगों की मदद कर और इस दुपट्टे से हमें मुक्त करा जब दोनों फूट फूट कर रोने लगी जो कभी उनके साथ रहती थी आज उसकी आत्मा कैसी हो गई है तो सुरभि की आत्मा द्रवित हो गई वह भी अब जोर जोर से रोने लगी।
सुरभि-मेरा क्या कसूर था यार बस मैंने उस चुनरी को उठा लिया क्या मेरा यहीं अपराध था मैं भी जीना चाहती थी मैं अब भटकती रहती हूं रातों में मुझे तुम लोग मुक्त करा दो।
अंजलि- देख हम तेरी मदद करेंगे पर तुझे भी हमारी मदद करनी होंगी क्या तुझे पता है उस दुप्पटे को कि वो ऐसा क्यूं है।
हां मेरे मरने के बाद में मोना को सब बता चुकी हूं अगर तुम्हें देखना है तो तुम्हे मेरे साथ चलना होगा
वो लोग रात में ही जाने को तैयार हो गए रात की सुनसान गलियों से होते हुए जब वो तीनों एक कब्रिस्तान में पहुंची तो सुरभि ने एक कब्र की ओर इशारा करके कहा कि ये उस इन्सान की कब्र है जो इस दुप्पटे को श्रापित कराने का कारण बना है अगर इस कब्र को खोदकर हम इस दुप्पटे को उसके साथ जलाएंगे तभी इसका श्राप खत्म होगा अब हमें वापस चलना चाहिए।
अंजली पर क्यों हम इसे अभी ही जला देते है
सुरभि नहीं तुम अभी इसे नहीं जला सकती क्योंकि जैसे ही ये कब्र से बाहर आएगा यह और भी ख़तरनाक हो जाएगा इसे मारने के लिए तुम्हें कुछ चीजों की जरूरत होगी और जब तक तुम इसके बारे में जान नहीं लेती तब तक ये खत्म नहीं होगा क्योंकि इसने ऐसा तंत्र किया है कि इसके बारे में बिना जाने कोई इसका कुछ बिगाड़ नहीं पायेगा।
रात में सब इकट्ठे हुए और दोनों सुरभि से बातें करने लगीएक पल को वो भूल ही गई कि सुरभि उन्हें छोड़ कर चली गई है सुरभि अचानक एक पल ही आंखें लाल करके बोली अब तुम लोग तैयार हो जाओ उसकी कहानी सुनने के लिए पर उससे पहले हमें एक आईना रखना होगा और एक दीपक उसके सामने दीपक बुझना नहीं चाहिए और आईना फूट जाना चाहिए हमें आईने को वो दुप्पटा उढ़ाना होगा उसकी कहानी सुनते हुए अगर आईना फूट जाएगा तो हमें उसकी कब्र पर जाना होगा वो दुपट्टा लेकर उन दोनों को साथ मे जलाना होगा ध्यान रखना वो हमें कहानी पूरी नहीं सुनने देने की कोशिश करेेगा।
कुछ भी हो हमें कहानी पुरी करनी होगी कहानी पूरी होने के बाद हमें उसकी कब्र पर जाना होगा और कब्र खोदकर इस दुपट्टे के साथ उसके कंकाल को भी जलाना होगा अब उसकी कहानी सुनो वो एक लड़का काले जादू को जानता था और उसका नाम शहज़ाद था।
शहज़ाद प्रिया से बहुत प्यार करता था प्रिया उसके साथ कॉलेज में पड़ती थी शहज़ाद के बहुत बात करने पर भी उससे प्रिया बात नहीं करती और उसे हमेशा ही नजर अंदाज कर देती वो उसके प्यार में इस कदर दीवाना हो गया कि प्रिया को पाने की चाहत उसे एक तांत्रिक गुरु के पास ले गई शहज़ाद अपने पिता के साथ खाली समय में कपड़ों में रंग लगाने का काम करता उसके पिता रंगरेज थे वही उनका पुश्तेनी काम था।
तांत्रिक गुरु के साथ उसने कई तंत्र सिख लिए पर उसकी नज़र को शायद उसके गुरु ने पढ़ लिया और वो कला उसे नहीं सिखाई की अगर काला जादू आप पर हावी हो जाये तो उससे कैसे बचना है उसके प्रिया से मिलने की चाहत ने उसे काली विद्या में जल्द निपुण बना दिया
प्रिया के लिए कभी कंगन कभी चूड़ियां ले जाने पर भी प्रिया उसकी दी हुई चीजों को नहीं लेती तो अब उसका प्यार गुस्से में बदल गया और एक प्रतिशोध का रूप लेने लगा।
हालांकि प्रिया की दोस्त रूबी उसे समझाती की गिफ्ट लेने में क्या हर्ज है तुझे वो इतने प्यार से देता है पर प्रिया भी अपनी जिद्द पर अड़ी रही पर प्रिया भी जानती थी कि शहज़ाद से कोई उपहार लेने का नतीजा था उसके और पास जाना शहज़ाद का अपमान हो रहा था अब उसने प्रिया से मिलने के लिए काले जादू का सहारा लिया उसने एक बहुत ही क़ीमती लाल दुपट्टा लेकर उसे एक बुरी आत्मा को उसके अंदर रंग दिया बुरी आत्मा को गुलाम करके शहज़ाद ने जब उसे रंग दिया तो प्रिया को देने अगले ही दिन कॉलेज में मिला।
देखो प्रिया मेरी बात सुनो मैं तुमसे कभी भी जिद्द नहीं करूंगा न ही कभी कोई चीज तुम्हे दूंगा न तुमसे कभी मिलूंगा ये दुपट्टा तुम रख लो ये आख़री उपहार है तुम्हारे लिए लाल रंग का वो दुपट्टा कितना मोहक इतना खूबसूरत था कि रूबी उसे देखकर पागल सी हो गई लेले यार प्रिया कितना सुंदर दुपट्टा है प्रिया नाराज होकर चली गई।
रूबी- शहज़ाद लाओ ये मुझे दे दो मैं प्रिया को दे दूंगी तुम चिंता मत करो।
रूबी के दिल को छू लेने वाला वो दुपट्टा जो प्रिया का था।
अब रूबी के पास था उसे डालकर रूबी इतनी खुश थी कि उसे पता ही नहीं चला जिस दुपट्टे को वो डाले है वो बुरी आत्मा से रंगा हुआ है रात में शहज़ाद ने एकांत में वो काले जादू की विद्या चालू कर दी ये सोच कर कि प्रिया के पास वो दुपट्टा है।
रूबी मदमस्त हो गई बुरी आत्मा रूबी पर हावी हो गई और उसके कदम चलने लगे शहज़ाद के पास रात के वीरान रास्तों से होती हुई रूबी पहुंच गई शहज़ाद के पास और शहज़ाद उसे देखकर आग बबूला हो गया
तो क्या तूने ये दुपट्टा प्रिया को नहीं दिया अब तू गई काम से और काली शक्ति को दिये गये एक इशारा ने रूबी के गले में शिकंजा कस लिया और रूबी ने आख़री सांस ले ली।
इधर आखिर सांस के साथ ही तेज हवाएं चलने लगी और दीपक बुझने लगा अंजलि ने अपने हाथों की ओट कर ली उसके दीपक जलने से हाथों में फफोले निकल आये पर उसे सुरभि का बदला लेना था मोना जल्दी जल्दी कहानी सुनाने लगी सुरभि जल्दी बताओ फिर क्या हुआ।
तांत्रिक गुरु उसकी हरकत समझ गए और वो वहीं पहुंच गए जहां रूबी मर चुकी थी फिर गुरु ने उसे अपनी काली विद्या से एक कब्र में जिंदा ही दफ़न कर दिया और उस बुरी आत्मा को दुपट्टे से हटाने के लिए उसे बरगद के पेड़ पर टांग दिया कुछ और तंत्र करने के लिए पर सुरभि ने उसे देख लिया और उसे ले आई आगे तुम्हे पता ही है तभी अचानक आईना टूट गया और सुरभि मोना के शरीर से निकल चुकी थी वो अब तीनों के साथ नहीं थी तीनों स्कूटी लेकर उसी जगह भागी उसे जलाने के लिए।
शिल्पा ने जल्दी जल्दी कब्र खोदी जैसे ही कब्र खुदी वो शहज़ाद जो शैतान बन चुका था तीनों के ऊपर हावी हो गया काली शक्तियों वाला वो श्रापित दुपट्टा अब तीनों के गले मे कशा हुआ तीनों की जान लेने लगा तीनों की सांसें थमने लगी उनके शरीर नीले पड़ने लगे तीनों अब सुरभि के पास जाने को तैयार हो गई अब उन्हें लग रहा था कि तीनों भी अब नहीं बच पाएंगी इस दरिंदे से।
तभी अंजलि ने कहां ओह सुरभि तुम कहां चली गई हमें छोड़कर अचानक तीनों ने देखा प्रिया शहज़ाद के तांत्रिक गुरु के साथ आ गई है और गुरु ने जोर से आवाज लगाई शहज़ाद आज में तेरा अंत कर दूंगा तूने मेरे साथ धोखा किया और इस विद्या का गलत इस्तेमाल किया और ये कहकर पवित्र पानी उस दुपट्टे की तरफ फेंका तीनों आज़ाद हो गई और श्रापित दुपट्टे को उसी के साथ जला दिया इस प्रकार अंत हुआ बुराई का और जीत हुई अच्छाई की।
प्रिया के शरीर से सुरभि ने देखो मैं तुम लोगों को छोड़कर नहीं गई थी मैं प्रिया को लेने चली गई थी अब मैं जा रही हूं और इस प्रकार प्रिया ने भी अपनी सहेली रूबी का बदला लिया और तीनों ने सुरभि का बदला ले लिया अब प्रिया को तीनों नई दोस्त मिल गई और तीनों को सुरभि के रूप में प्रिया इस प्रकार अंत हुआ श्रापित दुपट्टे का।
पुलिस ने ये केस कम अंक आने पर सुसाइड का ही लिखा और तीनों ने शहज़ाद के गुरु की बात किसी को नहीं बताई और शहज़ाद आज भी गुमशुदा है।
