ये इश्क नहीं आसां
ये इश्क नहीं आसां-5
सीन-34
(कमरे पर)
गौरव: देखा तूने , कितनी हरामखोर है साली। तेरी आंखों पर प्रेम कि पट्टी बंधी थी। मैं तो पहले दिन से ही तुझसे कह रहा था। कमीनी ने खुद फोन करके प्रपोज़ किया, और तुझसे झूठ बोल रही थी कि फोन नंबर नहीं दिया है। देख सब असलियत बता दी न उसने तुझे इस कमीनी की। मैंने कहा था न कि जावेद तुझे सब बता देगा।
साहिल: अब इन सब बातों का क्या फायदा यार।
गौरव: अरे मेरी तो सुन। मैंने ड्यूटी ऑफ होने के बाद निशा से बात की। मैंने निशा से जावेद की बहुत बुराई कर दी है। मैंने उसे एहसास दिला दिया है कि तूं उस लड़के के चक्कर मे मत पड़ना। और तेरा नाम लेकर कह दिया है के जावेद ने तुझसे कहा है कि तूं तो B.Tech के 2 साल मे जिस लड़की को न पटा पाया उसे मैंने 2 महीने मे ही पटा लिया।
साहिल: ये क्या कह दिया तूने निशा से यार?
गौरव: अरे तभी तो उसकी समझ मे मेरी बात आई। देख वो जावेद तो वैसे भी बहुत खराब लड़का है। हमे निशा को उसके चंगुल से निकालना है बस। ये सोच और कुछ मत सोच। मैंने उससे अपना मोबाइल भी वापस ले लिया। और पता है तूं जब जावेद को बस स्टैंड तक छोडकर आ चुका था उसके बाद जावेद का फोन आया इसी मोबाइल पर।
साहिल: तो क्या तूने बात कि उससे?
गौरव : हाँ मैंने हड़का दिया साले को। साले कि हवा खराब हो गयी। मैंने कहा जावेद भाई, अब से ये फोन मेरे पास रहेगा और अब भूल कर भी इस नंबर फोन मत कर देना। मैं अकेला ही काफी हूँ।
यही मेरठ और गाजियाबाद मे मेरे सारे रिश्तेदार और दोस्तों की भरमार है। एक आवाज़ पर ही लौंडों की फौज इकट्ठी हो जाएगी। इसलिए अपनी हद मे रहो।
साहिल: अरे ये तो बहुत डरा दिया तुमने उसको।
गौरव: अरे तू ही तो मेरा दोस्त है। तेरे लिए क्या इतना भी नहीं कर सकता मैं। तेरे लिए तो मेरी जान भी हाजिर है। अब बस कल निशा का अपने सामने ब्रेकअप और करवा दूँ तो चैन मिले।
साहिल: मगर ये होगा कैसे?
गौरव: कल न तो तू ऑफिस जाएगा और न ही मैं। मैंने निशा से भी मना कर दिया है, वो भी कल नहीं जाएगी। वो कल तुझसे मिलेगी। जावेद की तुझसे जितनी बुराई हो सके, उसके सामने कर देना, झूठी सच्ची जितनी भी कर सकता है। फिर जावेद को ड्यूटी के बाद फोन करके बुला लूँगा और अपने सामने ही ब्रेकअप करवाऊँगा।
साहिल: क्या ये हो पाएगा?
गौरव: तेरे लिए तो मेरे भाई मैं अपनी जान लड़ा दूंगा। बस निशा तुझसे जो भी बात करे वो सारी की सारी मुझे बताते रहना । अब कल का वेट कर। सब ठीक हो जाएगा।
सीन -35
(अगले दिन निशा साहिल से मिलती है। दोनों काफी देर तक एक दूसरे के पास खामोश बैठे रहते हैं।)
साहिल: निशा तुमने मुझे बहुत हर्ट किया है। तुम्हें उस नए लड़के की बात पर इतना भरोसा हो गया कि तुमने एक बार भी मुझसे पूछना ज़रूरी नहीं समझा कि उसने तुमसे जो भी कहा है वो सच भी है या नहीं?
मैं सिर्फ तुम्हारी वजह से दिल्ली आया था और तुमने मुझे बताए बिना यहाँ से जाने का फैसला भी कर लिया। मैंने तुम्हें जावेद के बारे मे बताया था कि वो अच्छा लड़का नहीं है। तब भी तुमने मुझसे ज़्यादा उस पर भरोसा किया।
तुम्हें पता है उसने मुझसे कहा कि जिस लड़की को पटाने का काम तुम दो साल मे नहीं कर पाये उसको मैंने सिर्फ दो महीने मे पटा के दिखा दिया। अब और क्या कहूँ मैं तुमसे ? मेरी किसी बात का तो अब तुम्हें भरोसा तक नहीं होगा। तुमको भरोसा दिलाने के लिए शायद अपना खून बहाना होगा। अभी अपना हाथ काट कर दिखाता हूँ तुम्हें।
(अमान ब्लेड उठाता है। निशा उसका हाथ पकड़ कर चीख उठती है।)
निशा: नहीं.....................प्लीज़ साहिल प्लीज़। मुझे माफ कर दो। आइ एम सॉरी साहिल । आइ एम सॉरी।
(निशा रोने लगती है।)
सीन-36
(निशा, गौरव और जावेद साथ खड़े हैं।)
गौरव: जावेद भाई यहाँ मैंने तुम्हें नहीं बुलाया बल्कि निशा ने कुछ कहने के लिए बुलाया है। बोल निशा क्या कहना है तुझे इससे।
निशा: अब तक हम दोनों के बीच जो भी बाते हुयी हैं, वो मेरी गलती थी। मुझे अब तुमसे कोई भी बात नहीं करनी है। न ही फ्यूचर मे मैं तुमसे कोई बात करना चाहूंगी। मेरे पास अब फोन भी नहीं है। आगे से मुझसे कोई भी कांटेक्ट करने कि कोशिश मत करना। मैं मैनेजर सर को किसी और के अंडर मे ट्रेनिंग करने के लिए एप्लिकेशन दे दूँगी।
जावेद: लेकिन…………………………।
गौरव: बस उसने जो कह दिया वो कह दिया। तूने सुन लिया। अब जा।
सीन-37
(साहिल और गौरव कमरे पर )
साहिल: गौरव यार आज मान गया मैं तुझे। मैं तुझे कभी अच्छा लड़का नहीं समझता था। मगर आज तूने दोस्ती का हक़ अदा कर दिया। आज से जो तू कहेगा, वही मेरे लिए पत्थर की लकीर होगा।
गौरव: अच्छा अगर मैं कहूँ जॉब छोड़ दे तो छोड़ देगा।
साहिल: हाँ यार बिना कुछ सोचे। एक बार कह कर देख।
गौरव: अच्छा अगर कहूँ कि मुझे निशा से सेटिंग करनी है तो…………..?
साहिल: तो कर ले। मुझे बिलकुल भी बुरा नहीं लगेगा।
गौरव: अबे क्या हो गया तुझे? इस बात पर भी राज़ी है????????
साहिल: हाँ मेरे भाई। अरे वो तो उस जावेद के चंगुल मे फंस ही गयी थी। वो कौन है मेरा? अगर वो तेरे साथ होगी तो कम से कम तू मेरा दोस्त तो है। इतना अच्छा दिल है तेरा। उससे लाख गुना बेहतर है तू।
गौरव: तू पागल है क्या? मैं तो सिर्फ तुझसे मज़ाक कर रहा था। तू मेरा सबसे अच्छा दोस्त है और ये मैंने अपनी दोस्ती की खातिर किया है। तेरे लिए अगर मैं इतना नहीं करता तो और कौन करता?
साहिल: तुझे पता है आज जब मेरी निशा से बात हुयी , अगर वो मेरी बात का भरोसा नहीं करती तो मैं अपना हाथ काट लेता।
गौरव: तू पागल है क्या? ऐसी बेवकूफी कभी मत करना। वो भी ऐसी लड़की के लिए जिसके लिए तेरी फीलिंग्स की कोई कदर नहीं है। भूल के भी कभी अपने आप को नुकसान मत पहुंचाना। ये सब पागलपन होता है।
साहिल: यार जब तू मुझे छेड़ता था तो मैं बुरा मान जाता था। मगर मुझे नहीं पता था कि जो तू कह रहा है वो सब सच है।
गौरव: इतना सब तो मैंने करवा दिया है। मगर अब भी बात पूरी तरह खत्म नहीं हुयी है।
साहिल: क्या मतलब?
गौरव: मतलब ये कि मैं पहले भी तुझसे कहता रहा हूँ कि जब कोई प्रेम मे होता है तो उसे गलत सही कुछ पता नहीं चलता , और हमने तो वैसे भी जावेद के बारे मे काफी झूठ भी बोला है। अगर एक बार भी निशा और जावेद की मुलाकात हो गयी तो फिर जावेद उसे दोबारा पटा लेगा।
साहिल: अब अगर निशा ने उसके साथ ज़िंदगी बर्बाद करने का डिसीजन ले ही लिया है तो हम लोग क्या कर सकते हैं। हम उसे जितना बचा सकते थे, उतनी कोशिश तो कर ही ली।
गौरव: मुझे कुछ दिन तक उस पर नज़र रखनी होगी। जावेद उसके गर्ल्स हॉस्टल के सामने वाले पार्क मे उससे मिलता होगा। मैं कुछ दिन तक रोज़ ड्यूटी ऑफ होने के बाद निशा के पीछे जाकर देखूंगा और उस पार्क मे भी रुक कर नज़र रखूँगा कि जावेद तो उससे मिलने नहीं आ रहा है।
ये बता दे कि तुझे तो कोई ऐतराज नहीं है?
साहिल: मुझे कोई ऐतराज नहीं है। तुझे जो सही लगता है वो कर। मैं अब तेरी किसी बात पर कोई सवाल नहीं उठाऊँगा।
गौरव: और सुन अगर निशा से तेरी कोई भी बात हो वो तू मुझे बता दिया कर। देखूंगा कि वो तुझसे कितना झूठ बोलती है और कितना सच बोलती है।
साहिल: अब इतना सब कुछ होने के बाद मेरी क्या बात हो पाएगी उससे?
सीन-38
(कुछ दिनों के बाद, ऑफिस मे)
निशा: साहु मुझे एटीएम से कुछ रुपए निकालने जाना है। तुम ड्यूटी के बाद मेरे साथ चलोगे?
साहिल: हाँ चल चलना।
(ड्यूटी के बाद रास्ते में)
निशा: साहिल ये गौरव रोज़ मेरे हॉस्टल के सामने वाले पार्क मे आकार बैठ जाता है। अगर मैं कुछ लेने के लिए मार्केट तक जाती हूँ तो मुझे बुला लेता है, फिर रात तक मुझे जाने नहीं देता। वहीं बैठा कर रखता है। मुझे ये सब अच्छा नहीं लगता। समझ मे नहीं आता कि क्या करूँ?
साहिल: अच्छा।
सीन -39
गौरव: देखा तूने , कितनी परेशानी हो रही है कमीनी को। अपने यार से मिलने का मौका जो नहीं मिल पा रहा है उसे मेरी वजह से।
साहिल: रहने दे यार। वो जो करना चाहती है उसे करने दे। मुझे अब उससे वैसे भी कोई मतलब नहीं रखना है।
गौरव: यार इतनी जल्दी हिम्मत मत हार। ये सब मैं तेरे लिए ही तो कर रहा हूँ। मैं तो बस यही चाहता हूँ कि तेरी उससे शादी हो जाए। तू उसके साथ हमेशा खुश रहे। तू ही तो मेरा सबसे अच्छा दोस्त है यार।
साहिल: तभी तो मैं उसकी सारी बातें तुझे बता देता हूँ।
गौरव: हाँ सही किया। अगर वो आगे भी तुझसे कुछ कहे तो मुझे बता दिया करना। तभी इसका असली रूप हमारे सामने आएगा। साली कमीनी इतना कुछ होने के बाद भी कंपनी मे जावेद से बात बनती रहती है। तुझे दिखाता तो रहता हूँ मैं कंपनी मे।
साहिल: मैं तुझे सच बताऊँ तो अब मैं नफरत करने लगा हूँ उससे। इसलिए अब वो किससे मिले किससे न मिले मुझे इस बात से अब कोई मतलब नहीं है।
सीन-40
(कुछ दिनों के बाद ऑफिस मे)
साहिल: गौरव तुम सुबह से कहाँ गायब हो। मैं सो कर उठा तो तुम कमरे पर नहीं थे। ऑफिस मे भी अब आ रहे हो हाफ डे के बाद। थे कहाँ तुम? और तुम्हारे हाथ पर ये पट्टी क्यों बंधी है?
गौरव: अरे सुबह सुबह ही पापा आ गए थे। उनके साथ था। फिर उनको छोडने बस स्टैंड तक गया था। लौटते टाइम एक्सिडेंट हो गया, बस थोड़ी सी चोट आई है।
साहिल : निशा भी अभी ही आई है ऑफिस।
गौरव: अच्छा वो कहाँ बिज़ी थी? वो देख, साहिल , निशा फिर बात कर रही है जावेद से। साली अब उसके अंडर मे ट्रेनिंग भी नहीं कर रही है। तब भी उससे बात कर रही है। देख।
साहु: रहने दे यार करने दे बात। वो जो चाहे करे। आई हेट हर।
गौरव: अरे यार अगर किसी दिन निशा को वो झूठ पता चल गया जो तूने उससे जावेद के बारे मे बोला है तब क्या होगा। यही सोच सोच कर मैं तो और परेशान हो जाता हूँ।
साहिल : अरे छोड़ न यार।
(जावेद साहिल को आवाज़ देकर अपने पास बुलाता है।)
जावेद: साहिल …………………………..
साहिल : जी आया।
जावेद: साहिल, गौरव के हाथ पर ये पट्टी क्यों बंधी हुयी है। क्या हुआ उसे?
साहिल: कहीं गया था। वापस आते टाइम एक्सीडेंट हो गया, बता रहा है।
जावेद: मैंने अभी निशा से पूछा तो उसे पता ही नहीं था।
सीन- 41
(कुछ दिन बीत जाने के बाद)
निशा: साहिल, गौरव मुझे बहुत परेशान कर रहा है। रोज़ मिलने के लिए ज़िद करता है। मैंने मना कर दिया तो पार्क मे आकार बैठा रहता है। ड्यूटी के बाद रोज़ मेरा पीछा करता है। अगर मैं कुछ लेने हॉस्टल से बाहर मार्केट जाती हूँ, तब भी। अगर मुड़कर पीछे देखती हूँ, तो छिप जाता है। पता नहीं ऐसा क्यों कर रहा है वो। परेशान करके रख दिया है।
साहिल: अच्छा।
सीन-42
(उसी शाम)
गौरव: आज तो निशा तुझसे बात कर रही थी। क्या कह रही थी वो?
साहिल: यही कह रही थी कि तू रोज़ उसका पीछा करता है। वो देखती है तो छिप जाता है।
गौरव: हाँ इसी डर की वजह से जावेद से जो नहीं मिल पा रही है। इसलिए परेशान है।
साहिल: रहने दे गौरव अब ये सब। अब मैं उससे सिर्फ और सिर्फ नफरत करता हूँ, बेइंतेहा नफरत, इतनी नफरत की उसकी शक्ल तक देखना पसंद नहीं है मुझे। जब भी मैं यहाँ से जाऊंगा तो उसे बता कर जाऊंगा कि मैं उससे कितनी शिद्दत से नफरत करता हूँ। जब भी उसे देखता हूँ तो मेरे मुंह से सिर्फ एक ही वर्ड निकलता है- कुतिया।
गौरव : तू जाने की बात क्यों कर रहा है मेरे यार?
साहिल: क्योंकि मैं जा रहा हूँ। कम से कम 8-10 दिन के लिए। मेरी तबियत भी इधर आकार कुछ ठीक नहीं चल रही। अब मेरा यहाँ बिलकुल भी दिल नहीं लगता। अब घर के आस पास इंटरव्यू दूंगा। वहीं जॉब मिल गयी तो फिर वापस नहीं आऊँगा। मैं कल ट्रेन से घर निकल जाऊंगा। तू निशा को बताना मत कि मैं जा रहा हूँ।
सीन-43
(अगले दिन साहिल घर के लिए निकल जाता है। रास्ते मे उसके पास गौरव का फोन आता है। साहिल फोन उठाता है।)
साहिल: हैलो , हाँ गौरव क्या बात है?
गौरव(फोन पर): हैलो, हाँ साहिल मैं इधर निशा कि तरफ आया था। मैंने इसे बताया तो ये बोली मेरी बात कराओ। ये तुमसे बात करना चाह रही है।
साहिल: अरे यार तुमने इसे क्यों बता दिया कि मैं जा रहा हूँ। मैंने तुमसे माना किया था ना?
गौरव: कोई बात नहीं, ले बात कर ले।
निशा: हैलो साहिल तुम जा रहे हो और तुमने मुझे बताया तक नहीं?
साहिल: अरे थोड़ी तबियत ठीक नहीं है। इसलिए जा रहा हूँ।
निशा: तुम अब वापस नहीं आओगे ना?
साहिल: नही ऐसी बात नहीं है, आ जाऊंगा 1-2 दिन में।
निशा: सच बोल रहे हो ना, पक्का आ जाओगे?
साहिल: हाँ हाँ आ जाऊंगा। ज़रा गौरव को फोन दो।
गौरव: हाँ हैलो।
साहिल: गौरव इसे बताना मत कि मैं कितने दिन के लिए जा रहा हूँ। मैंने इससे कह दिया है कि 1-2 दिन मे वापस आ जाऊंगा। अगर तू मेरा सच्चा दोस्त है तो मेरे लिए दुआ करना कि अब मैं यहाँ कभी वापस आऊँ ही ना।
सीन-44
(अपने घर आने के बाद साहिल और नवीन दोनों साथ में मुंह लटकाए बैठे हैं।)
नवीन: उसको चाहा पर इजहार करना नहीं आया, कट गयी उम्र हमे प्यार करना नहीं आया। उसने कुछ मांगा भी तो मांगी जुदाई, और हमे इंकार करना नहीं आया।
साहिल: मैंने तुझसे कहा था ना कि हम दोनों दीवाना मस्ताना कि तरह आपस मे लड़ते रह जाएंगे और हीरोइन सलमान खान ले उड़ेगा। वही हुआ नवीन। हीरोइन सलमान खान ले उड़ा।
नवीन: यार मैं मिलना चाहता हूँ जावेद से। देखूँ कौन है वो जिसके लिए निशा जैसी लड़की दीवानी हो गयी।
साहिल: हाँ आना तुम कुछ दिन मे ही भिवानी, हरियाणा कि एक कंपनी मे इंटरव्यू होने वाला है। वो देने जाओ तो दिल्ली आना। तब जावेद से तुम्हारी मुलाकात करवा देंगे।
नवीन: और सुना, यहाँ कितने इंटरव्यू दे दिये?
साहिल: हाँ यार दे तो दिये । अब जैसे ही कहीं सेलेक्शन होगा, मैं फौरन दिल्ली छोड़ दूंगा।
नवीन: अब कब जा रहा है दिल्ली?
साहिल: अभी 2 जगह और इंटरव्यू देने हैं। करीब एक हफ्ते के बाद जाऊंगा।
सीन-45
(एक हफ्ते के बाद , दिल्ली मे)
निशा (नाराज़ होते हुये): तुमने तो कहा था कि 1-2 दिन मे आ जाओगे और इतने दिनों के बाद वापस आ रहे हो?
साहिल: हाँ ज़रा तबियत खराब हो गयी थी।
निशा: सच बोल रहे हो?
साहिल: हाँ।
निशा: नहीं तुम अब मुझसे कुछ सच नहीं बोलते।
साहिल: नहीं ऐसी कोई बात नहीं है। तुम ऐसा क्यों कह रही हो?
निशा: पता है मुझे। तुम सब एक ही जैसे हो। जैसे तुम हो वैसा ही गौरव है।
साहिल: अब गौरव ने क्या किया?
निशा: मैं उसे अपना दोस्त समझती थी मगर वो अपनी लिमिट क्रॉस कर रहा है। वो भी तुम्हारी तरह ही निकला।
(साहिल खामोश रहता है)
