ये इश्क नहीं आसां
ये इश्क नहीं आसां-4
सीन-26
(सन्डे को कमरे पर)
गौरव: आज तो सन्डे है। आज तो निशा और जावेद दोनों सन्डे एंजॉय करेंगे ।
साहिल : यार सुबह सुबह मूड खराब मत कर।
गौरव: अच्छा ये बता उसने तुझे ये बताया है कि वो पिछले सन्डे कहाँ थी?
साहिल: हाँ, उसने बताया था कि वो अपने भाई के साथ मॉल गयी थी। उसका भाई यही के किसी कॉलेज से बी.टेक कर रहा है। वो उससे मिलने आया था। तो वो उसके साथ शॉपिंग करने मॉल गयी थी।
गौरव: वो मॉल तो ज़रूर गयी होगी मगर अपने भाई के साथ नहीं, जावेद के साथ।
साहिल: अरे यार रहने दे ना।
गौरव : क्यों पिछले कई दिनों से वो तुझसे किस तरह बिहेव कर रही है, भूल गया क्या?
साहिल: वो तो इसलिए कर रही है क्योंकि वो मुझसे प्यार नहीं करती।
गौरव: तो फिर तू उससे इतना प्यार क्यों करता है?
साहिल: क्योंकि मैंने उससे मोहब्बत करने से पहले ये शर्त तो नहीं रखी थी कि वो भी मुझसे मोहब्बत करेगी। मोहब्बत मे शर्ते नहीं होती तो अफसोस भी नहीं होना चाहिए। मोहब्बत भी ज़िंदगी की तरह होती है। हर मोड़ आसान नहीं होता , हर मोड़ पर खुशी नहीं मिलती , मगर जब हम जिंदगी का साथ नहीं छोड़ते तो मोहब्बत का साथ क्यों छोड़ें?
गौरव: ठीक है जब वो जावेद के साथ भाग जाए तो भी अफसोस मत किजियो और मत साथ छोड़ियो मोहब्बत का। हीहीही।
साहिल: मैं मार दूंगा तुझे।
गौरव: तुझे छेड़ने में बहुत मज़ा आता है यार। अच्छा ऐसा है कि तू उससे कॉल करके पूछ कि वो कहाँ है? आज तेरी आँखों पर बंधी अंधे प्रेम कि पट्टी उतार ही देता हूँ।
साहिल: मुझे नहीं करनी कोई कॉल।
गौरव: तुझे नहीं करना दूध का दूध और पानी का पानी तो ठीक है। मत कर।
साहिल: ठीक है करता हूँ।
गौरव: उससे कहना कि हम लोग उसके हॉस्टल के पास वाले पार्क मे उससे मिलने आएंगे। अगर वो मना करती है तो समझ जाना कि आज उसका जावेद के साथ घूमने का प्लान है।
(साहिल कॉल करके निशा से बात करता है)
साहिल: देखा। वो कहीं नहीं जा रही है। हॉस्टल मे ही है और अपने कपड़े धो रही है। उसने 2 बजे हम दोनों को पार्क में बुलाया है। बस , हो गया दूध का दूध और पानी का पानी।
गौरव: अरे। चलो, बढ़िया है।
सीन-27
(2 बजे के बाद , पार्क में)
साहिल: लो निशा, आ गए हम दोनों। हमारे लिए कुछ खाने पीने का इंतेजाम किया है?
गौरव: अरे वो रहने दे, ये बता क्या कर रही थी?
निशा : कपड़े धोये, खाना बनाया फिर खाया, फिर आराम किया। अब तुम्हारा फोन आया तो अब यहाँ आई।
गौरव: फोन ठीक चल रहा है?
निशा: हाँ।
गौरव: दे ज़रा फोन। देखूँ तूने मेरा फोन खराब तो नहीं कर दिया?
निशा: नहीं किया है।
गौरव: दे तो ज़रा।
निशा: अरे नहीं ना।
(गौरव निशा के हाथ से फोन छीन लेता है। निशा चीख पड़ती है।)
निशा: गौरव फोन दे मेरा, वरना मुझसे बुरा कोई न होगा।
(निशा गौरव के हाथ से फोन ले लेती है। फिर साहिल और गौरव की नजरों से बचाते हुये कुछ डिलीट करती है।)
निशा: ये लो फोन , देख लो बिलकुल ठीक चल रहा है। कोई खराबी नहीं हुयी है।
गौरव: अरे मुझे तो सिर्फ तेरे फोटो देखने थे इसलिए लिया था फोन।
(गौरव पहले कुछ देर मोबाइल की गेलरी मे जाकर फोटो देखता है। फिर निशा की नज़रों से बचते हुये उसकी डायल्ड कॉल्स मे से जावेद का नाम निकालकर साहिल की आँखों के सामने कर देता है।)
गौरव: ये देख साहिल ये फोटो कितना अच्छा है निशा का।
(साहिल हैरान हो जाता है। मोबाइल अपने हाथ मे लेकर कॉल हिस्ट्री चेक करता है जिसमे बार बार जावेद का नाम होता है)
गौरव: तूने बताया नहीं साहिल, कैसे लगे तुझे निशा के फोटो?
साहिल: अच्छे लगे, बहुत अच्छे लगे।
निशा: यहाँ पास मे ही एक मार्केट है। वहाँ से मुझे कुछ सामान लेना है। तुम लोग चलोगे मेरे साथ वहाँ तक?
गौरव: हाँ हाँ चल। तेरे लिये क्या हम इतना काम भी नहीं कर सकते।
(तीनों मार्केट जाते हैं। निशा शॉप के अंदर जाती है।)
गौरव: अब उतरी तेरी आंखो पर बंधी प्यार की पट्टी। देखा तूने। तू तो कहता था कि जावेद को उसने अपना नंबर नहीं दिया है। साली मेरा फोन लेकर बातें बना रही है जावेद से। मैंने अपने दोस्त कि वजह से फोन दिया और मेरे ही दोस्त के साथ गद्दारी कर रही है।
साहिल: यार रात के 12 बजे, 1 बजे कि डायल्ड कॉल्स और इनकमिंग कॉल्स पड़ी हुयी हैं फोन मे और बहुत बहुत देर तक बात हुयी है।
गौरव: कुतिया , हरामज़ादी मेरे दोस्त को धोखा दे रही है और बेवकूफ़ बना रही है मेरे दोस्त को। इतना बड़ा झूठ बोल कर चेहरे पर ज़रा भी शिकन नहीं है। इसी लिए ऑफिस के बाद तेरे साथ मे जाने मे परेशानी महसूस हो रही थी उसे।
साहिल: चल यार यहाँ से, मेरा यहाँ रुकने का बिलकुल भी मन नहीं है।
(निशा शॉप से बाहर आती है।)
गौरव: ठीक है निशा, अब हम दोनों जा रहे हैं।
निशा: ठीक है।
सीन-28
(कमरे पर साहिल अपने कपड़े पैक करता है)
गौरव: ये क्या कर रहा है तू?
साहिल: मैं जा रहा हूँ अपने घर, अब मैं यहाँ पर एक पल भी नहीं रुक सकता।
गौरव: तू पागल हो गया है क्या? जॉब छोड़ कर चला जाएगा? जॉब इतनी आसानी से नहीं मिलती मेरे भाई।
साहिल: मैं यहा क्यों आया था? अपने घर वालों से, अपनी फेमिली से दूर क्यों आया था। मैं आया था तो सिर्फ और सिर्फ उसके लिए और जब वो ही मेरे साथ नहीं है तो मेरे यहाँ रुकने का कोई फायदा नहीं है। अब तू चल मेरे साथ और मुझे रेलवे स्टेशन तक छोड़ दे।
गौरव: नहीं मैं तुझे कहीं नहीं जाने दूंगा। तू तो मेरा दोस्त है। तू अगर चला गया तो मैं यहाँ क्या करूंगा। एक बात बताता हूँ तुझे। मेरी माँ बचपन मे ही मुझे छोडकर चली गईं थीं। मेरे बाप हमेशा शराब के नशे मे धुत रहते थे। इसलिए मैं हमेशा अपने घर से दूर रहकर ही पढ़ाई करता रहा। तुम जैसे दोस्त मेरी ज़िंदगी मे आते गए और मेरी फेमिली का हिस्सा बनते गए। तू मेरा दोस्त नहीं मेरी फेमिली है। मुझे अपने घर पर कभी प्यार नहीं मिला।
हमेशा तेरे जैसे दोस्तों का ही प्यार मिला। मैं तो बस प्यार का भूखा हूँ। मैं तुझे ऐसे नहीं जाने दे सकता। तू प्लीज़ मेरे लिए रुक जा।
साहिल: गौरव देख तू मत रोक मुझे। मुझे जाने दे यहाँ से।
(साहिल गौरव के गले लग कर बहुत रोता है।)
गौरव: मैं सब कुछ ठीक कर दूंगा। मैं अपने दोस्त के काम नहीं आऊँगा तो कौन आएगा। तू प्लीज़ बस एक दिन के लिए रुक जा। मैं सब ठीक कर दूंगा।
साहिल: कैसे ठीक करेगा मेरे भाई?
गौरव: बस तुझे मेरा कहना मानना होगा। मैं सब कुछ ठीक कर दूंगा। तू बस परेशान मत हो। रोना बंद कर और जो मैं कहूँ वैसा कर।
साहिल: क्या करना होगा मुझे?
गौरव: मैंने तुझसे बहुत पहले ही कहा था कि तू जावेद को बता दे कि तू निशा से प्यार करता है। मगर तूने ऐसा नहीं किया। ये उसका ही नतीजा है। अगर तू पहले ही उसे बता देता तो आज ये नौबत नहीं आती। खैर कोई बात नहीं । तुझे अब कल ऑफिस जाकर उसे ये बात अब बतानी होगी।
साहिल: उससे अब क्या फायदा होगा यार?
गौरव: देख अभी तो हमने सिर्फ कॉल हिस्ट्री मे उसका नंबर ही देखा है। हो सकता है कि अभी बात ज़्यादा न बड़ी हो। तुझे सिर्फ ये ही नहीं कहना है कि तू उससे प्यार करता है बल्कि ये भी कहना होगा कि वो भी तुझसे प्यार करती है और तुम दोनों की जल्दी ही शादी हो जाएगी। तुम दोनों की फ़ैमिली भी एक दूसरे को पसंद करती हैं।
साहिल: मगर ये सब तो झूठ है।
गौरव: तो ये झूठ तुझे बोलना पड़ेगा।
साहिल: नहीं मैं ये झूठ नहीं बोल सकता। मेरी वजह से वो बदनाम हो जाएगी।
गौरव: तो देख ले उसे बर्बाद होते हुये। ये अंजान शहर है जहां निशा को देखने वाला कोई नहीं है। वो उसके साथ क्या क्या कर सकता है तू खुद सोचले। तुझे तो पता ही है की जावेद कैसा लड़का है। तूने खुद ही मुझे उसके बारे मे बताया था।
साहिल: इससे मामला और गड़बड़ हो गया तो?
गौरव: कुछ गड़बड़ नहीं होगा। इसकी गारंटी मेरी है। तू बस ये बात कह देगा उससे?
साहिल: हाँ।
गौरव: बड़ी दबी आवाज़ मे कह रहा है फटटू। तू नहीं कह पाएगा।
साहिल: कह दूंगा मैं।
सीन -29
(अगले दिन ऑफिस मे)
साहिल: जावेद मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।
जावेद : हाँ बोलो क्या बात करनी है।
साहिल: जब मैं यहाँ आया था तो तुमने मुझसे एक सवाल पूछा था की क्या तुम निशा से प्यार करते हो ? उसका जवाब है हाँ, मैं उससे प्यार करता हूँ, बहुत प्यार करता हूँ। मेरी हर सांस पर सिर्फ उसी का नाम लिखा है। वो भी मुझसे बहुत प्यार करती है। हम दोनों की फ़ैमिली के एक दूसरे से बहुत अच्छे टर्म्स हैं और हम दोनों की शादी भी जल्दी ही तय हो जाएगी। इसलिए तुम्हारी बेहतरी इसी मे है कि तुम उसके बारे मे कोई ऐसा ख्याल अपने दिल मे न लाना। क्योंकि मैं उसके लिए कुछ भी कर सकता हूँ, कुछ भी, अपनी जान भी दे सकता हूँ।
जावेद: इस बारे मे हम ड्यूटी ऑफ होने के बाद बात करेंगे। ऑफिस के बाहर। ओके।
साहिल: मुझे जो कहना था कह दिया। अब मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी है।
सीन -30
गौरव: ये तो तूने बहुत सही काम कर दिया। मगर तुझे जावेद से बात करनी चाहिए थी। तूने उससे ड्यूटी ऑफ होने के बाद बात क्यों नही की?
साहिल: अरे यार क्या बात करता मैं उससे?
गौरव: अरे वो तुझे असली बात बताता। अभी तक तो हम सिर्फ अंदाज़ा लगा रहे हैं। वो तुझे बताता कि असल मे बात क्या है? उन दोनों कि बात किस हद तक पहुची है, ये सच्चाई बताता वो तुम्हें।
साहिल: अरे यार ये तो मैंने सोचा ही नहीं।
गौरव: चलो कोई बात नहीं। कल देखते हैं क्या होता है।
सीन-31
(अगले दिन ऑफिस मे)
गौरव: साहिल, यार सब गड़बड़ हो गयी। सारा मामला खराब हो गया। निशा जॉब छोडकर जा रही है वापस घर।
साहिल: क्या बक रहा है तू?
गौरव: हाँ यार अभी बात हुई मेरी उससे। वो कह रही है कि उसने अपना सारा सामान पैक करवा कर भाई के हाथ स्टेशन भिजवा दिया है। अब वो रिज़ाइन करके घर जा रही है। इसका मतलब इन दोनों का मामला बहुत आगे तक पहुँच गया है। कल तेरी सारी बात जावेद ने निशा को बता दी होगी। इसलिए जा रही है वो ।
साहिल: कुत्ते हरामजादे, मैंने कहा था न तुझसे मुझे जाने दे घर वापस। मगर तूने मुझे जाने नहीं दिया। मुझे खुद ही उस टाइम दिल्ली छोडकर चले जाना चाहिए था। मैं तेरी बातों मे आ गया। अगर वो चली गयी तो मैं तुझे कभी माफ नहीं करूंगा। जा जाकर रोक उसे किसी भी तरह।
गौरव: चल मैं पूरी जान लगा दूंगा। तू घबरा मत।
(गौरव जाकर निशा से बात करता है। दोनों मे काफी देर बहस चलती है। साहिल दूर खड़ा टकटकी लगाए देखता रहता है। फिर गौरव साहिल के पास वापस लौटता है।)
गौरव: साहिल मैंने रोक लिया उसे। मैंने उसे अपनी जान कि कसम दी। मैंने कहा अगर तू चली गयी तो मेरा मरा मुंह देखेगी। बहुत मिन्नतें करने के बाद मानी है वो। मैंने उसके भाई को उससे फोन भी करवा दिया। वो उसका सारा सामान लेकर वापस आ रहा है।
साहिल: थैंक्स यार। अगर वो आज चली जाती तो मैं अपने आप को कभी माफ नहीं कर पाता।
(जावेद उन दोनों के पास आता है)
जावेद: साहिल, कल तुम मिले नहीं। मैंने तुमसे कहा था कि कुछ बात करनी है।
साहिल: आज मिलते हैं, ड्यूटी ऑफ होने के बाद।
सीन -32
साहिल: क्या बात करनी है तुम्हें?
जावेद: मुझे उस बारे मे बात करना है जो बात तुमने मुझसे कल कही थी। चलो थोड़ी दूर तक मेरे साथ। रास्ते मे चलते हुये बात करते हैं।
साहिल: चलिये , अब बताइये।
जावेद: मैं तुम्हें एक जिम्मेदार लड़का समझता था मगर कल वाली तुम्हारी बात से मुझे पता चला कि तुम्हारे अंदर अभी भी बचपना भरा हुआ है। अभी तुम मेच्योर नहीं हुये हो और निशा भी मेच्योर नहीं है। मैंने ही तुम्हारी कल वाली बात सुनकर उससे कहा था कि जब तुम्हारे साथ आए हुये दोस्त ही तुम्हारे बारे मे इस तरह कि बाते कर रहे हैं तो तुम्हारा दिल्ली से जाना ही बेहतर है। मुझसे तो तुम अपने घर जाकर भी कांटैक्ट मे रह सकती हो। सच कहूँ तो मैंने अपनी तरफ से कोई पहल नहीं की।
सबसे पहले निशा ने ही मुझसे मेरा मोबाइल नंबर लिया था। फिर उसने ही पहली बार मुझे कॉल की थी। कई बार हमारी बात हुयी। उसमे भी तुम्हारी तरह बचपना भरा हुआ है । मैंने उसे समझाया कि अभी तो तुमने मुझे ठीक से जाना भी नहीं है। मेरा नेचर कैसा है, मेरी आदतें क्या क्या हैं, तुम अभी कुछ भी नहीं जानती हो। शादी कि बातें इतनी जल्दी तय नहीं होतीं।
तुम्हारी फ़ैमिली और हमारी फ़ैमिली आपस मे एक दूसरे से मिलें , एक दूसरे को समझें तब जाकर ये बातें तय होती हैं। शादी दो लोगों के बीच ही नहीं बल्कि दो फ़ैमिली के बीच होती है। और वैसे भी दिल्ली तुम लोगों के लिए अंजान शहर है, यहाँ के माहौल को समझो, फिर सोचो, डिसाइड करो कि आगे क्या करना है। साहिल तुम्हारे लिए भी मेरी यही अड्वाइस है कि ज़िंदगी के बड़े बड़े फैसले इस तरह जल्दबाज़ी मे नहीं लिए जाते। उनके लिए आपको हर तरह से सैटिस्फाई होना पड़ता है।
(साहिल उदासी से बिलकुल खामोश होकर उसकी सारी बातें सुनता रहता है।)
जावेद: चलो अब काफी देर हो गयी है। मेरा बस स्टॉप भी आने वाला है। बाद मे मिलते हैं। टेक केयर । बाय।
(साहिल वहाँ से पैदल पैदल वापस लौटता है।)
सीन -33
( रास्ते मे साहिल को सामने से आती हुयी निशा मिलती है।)
निशा: कहाँ से आ रहे हो तुम?
साहिल: कहीं से नहीं।
निशा: अरे इधर से तुम कहाँ से आ रहे हो? तुम्हारा रूम तो अपोज़िट साइड मे है।
साहिल: नहीं बस ऐसे ही थोड़ी दूर तक गया था।
निशा: किसके साथ गए थे?
साहिल: किसी के साथ नहीं। अच्छा चलता हूँ। बाय।
