Welcome To


जिन्दगी एक डायरी

ये इश्क नहीं आसां-3

सीन -17

(एक हफ्ते बाद, दिल्ली मे)
मैनेजर: गौरव, साहिल और निशा , वैलकम टु अवर कंपनी। अब तुम दोनों लड़के मिस्टर अग्रवाल के अंडर मे ट्रेनिंग लोगे और निशा तुम हमारी कंपनी के QC हैड मिस्टर जावेद के अंडर मे ट्रेनिंग लोगी। 6 महीनो मे तुम तीनों को हर काम मे बिलकुल परफेक्ट हो जाना है।

(गौरव जावेद को देखकर चुपके से साहिल के कान मे कहता है)
गौरव : वो देख जावेद को यार ये तो बहुत स्मार्ट है यार , अब तेरी चेली इसके अंडर ट्रेनिंग लेगी।

साहिल: देख तू मुझसे तमीज़ से बात किया कर।
गौरव: अबे तू मुझसे कह रहा है। 6 महीने मे वो फसा लेगा तेरी चेली को।
साहिल: चुप रह।
गौरव: हाहाहाहा अरे मज़ाक कर रहा हूँ यार तू तो बुरा मान गया।
(निशा वहाँ आती है)
निशा: साहिल ऑफिस के बाद तुम मेरे साथ चल सकते हो मेरे हॉस्टल तक? नया शहर है, ऐसे अकेले जाते हुये अजीब सा लगेगा। 
साहिल: कहाँ है तुम्हारा हॉस्टल?
निशा : यहाँ से ज़्यादा दूर नहीं है। पैदल का रास्ता है।
साहिल: हाँ हाँ क्यों नहीं। चलना मेरे साथ।
(निशा के वहाँ से  जाने के बाद)
गौरव: ओए होए तुझे तो मज़े आ गए। अब तो रोज़ उसे छोडने जाया करेगा उसके हॉस्टल तक।
साहिल: तो तू क्यों इतना खुश हो रहा है। 
गौरव: तुम दोनों को साथ देखकर अच्छा लगता है यार। 
(साहिल रोज़ ऑफिस के बाद निशा को उसके हॉस्टल तक छोडने जाने लगता है।)


सीन-18


साहिल: गौरव यार तेरे पास दो फोन हैं, एक तो बेकार ही पड़ा है। एक फोन मुझे दे दे यार।
गौरव: क्यों दे दूँ? तेरे पास है तो फोन।
साहिल: मेरे पास तो है मगर निशा के पास नहीं है। उसे देना है प्लीज़ दे दे न यार।
गौरव: अच्छा लोंडियाबाजी करे तू, और फोन लेगा मेरा। मैं नहीं दूंगा फोन वोन।
साहिल: दे दे न यार प्लीज़। उसे घर पर बात करनी होती होगी। बहुत दिक्कत होती होगी उसे।

गौरव: घर पर नहीं बेटे, तुझे खुद चोचें लड़ानी हैं, ये बोल।
साहिल हाँ हाँ अब दे दे। जब वो नया ले लेगी तो तेरा फोन वापस कर देगी।
गौरव: चल तू इतनी ज़िद कर रहा है तो ले ले। लेकिन फोन देगा तू और फोन पर सेटिंग होगी जावेद से।
साहिल: क्या बक रहा है।
गौरव: देखा नहीं था तूने जावेद को, कितना स्मार्ट है, कंपनी का सीनियर बंदा है। तुझसे डबल सैलरी है उसकी। और तो और उसके अंडर मे निशा 6 महीने तक ट्रेनिंग लेगी। भैया तू तो गया।
साहिल: चुप बैठ जा तू।


सीन-19


जावेद: हैलो साहिल, क्या हो रहा है?
साहिल: जी सब ठीक, आप बताएं।
जावेद: दिल लग गया अब यहाँ तुम्हारा?
साहिल: जी थोड़ा थोड़ा, 
जावेद: अच्छा ठीक है तो बताओ वोडका पीने चलोगे?
साहिल: ये वोडका क्या होता है?
जावेद: तुम वोडका नहीं जानते हो?
साहिल: नहीं , वो क्या होता है?

जावेद: अरे यार तुम तो वाकई बहुत सीधे हो यार।
साहिल: बताइये तो।
जावेद: अरे रहने दो यार। 
साहिल: अच्छा आपकी बहुत सारी गर्लफ्रेंड्स भी होंगी?
जावेद: अरे मैं दुनिया के सारे गलत कम कर चुका हूँ। आई एम ए बैड बॉय । अब ज़्यादा मत पुछो। वैसे ये बताओ ये निशा तुम्हारी रिलेटिव है क्या?
साहिल: नहीं तो, क्यों क्या हुआ?
जावेद: नही कुछ नहीं, बस ये सोच रहा था कि ये अपना घर छोडकर इतनी दूर जॉब करने किसके साथ आ गयी?
साहिल: क्यों क्या लडकियां बाहर जॉब नहीं कर सकती?
जावेद: क्या तुम प्यार करते हो उससे?
साहिल: ..................नहीं……………………….
जावेद: ओके। 


सीन-20


(कमरे पर)
गौरव: ये तूने क्या किया? तू बेवकूफ़ है मेरे दोस्त। बहुत सीधा है यार तू।
साहिल: क्यों मैंने ऐसा क्या कर दिया?
गौरव: तुझे जावेद से कहना चाहिए था कि हाँ मैं उससे प्यार करता हूँ और वो भी मुझसे बहुत प्यार करती है। हम दोनों कि शादी भी तय हो गयी है । इसी लिए दोनों साथ मे यहाँ आए हैं। ये कहना था।
साहिल: मैं किसी लड़की को बेकार मे ही बदनाम क्यों करूँ? 

जब ऐसा कुछ है ही नहीं।
गौरव: अच्छा एक बात बता क्या वो तुझसे प्यार करती है?
साहिल: मुझे नहीं पता।
गौरव: जब तुझे पता ही नहीं तो फिर तू बस देखता रह उसे जावेद ले उड़ेगा। जावेद के तुझसे पूछने का मतलब ही ये था कि उसकी नज़र निशा पर है। मैंने तो पहले ही कहा था तू तो गयो भायो तू तो गयो हाहाहाहा। 
साहिल: चुप बैठ जा , वरना थप्पड़ मार दूंगा तुझे।
गौरव: बेटे तुझे मेरी बात बुरी लग रही है , लेकिन सोच जब ये काम सचमुच मे होगा तो तू क्या करेगा?

साहिल: तू मेरा दिमाग खराब मत कर। निशा एक बहुत अच्छी लड़की है। वो अपने मम्मी पापा का भरोसा नहीं तोड़ सकती।
गौरव: जब कोई इंसान प्रेम मे होता है तो वो अंधा हो जाता है। उसे सही गलत नहीं दिखाई देता। जैसे इस टाइम तुझे नहीं दिख रहा है।
साहिल: ऐसा कुछ नहीं है।
गौरव: तू बेचारा यही सोचता रहेगा कि सब ठीक है । जबकि वहाँ  जावेद ने उसे अपने प्रेम जाल मे फसा लिया है। अब तक तो दोनों ने मोबाइल नंबर भी बदल लिए होंगे। खूब बाते भी शुरू हो गयी होंगी। 
साहिल: तू चुप नहीं रहेगा। 
गौरव: चल तू मत मान। मुझे क्या? चेली तेरी है। तू जाने तेरा काम जाने।


सीन-21


निशा: साहिल आज मुझे एटीएम से कुछ रुपए निकालने हैं। 
साहिल: हाँ हाँ ऑफिस के बाद साथ मे चलेंगे तो निकाल लेंगे रास्ते मे किसी एटीएम से।
(ऑफिस के बाद)
साहिल: निशा कल जावेद तुम्हारे बारे मे मुझसे बहुत इंक्वायरी कर रहा था।
निशा: अच्छा। क्या कह रहे थे वो?
साहिल: पूछ रहा था कि इतनी दूर निशा किसके साथ आई है ? क्यों आई है?
निशा: अच्छा। क्यो पूछ रहे थे वो ये सब?
साहिल: पता नहीं। तुमने अपना मोबाइल नंबर तो नहीं दिया है उसे?
निशा: नहीं।
साहिल: तो ठीक है। उसे देना भी मत अपना नंबर । वो लड़का ठीक नहीं है।


सीन-22


(कमरे पर)
साहिल: देखा कमीने तू मुझे मिसगाइड कर रहा था। निशा ने जावेद को अपना नंबर नहीं दिया है और उनके बीच कोई बात नहीं चल रही है।
गौरव: बेटा मैं बचपन से न बाहर ही रहा हूँ अपने घर से दूर। मेरी सारी पढ़ाई अपने घर से दूर ही हुई है। तुझसे बहुत ज़्यादा दुनिया देखी है मैंने । तू तो हमेशा अपने घर पर ही रहा है। पहली बार तू अपने घर से बाहर निकला है। तुझे तो पता ही नहीं कि ये दुनिया कितनी खराब है, कितनी धोखेबाज़ है, मक्कार है। 
साहिल: तू कहना क्या चाहता है?
गौरव: वो झूठ बोल रही है तुझसे । वो जावेद के प्रेमजाल मे फंस चुकी है। 
साहिल: तू बात मत कर मुझसे।
(साहिल नाराज़ होकर वहाँ से चला जाता है)


सीन- 23


( ऑफिस के बाद साहिल निशा के साथ उसे हॉस्टल तक छोडने के लिए निकलता है)
निशा: साहिल अब यहाँ आए हुये हमे बहुत दिन हो चुके हैं , अब मैं अकेले भी जा सकती हूँ अपने हॉस्टल तक । तुम वापस लौट जाओ। 
साहिल: क्यों ऐसा क्या हो गया आज? 
निशा: कुछ नहीं , रोज़ मैं तुम्हारे साथ ऑफिस से बाहर निकलती हूँ। ऑफिस वाले बातें बनाते हैं , मुझे अच्छा नहीं लगता।

साहिल: अगर ऐसी बात है तो मैं रोज़ तुमसे पहले बाहर आ जाया करूंगा, बाहर चौराहे पर मिल जाया करूंगा तुमको। 
निशा: नहीं उसकी कोई ज़रूरत नहीं है। अब मैं अकेले भी जा सकती हूँ। रोज़ निकलने बैठने वाले हम दोनों को साथ मे देखते हैं, मुझे ये बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता कि कोई मेरे बारे मे कुछ गलत सोचे। 
साहिल: तो ये सब तो अंजान लोग हैं। हमे जानते थोड़े ही हैं , ये हमारे बारे मे क्या गलत सोचेंगे?

निशा: तुम समझते क्यों नहीं? मेरे पापा का दिल्ली आना जाना लगा रहता है, यहाँ उनकी जान पहचान के बहुत लोग रहते हैं यहाँ। अगर किसी ने मुझे यहाँ तुम्हारे साथ ऐसे घूमते हुये देख लिया तो मेरे मम्मी पापा मुझे वापस बुला लेंगे, और मैं अभी यहाँ रुकना चाहती हूँ।
साहिल: ऐसा कुछ नहीं होगा निशा।
निशा: तुम मेरी बात सुन क्यों नहीं रहे, मुझे नहीं जाना है तुम्हारे साथ। जाओ यहाँ से । । 
(निशा इतना कहकर आगे चली जाती है। साहिल कि आँखों मे आँसू आ जाते हैं। साहिल उसके पीछे पीछे चलता है।)
साहिल: निशा मेरी बात तो सुनो प्लीज़ ……………….. । 
निशा: मत करो मेरा पीछा। मैंने कहा न जाओ यहाँ से। जाओ। 
(साहिल अपने टपकते हुये आंसुओं के साथ कमरे पर वापस लौटता है।) 


सीन-24


(साहिल फूट फूट कर रोता है, उसे इतना रोता हुआ देख कर गौरव उसे गले लगाता है।)
गौरव: मत रो मेरे यार मत रो। मैं तुझे ऐसा परेशान नहीं देख सकता।
साहिल( रोते हुये ) : मैं यहाँ सिर्फ उसकी वजह से आया था गौरव। सब कुछ छोडकर सिर्फ उसकी वजह से आया था। अगर वो ही ऐसा बिहेव करेगी तो मैं क्या करूंगा यहाँ पर।

गौरव : तू रो मत मेरे यार। मैं तो पहले ही तुझसे कह रहा था कि कोई न कोई गड़बड़ ज़रूर है, मगर तू सुनने के लिए तैयार भी तो नहीं था। कमीनी कितनी बुरी है मेरे दोस्त को इतना दुख दिया उसने। चुप हो जा मेरे भाई।


सीन-25


(कुछ दिन ऐसे ही गुज़र जाते है। फिर साहिल ऑफिस के बाद निशा को बाहर इंतज़ार करता हुआ मिलता है)
निशा: तुम यहा क्यों खड़े हो?
साहिल: तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहा था। कुछ बात करनी है।
निशा: हाँ बताओ क्या बात करनी है?
साहिल: चलते चलते बात करें?
निशा: जो कुछ कहना है यहीं कह दो, क्यों मेरे साथ जाने के बहाने तलाश कर रहे हो। 
साहिल( नाराज़ होते हुये): ठीक है तो फिर मैं जा रहा हूँ।
निशा: अच्छा रुको चलो मेरे साथ। बताओ क्या बात है।
साहिल: निशा मैं यहाँ पर सिर्फ तुम्हारी ही वजह से आया हूँ। वरना मैं यहाँ पर कभी नहीं आता। इसलिए प्लीज़ मुझे इगनोर मत करो। 
निशा: क्या चाहते हो? क्या मेरी खुद कोई मर्ज़ी नहीं हो सकती?

साहिल: देखो मैं तुमसे ज़्यादा कुछ नहीं मांग रहा लेकिन बस इतना चाहता हूँ कि जब तक मैं यहाँ हूँ तब तक मैं तुम्हारे साथ कुछ अच्छी यादें सँजो लूँ जिसके सहारे मैं अपनी पूरी जिंदगी भी खुशी खुशी गुज़ार सकूँ । मेरे दिल मे कोई कड़वी याद न रहे। बस मैं कुछ अच्छे पल तुम्हारे साथ गुजारना चाहता हूँ। तुम जो करना चाहती हो वो करो। मैं तुम्हारे लिए कोई सिरदर्द नहीं बनना चाहता। 
निशा: बस ये ही बात कहनी थी? और कुछ? अब जाऊँ? मेरा हॉस्टल आ गया है। 
साहिल: क्या वापस आओगी बाहर ?
निशा: नहीं, अब क्यों आऊँगी मैं ?
साहिल: रात के खाने का सामान लेने नही आओगी क्या?
निशा: हाँ वो तो लेना ही है।
साहिल: तो फिर आओ। मैं यही बाहर बैठकर तुम्हारा वेट कर रहा हूँ।


(निशा बिना कुछ कहे हॉस्टल मे चली जाती है, साहिल बाहर बैठा उसका इंतज़ार करता रहता है। काफी रात हो जाती है। निशा नहीं आती। साहिल की आंखे एक बार फिर नम हो जाती हैं और फिर साहिल वहाँ से उठकर चला जाता है।)