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जिन्दगी एक डायरी

शादी से पहले और शादी के बाद

आज घर का सारा काम करने के बाद रेखा थोड़ी बैठी ही थी कि एक गहरी सोच में डूब गयी इतनी गहरी की वो उस समय मे जा पहुंची जब वो सिर्फ वो थी। ना किसी की पत्नी थी और ना ही किसी की बहु थी तो बस एक लड़की एक आम लड़की जिसे सेर सपाटा पसंद था म्यूजिक पर थिरकना पसंद था जो बस अपने मे ही मग्न रहती थी।

पापा के काम पर निकल जाने के बाद घर पर सिर्फ वो और उसकी मम्मी रहते कुछ देर बाद मम्मी भी खेत के लिए निकल जाती फिर सिर्फ वो और वो घर का गेट बंद करके टीवी पर सांग्स लगाकर वॉल्यूम तेज़ करके घर का सारा काम निबटाती।
 
मम्मी के आने तक रेखा नहा चुकी होती थी फिर दोनों रोज़ की तरह साथ ही बैठकर खाना खाते। रेखा की बड़ी बहन की शादी के बाद ये जैसे एक नियम सा हो गया था कि रेखा और उसकी मां एक साथ खाना खाते और बहोत सी बातें करते मां भी रेखा को इधर उधर की बातें बताकर खूब हंसाती।

शाम होती और उसकी मां फिर से बाहर निकल जाती और मजाल थी मां की चाय ठंडी होने से पहले वापस आ जाये फिर जब वापस आती तो रेखा मां पर चिढ़ते हुए चाय फिर से गर्म करती और मां रेखा को चिढ़ता देख खूब हंसती। 

जब कभी रेखा की कोई दोस्त घर आ जाती तो वो दिन तो मानों किसी फेस्टिवल से कम नहीं होता था।

इसी दौरान रेखा ने अपने स्कूल की पढ़ाई पूरी कर ली और उसके बाद आईटीआई में एडमिशन ले लिया था लेकिन उसकी हम उम्र की लड़कियों की तरह उसका अब तक कोई बॉयफ्रेंड नहीं था। ऐसा नहीं था कि उसे लड़को से बात करने में शर्म आती थी मगर लड़को से बात वो उसी तरह करती जैसे अपनी सहेलियों के साथ करती थी पर किसी को पसन्द करने वाली दोस्ती किसी के साथ नहीं थी।

 इस उम्र में होने वाले प्यार मोहब्बत के काम उसे अवारा नकारा लड़कों के टाइम पास करने के तरीके लगते थे। उसने सोचा था शायद जीवन आगे भी इसी तरह चलता रहेगा पर जब आईटीआई में एंटर हुई तो आईटीआई की हवा और माहौल ने सब कुछ बदल दिया। 

ये उम्र ही शायद कुछ ऐसी होती है जब मन आंकाक्षाओं कामनाओं से भरा होता है, चाहत होती है, कुछ नया करने की, किसी का प्यार पाने की, पर जो चाहते है अक्सर मिलता कहाँ है? आईटीआई में जब उसने अपनी सभी सहेलियों के कोई न कोई बॉयफ्रेंड देखे तो उसे भी एक बॉयफ्रेंड की जरूरत महसूस होने लगी और उसकी आकांक्षा भी हिलोरे लेने लगी। और कुछ ही दिनों में उसकी आकांक्षा की ये लहर संदीप पर जाकर खत्म हो गई। 

संदीप का स्वभाव आईटीआई में और लड़को की तरह नहीं था। वह हंसमुख और जिन्दादिल लड़का था। लड़कें और लड़कियों दोनों में ही उसका अच्छा फ्रेंड सर्कल था। संदीप से से बात करना रेखा को भी अच्छा लगता था। क्योंकि रेखा को वो बाकी कमीने लड़को की तरह नहीं लगता था जो सभी लड़कियों को एक ही नजरिए से देखते है।

रेखा ने संदीप से भी बातचीत तो और लड़को की तरह ही की थी, पर वो समझ नहीं पाई कि ना जाने कब उसे संदीप अच्छा लगने लगा। इसका एक कारण तो दोनों का एक साथ ज्यादा समय बिताना भी था। 

अक्सर किसी के साथ बिताये दो पल भी हमें जिन्दगी भर याद रह जाते है। रेखा ने आईटीआई से पहले भी कई लड़को से बात की थी पर संदीप में कुछ खास था।

 वो किसी के भी मजाक को कभी सीरियसली नहीं लेता था। किसी काम के लिए ना नहीं कहता था। अपने छोटे बड़े हर काम में वो अब संदीप को ही याद करती थी। संदीप भी हर वक्त उसकी मदद के लिए तैयार रहता था। काम होने के बाद वो कभी कभार चाय कॉफी के बहाने बहुत टाइम साथ बिताते थे। 

पहली बार रेखा के दिल में संदीप के लिए फीलिंग्स तब आई जब रेखा ने संदीप को ब्लैक पैंट शर्ट में देखा तो वहीं उसे अपना दिल दे बैठी। ब्लैक कलर रेखा का फेवरेट कलर था और संयोग की बात थी कि वो भी उस दिन ब्लैक ड्रेस पहन कर आई थी।

उसे देखते ही मुस्करा कर बोली आज तो मैचिंग- मैचिंग है
संदीप भी मुस्कुरा कर बोला मतलब तुम्हारा भी फेवरेट कलर ब्लैक है।
रेखा ने कहा हां

संदीप ने कहा कसम से रेखा आज तो इस ब्लैक ड्रेस में गजब ढा रही हो तुम जिसे सुनकर रेखा भी खिलखिला कर हंसने लगी और ऐसे ही हंसते हंसाते रेखा का एक साल बीत गया।

फिर एक दिन संदीप ने प्रपोज कर हद ही कर दी रेखा क्लासरूम में घुसी ही थी कि संदीप के दोस्त उसे आवाज देते हुए चेयर करने लगे कम-ऑन संदीप कम-ऑन रेखा कुछ समझती इससे पहले ही संदीप ने अपने हाथों में गुलाब लिए रेखा की आंखों में झांकते हुए कहा था आई लव यू रेखा मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं पूरा क्लासरूम चुप था एकदम खामोश बिल्कुल सन्नाटा। जिसे सुनकर रेखा की खुशी का कोई ठिकाना ना रहा लेकिन उसे डर लग रहा था कि कहीं वो उसे छोड़कर चला न जाएं जो संदीप ने भांप लिया था।

संदीप ने रेखा को भरोसा दिलाते हुए कहा चिंता मत करो मैं तुम्हें धोखा नहीं दूंगा बल्कि तुमसे शादी भी करना चाहता हूं क्या तुम मुझसे शादी करोगी?
रेखा ने हां में जवाब दिया और पूछा कि मगर क्या ये पॉशिबल हो पायेगा क्या हमारे पैरेंट्स इस रिश्ते को अपनायेगे जिसके जवाब में संदीप ने कहा कि तुम चिंता मत करो हम दोनों की कास्ट सेम है और जल्द ही तुम्हारे घर मेरा रिश्ता आयेगा बस तुम जल्दी से मेरे घर आने की तैयारी करो। 

देखते ही देखते संदीप और रेखा का रिश्ता पक्का हो गया और दोनों का इश्क़ परवान चढ़ने लगा दिन रात व्हाट्सएप पर मैसेज की बरसात होती रहती कॉल पर घंटों बातें होने लगी रेखा की आईटीआई कब कम्प्लीट हो गई पता ही नहीं चला। 

आईटीआई कम्प्लीट होने के बाद संदीप ने कहा चलों अब शादी करते है लेकिन रेखा ने कहा कि वो पहले सीटीआई करना चाहती थी उसके बाद शादी करेगी इस पर संदीप ने कहा कि सीटीआई तो वो शादी के बाद भी कर सकती है क्योंकि संदीप हर कदम पर रेखा का साथ निभाने के लिए तत्पर था। लेकिन रेखा की जिद्द पर संदीप ने हां कह दिया और रेखा सीटीआई करने के लिए चैनई चली गई।

इस दौरान रेखा के दिल में संदीप के लिए प्यार और बढ़ रहा था दोनों पूरी रात एक दूसरे से बातें करते रहते क्योंकि संदीप से रिश्ता पक्का होने के बाद अब रेखा बेफिक्र हो चुकी थी धीरे धीरे वक्त भी गुजरता गया और अब रेखा ने भी अपनी सीटीआई कम्प्लीट कर ली थी सीटीआई का रिजल्ट आते आते  दोनों की शादी हो गई।

रेखा बहुत खुश थी क्योंकि उसकी शादी उसके पसंद के ही लड़के से जो हुई थी लेकिन रेखा की ये खुशी ज्यादा दिन नहीं रही क्योंकि संदीप अब बदल चुका था वो रेखा से पहले जैसा व्यवहार नहीं करता था  छोटी छोटी बातों पर उसे डांट देता बात बात पर टोकने लगा तुम ये मत करो वो मत करो तुमने ये क्यों नहीं किया और रेखा को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब रेखा को महसूस हुआ कि संदीप उस पर शक करने लगा है।

रेखा की जिन्दगी बदल रही थी मगर अब वो कुछ नहीं कर सकती थी क्योंकि शादी उसी की मर्जी से हुई थी।
संदीप ने अब रेखा के फ़ोन कॉल्स चैक करना शुरू कर दिया व्हाट्सएप पर किसी लड़के से चैट देख कर चिढ़ जाता।

रेखा को लगने लगा था कि कहीं उसने ये शादी करके कोई गलती तो नहीं की क्योंकि रेखा ने संदीप में इस बदलाव की कभी कोई उम्मीद नहीं की थी मगर फैमिली में वो किसी से कुछ कह भी नहीं सकती थी तभी अचानक दरवाजे की बैल बजी और रेखा अपनी गहरी सोच से बाहर आई और देखने आई कि दरवाजे पर कौन है दरवाजे पर संदीप को देखते ही अपना मुंह लटका लिया और मन ही मन खुद को कोसते हुए फिर से अपने काम में लग गई।