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जिन्दगी एक डायरी

मूड ख़राब

वैसे आजकल किसी का भी मूड बहुत जल्दी खराब होता है। मूड खराब क्यों है इसके पीछे हज़ारों वजह हों सकती हैं, मूड नहीं है, मूड खराब है, फलाना ढिमकाना।
आखिर ये मूड है क्या चीज? 

दरअसल हर कोई जानता है मूड क्या है, पर जानना जरूर चाहता है, पर यहां मैं ये नही बता रहा कि मूड क्या है? खराब कैसे होता है? मैं कहने आया हूं आज मेरा मूड खराब है।
आखिर कोई एक ऐसा दिन होता जिस दिन मेरा मूड खराब न हो, हर रोज हो जाता है, आखिर क्यों?

कभी दोस्तों की बातों से, कभी किताबों को पढ़ते पढ़ते चिड़चिड़ापन, कभी बे बात गुस्सा, कभी अपनी बात न माने जाने पर , कभी किसी अपने के नाराज़ हो जाने पर, कभी पापा मम्मी द्वारा डांट पड़ने पर, ये कमबख्त मूड है ही ऐसी चीज, कितना भी सुधारों खराब ही रहता है, साला परमानेंट मेकैनिक भी मूड को हमेशा के लिए ठीक नही कर सकता।

वैसे आज मैं मूड पर क्यों लिख रहा हूं, मेरा मन होता है कविताएं लिखूं, प्रकृति को अपने शब्दों में उतारूं, उन बेजुबान जानवरों को बता सकूं कि मैं उन्हें कितना चाहता हूं, 

अपनी बात उससे कह सकूं जिससे तब नहीं कह पाया था, तब भी डरता था अब भी डरता हूं, पर किससे? शायद खुद से।

सिर्फ खुद से डरने का ये डर इतना बड़ा सिरदर्द बन गया कि जब भी वो सब याद आता है मूड खराब हो जाता है,

छोटी छोटी गलतियों को यादकर, जो मैं कभी करना नहीं चाहता मूड खराब हो जाता है। 

आखिर ये सब क्यों होता है, आखिर क्यों हम खुद ही खुद से नाराज़ रहते हैं और बाकियों को भी खुद से नाराज़ होने पर मजबूर कर देते हैं। ये सब सवाल केवल खुद से पूछ सकते हैं,

कभी कभी अपने अंदर छुपी भावनाओं का भी मूड पर भयंकर असर पड़ता है, जलन होती है लालच लगता है झूठा दिखावा, दिखावे के लिए बड़े बनने की नाकाम कोशिश इन सारी बातों से मूड खराब हो जाता है।

और इसका परिणाम इतना घातक होता है कि सोचकर रूह कांप उठे।

हम अक्सर पढ़ते है कि अपने मन पर काबू रखें, स्वयं को हर बुरी से बुरी परिस्थिति के लिए तैयार रखें, किसी भी हाल में मानसिक संतुलन न खोए, और चाहे कितनी भी बुरी स्थिति हो मुस्कुराकर जिये, मगर सच तो ये है कि ये सब सम्भव नहीं है। बहुत कम लोग होते है जो ये सब कर पाते हैं मगर मैं उनमें से नहीं हूं।

हर किसी को खुश रखना बहुत ही टेड़ी खीर है अगर ये सब सम्भव हो जाएं तो, एक के खुश होने से दूसरा भी खुश होगा, तब सब खुश होंगे, जब पैसे से ज्यादा एक दूसरे की इज्जत और खुशी को अहमियत दिया जाने लगेगा तब कभी किसी का मूड खराब नही होगा।

जब समाज से इस व्यवस्था को दूर किया जाएगा, जब रिश्तों में भरोसे और अपनेपन की बुनियादी ताकत होगी, जब माँ बाप के डांट के पीछे छिपे प्यार को समझने की समझ होगी।

जब दोस्त के नाराज़ होने पर उससे सॉरी बोलने हिम्मत होगी, जब बड़ा दिल करके सबको गले लगाने का जुनून होगा, जब सबको साथ लेकर आगे बढ़ने का जज्बा होगा, जब बच्चों को नाना नानी, दादा दादी कहानियां सुनाया करेंगे।

जब किताबें सिर्फ पढ़ने के लिए नही जीवन मे उतारने के लिए पढ़ी जाएंगी, तब एक आदर्श समाज का जन्म होगा, जहां कभी किसी का मूड खराब नहीं होगा।

मैं ग़लत हों सकता हूं पर इस दुनिया में जीने के लिए सब उतने ही हकदार हैं जितने कि इंसान इंसानों में इंसानियत का होना जरूरी है।

 इस दुनिया में पेड़ पौधों को वापस लाओ, जंगल को वापस लाओ, उन फूलों को वापस लाओ जिन्हें सूंघते ही मन प्रसन्न हो जाता है।

उन चिड़ियों की चहचहाहट को वापस लाओ, वो सब वापस लाओ जिसके लिए ये प्रकृति बनी है, आगे बढ़ने का मतलब खाई खोदकर कूदना नहीं होता।

अगर इंसान इसी तरह दिखावें के लिए जीता रहा तो एक दिन सब कुछ हार जाएगा, सबका मूड ऐसे ही खराब होता रहेगा।

जब तक अपने दिल की बात खुलकर किसी से कहने की हिम्मत नहीं लाओगे, अपना मूड खराब करते ही रहोंगे।।