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एक तरफा प्यार (मेरी नज़र में)
प्यार करना गुनाह है या प्यार करके उसमे तड़पना, आज तक ये बात समझ नहीं आई। लोगो कहते है की प्यार भगवान की वो देन है, जो किस्मत वालों को नसीब होती है, लेकिन मुझे तो जो भी मिला बस रोता ही मिला, तो क्या इसका मतलब ये माना जाये की भगवान ने वो किस्मत किसी की बनाई ही नहीं।
प्यार शब्द सुनने मे जितना प्यारा ओर सुखद है, शायद ये असल जिंदगी मे उससे ज्यादा दर्द भरा है। जिस जिस ने इस प्यार को अपने गले लगाया है, सच मानो वो दुबारा किसी से मिलने जैसा नहीं बचा।
प्यार वो पवित्र एहसास है जो इतनी जल्दी ओर हर किसी को ना तो समझ आता है ओर ना ही हासिल होता है। आजकल लोग बस दो दिन किसी से मिलना या बात करना या किसी के साथ रहने को प्यार समझ बैठते है। प्यार का मतलब बस किसी को हांसील करना नहीं हो सकता है।किसी को चाहते हुये उसकी खुशियों को अपने से ज्यादा अहमियत देना भी प्यार है, जरूरी नहीं की दोनों तरफा प्यार हो तो ही आपका प्यार सही है। कभी कभी एक तरफा प्यार आपके उस दो तरफा प्यार से कई ज्यादा बेहतर साबित हो जाता है।
इसीलिए कभी भी अगर किसी से एक तरफा प्यार करो, तो पहले ये जरूर जान लेना की जिससे तुम्हें ये प्यार हुआ है, क्या ऐसा ही कुछ उसे भी तुमसे है, कभी कभी एक तरफा प्यार होता दोनों तरफ है, मगर कुछ रिश्तों कुछ भावों के चलते हम उसे अपने प्यार का अहसास नहीं करवा पाते है।।
