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लॉक डाउन में अब तक का सफर
जी हा पहले पूछते थे और भाई क्या चल रहा है ? तो जवाब होता था - भाई इंडिया में तो फोग चल रहा है l लेकिन अब पूछो तो एक ही जवाब की लॉन डाउन चल रहा है l किसी ने भी नही सोचा था ऐसा भी वक्त आएगा जब हम अपने घरों में कैद हो जाएंगे l बच्चों से लेकर बड़े बुढो सबको गर्मियों की छुट्टियां मिली है इस बार।
सब घर मे है बुजुर्ग जो चाहते थे कि फैमिली के साथ वक्त बिताए लॉक डाउन में अब वो इस बात से परेशान है कि सब घर मे क्यों है।
बीवी जिसको हमेशा शिकायत रहती थी कि पति के पास मेरे लिए वक्त नही है अब वो भी दुआ कर रही की कब लॉक डाउन खुले ओर वो फिर से आफिस जाएं।
बच्चे जिन्हें स्कूल कॉलेज जाने में मौत आती थी उनकी खुशी का तो ठिकाना ही नही रहा लेकिन इनकी किस्मत इतनी खराब की टीचर्स ने इनके लिए ऑनलाइन क्लास लगा दी।
बचे मुझ जैसे लोग जिन्हें दिन दुनिया की कोई खबर नहीं। जिनका जन्म सिर्फ घरवालों के ताने सुनने के लिए हुआ है वो लगे है अपने अपने फोन में।
लॉक डाउन शुरू हुआ तो घर में सब बोर होने लगे ऐसे में सभी कुछ न कुछ नया कर रहे है कोई कुकिंग कर रहा है कोई सिंगिंग कर रहा है मतलब सब अपनी अपनी हॉबी जगा रहे है पर कुछ मेरी तरह भी है जिनका काम खाना सोना फोन चलाना है। लेकिन कमरे के एक कोने में आप शांति से बैठे फोन चलाओ ये घरवालों को कहा मंजूर है।
लॉक डाउन की सबसे अच्छी बात ये लगी कि "रिश्तेदार अब घर नही आते" पर फोन सबके पास है तो जब उनका मन होता है वो फोन पर भी सुना ही देते है लेकिन हम भी कम हरामी नहीं है एक रिश्तेदार ने कहा कि आप लोगो से मिले बहुत दिन हो गए सोचा घर आ जाएं।
मैंने दो तीन बार जान बूझकर खांसते हुए कहा - हा हा बिल्कुल , वैसे थोड़ी तबियत खराब है मेरी पर कोई नहीं आप आ जाओ।
इसके बाद उनका रिएक्शन था कि - अरे नही नही बेटा फोन पर बात कर ली मिलने जैसा ही है , तुम डॉक्टर को दिखाओ मिलना जुलना बाद में कर लेंगे।
अब लॉक डाउन है ऐसे में मनोरंजन जरूरी है तो दूरदर्शन पर रामायण शुरू हुई l ऐसा धारावाहिक जिसे पूरा परिवार साथ बैठ कर देख सके l बुजुर्ग इसलिए ताकि मरने से पहले रामायण देखते हुए पापों का प्रायश्चित कर ले , पिताजी इसलिए देखते है क्योंकि उनके बाप के सामने चेनल बदलने की हिम्मत नहीं, मम्मी इसलिए देख रही कि एक घंटा ही सही घर के कामों से थोड़ा आराम मिलेगा , वही छोटे बच्चे इस लालच में की उन्हें वो धनुष से बाण निकलने वाला युद्ध अच्छा लगता है , वहीं कुछ मुझ जैसे है जो memes बनाने के चक्कर मे देख लेते है लेकिन देखते देखते इंटरस्ट बढ़ जाता है l सबसे ज्यादा इफ़ेक्ट ये पड़ा कि मेरे मुंह से गाली निकलना बंद हो गया।
एक शाम दोस्त ने फोन पर कहा - अबे साले
रामायण का असर इतना था कि मेरा जवाब ये था - ऐसी अभद्र भाषा का इस्तेमाल ना करो मित्र
जिसके बदले में दोस्त ने 4 5 गालियां फूल फ्लो में दी l खैर घरवालों के साथ रामायण देखना जारी था अपना स्क्रेज्म वाला दिमाग इतनी जल्दी ठिकाने पर थोड़े आ सकता था , जब लक्ष्मण ने सूर्पनखा के प्रेम प्रस्ताव को ठुकराया तो अपने मुंह से निकल गया - इसे कहते है सख्त बंदा ,
पीछे से पैरागोन कि चप्पल 120 की स्पीड से सीधा रीढ़ की हड्डी पर ओर मेरा रामायण देखना बंद , बस उस दिन मुझे पर्सनली बुलाया गया जिस दिन कुम्भकर्ण का एपिसोड था क्योंकि मेरे घरवालों को नजर में मैं वहीं था। रामायण तो ख़त्म हो चुकी थी लेकिन दिन में कम से कम 7-8 बार मेरे मुंह से " मंगल भवन अमंगल हारी" निकलता था और बैकग्राउंड में सुनता था "महाभारत"
खैर लॉक डाउन बढ़ता जा रहा था और इंतजार के अलावा अपने पास करने को कुछ भी नही था l यूट्यूब पर सारी साउथ फिल्में देख डाली ओर वेब सीरीज से जब मन भर गया तो हमने रुख मोड़ा टीवी की तरफ ,, फिल्मों सीरियल में दिलचस्पी नही रहीं न्यूज देखना मेरे आपे से बाहर है लेकिन एक दिन डिबेट देख ही लिया तो घरवालों ने पूछ लिया क्या सीखा डिबेट से ?
मैंने कहा - मुझे बोलने दीजिये , मेरी आवाज आप तक पहुंच रही है , देखिए मुझे बोलने दीजिये , आप मुझे बोलने नहीं दे रहें , मोहतरमा मेरी आवाज पहुंच रही है आप तक।
ये सुनकर घरवाले सदमे में थे उसके बाद आज तक कुछ नहीं पूछा। ये सब छोड़कर मैंने देखना शुरू किया क्राइम पेट्रोल अरे वहीं जिसमे नए नए कांड करना सिखाते है l रोजाना के 5 एपिसोड कंटिन्यू देखने के बाद एक ही बात समझ मे आती थी कि घर बैठे भी इंसान क्रिमिनल बन सकता है l खैर मेरी माताश्री भी मेरे साथ कभी कभार देख लिया करती थी पर एक दिन टीवी में दिखाया कि कैसे एक बेटे ने अपनी माँ के तानों से परेशान होकर उन का खून कर दिया तबसे मेरी माँ मेरे साथ बहुत खुश है सुबह 8 बजे के बाद भी नही उठाती।
खैर आखिर में मैंने शिनचैन देखना शुरू किया उसके बाद डोरेमॉन लेकिन वो देखने के बाद तो मुझे रोना ही आ गया क्योंकि रियल लाइफ में हम नोबिता है - शक्ल अच्छी नहीं है , दिनभर ताने , crush भाव नहीं देती ओर किस्मत का तो पूछो ही मत वो नोबिता से भी 10 गुना ज्यादा खराब मतलब कुछ सही करने जाओ तो पक्का गलत होगा इसलिए मैंने अपने कर्मों का नाम बदलकर कांड रख दिया है।
टीवी से एक बार फिर मोबाइल की तरफ आ गए पर ये लॉक डाउन खत्म होने का नाम नही ले रहा था l तभी न्यूज आई की देश की अर्थव्यस्था सुधारने के लिए दारू के ठेके ओर दुकानें खोली जाएगी l मतलब जिन्हें अब तक बेवड़ा समझ रहे थे असल मे वो देश की अर्थव्यस्था सुधार रहे थे फिर क्या जैसे ही दुकानें खुली सब दौड़ पड़ ,2 किलोमीटर की लाइन में लगे है शराब के लिए ओर माथे पर शिकन तक नहीं। वहीं अगर राशन की दुकान पर लाइन में लगना पड़ जाये तो इन्हें मौत आती है l अच्छा लाइन में दारू के लिए खड़े ये वहीं लोग है जो कह रहे थे कि हमारे पास खाने को पैसे नहीं है , तो दारू के लिए पैसे कोनसे खाते से लाये हो l हालात ये है कि एक ही लाइन में बाप बेटा दोनों लगे है बाप ने फोन किया बेटा कहा हो ?
"राशन लेने आया हूं पापा",बेटे ने कहा"मैं लाइन में बहुत पीछे हूं। 2 बोतल मेरे लिए भी ले लियो",बाप कहता है।
एक लडके ने तो पूरा का पूरा कार्टून ही खरीद लिया असल जिंदगी का कतई कबीर सिंह लग रहा था वो।
इस मामले में लड़के तो लड़के लड़कियां अलग से लाइन में लगी है मतलब ये देखकर अमीर खान भी ये बोल के पछता रहा होगा - म्हारी छोरियां छोरों से कम है के ?
एक ही घर में बाप ये कहकर घर से निकलता है - बैंक जा रहा हूं , बेटा कहता है राशन लेने जा रहा हूं ओर बेटी कहती है डॉक्टर के पास जा रही हूं। जबकि तीनों मिलते है दारू की दुकान पर अब आप समझ जाओ कौन पहले पिटेगा।
दिनभर लाइन में लगने के बाद एक चाचा को एक बोतल नसीब हुई पीकर लड़खड़ाते हुए घर आ रहे थे, मैंने बोल दिया कि चाचा इतनी क्यों पी कि अब पैर लड़खड़ा रहे है
चाचा फूल स्वेग में - देश की अर्थव्यस्था संभाल रहे है हम लोग थोडा तो लड़खड़ाएंगे ही l
लॉक डाउन जो ना कराए कम है सरकार ने विनती की के राशन बचाये , बर्बाद न करें लेकिन लोगों को किसी की नहीं सुननी सबके सब अपने अपने घरों में मास्टर सेफ बने घूम रहे है l कोई जलेबी बना रहा कोई पकोड़े तो कोई समोसे।
अरे ! भाई लॉक डाउन खत्म करना है घर का सूजी बेसन नही।
एक डेट के बाद लॉक डाउन जो है बढ़ते ही जा रहा है और अब तो हर जगह से एक ही आवाज आती है की अब तो आदत सी है मुझको ऐसे जीने में , लेकिन कुछ मुझ जैसे लोग भी है जिन्हें कोई फर्क नही पड़ता उनकी जिंदगी कल भी झंड थी आज भी झंड है और कल भी शायद ऐसे ही। वो सब ताने खाकर जिंदा थे आज भी ताने खाकर खुश है।
जहां पूरी दुनिया इन वायरस से डरी हूई है इंडिया वाले वायरस को जश्न की तरह मना रहे है l और शायद यहीं हमारी सबसे बड़ी ताकत है कि प्यार से लेंगे इस वायरस की।
2019 के अंत मे एक गाना आया था - मुझे छोड़कर जो तुम जाओगे , बड़ा पछताओगे बड़ा पछताओगे।
लेकिन हम ठहरे आशिक़ लोग कतई जहर किस्म के , इस गाने को लेकर सिर्फ अपने बाबू शोना पर भड़ास निकाली जबकि असल मायनो में 2019 ने हमारी लगा दी 2020 में आकर अब हर कोई पछता ही रहा है l पर मैं सेल्यूट करता हूं मेडिकल लाइन से जुड़े हर इंसान को जिनमें डॉक्टर्स , नर्सेज , मेडिकल स्टोर , सफाईकर्मी , ओर भी बहुत लोग है उन्हें जो अपनी जिंदगी की परवाह ना करते हुए हम सबके लिए इस वायरस से दिन रात लड़ रहे है l पुलिस प्रशासन जो हमारी सेफ्टी के लिए हमसे घरों में रहने की अपील कर रही है और वो सारे लोग जो हमारे लिए बहुत कुछ कर रहे है।
ये ऐसी घड़ी है ऐसा वक्त है जिसे हम सब को मिलकर इस वायरस के खिलाफ लड़ना है l सामाजिक दूरी बनाए रखें
साबुन से हाथ धोते रहें , भीड़ ना करें ,जरूरत हो तो ही घरों से बाहर जाएं और कृपया सरकार के आदेशों का पालन करें क्योंकि अगर आपने करने की ठानी तो वो दिन दूर नहीं जब जीत जाएगा इंडिया , फिर मुस्कुराएगा इंडिया।।
जय हिंद जय भारत।
