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जिन्दगी एक डायरी

स्कूल वाला क्रश-5

रोहित अपने ही मन में चल रहे सवालों के भवर में इस तरह उलझ चुका है कि उसके लिए अब खुद से बाहर निकल पाना मुस्किल लग रहा था ,  इसलिए वो दोपहर में खाने के बाद मामाजी के साथ बाहर घूमने जाने का प्लान बनाता है |

रोहित मामाजी के साथ एक सुनसान स्थान पर पहुंचता है  जहा उसे मामाजी से अपने हर सवाल का जवाब मिल सके |

रोहित :: मामाजी मेरे मन में चल रहे हर प्रश्न को आप बखूबी जानते है इसलिए में आपसे कुछ नही पूछूंगा , आप सब बताइए यहां चल क्या रहा है ...!!!

मामाजी :: हां रोहित तेरे मन में चल रहे कोतूहल को में भली-भांति समझ सकता हूं | तेरे हर प्रश्न तेरी हर उलझन का जवाब मैं दूंगा | यह तो तू अब तक जान ही  चुका होगा कि दीदी को कुछ नहीं हुआ था | यह सब कुछ तुझे अमेरिका से अचानक यहां बुलाने के लिए किया गया है | जो झूट तुझसे कहा गया है उसके बारे में भी कोई नही जानता सिवाय मेरे और जीजाजी के |

रोहित :: हा पर ऐसा क्या हो गया था  मामा जी जो मुझे अमेरिका से इंडिया बुलाने के लिए पापा और आपको इतना बड़ा झूठ  बोलना पड़ा |

मामाजी :: यहां जो कुछ भी हो रहा है उसकी शुरुआत यहां से नहीं बल्कि अमेरिका से होती है | 

यह सुनते ही रोहित के पैरों तले जमीन फिसल जाती है | अब रोहित अपनी उलझन से निकलने का बजाय एक अगले प्रश्न की उलझन में फस जाता है | लेकिन एक नाम मामाजी के मुंह से सुनते ही वो आश्चर्य में पड़ जाता है |

मामाजी :: क्या तु अमेरिका में किसी भावना नाम की लड़की से मिला था |

रोहित:: हां | भावना एक पीजी स्टूडेंट थी जिसकी मेरे अंडर में ही 6 महीने की ट्रेनिंग थी पर उसने अपनी ट्रेनिंग पूरी नहीं की और 2 महीने बाद ही चली गई थी उसके बाद मुझे उसके बारे में कुछ नहीं पता | पर आप उसे कैसे जानते है |

मामाजी:: क्या था तुम्हारे बीच ?

रोहित :: अरे मामाजी कुछ नहीं | आप तो जानते हैं ना इन स्टूडेंट्स को पता नहीं क्या देख लिया था उसने मुझ में जो पसंद करने लगी थी |  इनके लिए मैं तुमसे प्यार करती हूं कि तो कोई कीमत ही नहीं है कहती थी यदि तुमने हां नहीं की तो अपनी जान दे दूंगी थोड़ी सी डांट लगाई तो चली गई उसके बाद से उसका कुछ पता नहीं |

मामाजी::  तुम्हें शायद जानकर झटका लगेगा उस लड़की ने सुसाइड कर लिया है |

ये सुनते ही रोहित के हाथ पैर कापने लगते है, उसके माथे से पसीने की बूंदे टपकने लगती है  | वह सोचने लगता है कि एक लड़की महज 21 साल की जिसके मरने की वजह में हूं | 

मामाजी :: रोहित संभालो अपने आप को जो होना था वह हो चुका है अब उसे बदला नहीं जा सकता |

रोहित लड़खड़ाती हुई आवाज में ::  पर भला मामा जी कोई ऐसे कैसे कर सकता है | क्या कोई एक क्रश के लिए अपनी जान तक दे सकता है |

मामाजी :: छोटी उम्र का प्यार ऐसा ही होता है  और सब तुम्हारी तरह बड़े दिलवाले नहीं होते | 

रोहित और मामा जी थोड़ी देर में ही शांत बैठे रहते हैं

रोहित :: लेकिन आप यह सब कैसे जानते हैं भावना का मुझसे मिलना और उसका सुसाइड कर लेना मुझे यहां झूठ बोलकर बुलाना और पूरे परिवार का यहां पर ईखट्टा होना ईन सब बातो में क्या कनेक्शन है

मामाजी :: कनेक्शन है , एक बात बताओ रोहित भावना के जाने के बाद तुम्हारे साथ कुछ ऐसा नहीं हुआ जिसके बारे में तुमने कभी सोचा भी ना हो कुछ ऐसी घटनाएं जो तुम्हें अजीब  लगी हो ?

रोहित थोड़ी देर सोचने के बाद :: आज से करीब 6 महीने पहले मेरी एक गलती की वजह से मेरी कंपनी को बहुत बड़ा लॉस हुआ था उस लॉस को पूरा करने में मेरी पूरी सेविंग खत्म हो गई थी और मुझे उस कंपनी को छोड़ना भी पढ़ा था उसके बाद बड़ी मुस्कील से जॉब मिली , पे स्केल भी कम था पर मेरे सामने और कोई रास्ता नहीं था | लेकिन यह सब क्यों आप मुझसे पूछ रहे हैं |

मामाजी:: क्यों तुम्हें कुछ अजीब नहीं लगता जिस कंपनी के  तुम बेस्ट एम्पलाई रहे हो वहां तुमसे इतनी बड़ी गलती हो जाना | कुछ अजीब नहीं लगता !!!

मामाजी की यह बात रोहित को कुछ इशारा दे रही थी रोहित को एक घटना और याद आती है |

रोहित :: करीब 3 महीने पहले जब मैं ऑफिस से घर जा रहा था तब कुछ चोरों ने मुझ पर हमला कर दिया , मेने उन्हें अपना पर्स उन्हें दिया पर फिर भी उन्होंने वो पर्स लेने की बजाय मुझसे हाथा पाई की | उस रात में रणवीर से में पहली बार मिला , वो पता नही कहा से अचानक हीरो की तरह वहा आ गया और मुझे बचा लिया | यह बात तो साफ हो गई थी कि उन्हें मुझसे पैसे नहीं चाहिए थे उनमें से एक यह बोलते हुए गया go back to your country 

मामाजी :: ये सब उसी की चाले थी !!! तुम्हे इंडिया आने के लिए मजबूर करने के लिए |

रोहित :: किसकी चाल थी कोन मुझे इंडिया बुलाना चाहता था ?

मामाजी:: वही जिसके कहने पर जीजा जी ने तुझे यहां इंडिया बुलाया है .............
(एक गहरी साँस लेने के बाद ) भावना की एक बड़ी बहन है स्पेक्टर गीता | दोनों में बहुत प्रेम था ओर हो भी क्यों नहीं दोनों का एक दूसरे के सिवा दुनिया में कोई और नहीं था | वह दोनों ही एक दूसरे के लिए सब कुछ थी | भावना की अचानक ही सुसाइड कर लेने की खबर जब गीता को मिली तो उसे गहरा सदमा लगा | वह भावना की मौत का कारण तुझे मानती है वह तुझसे उसकी मौत का बदला लेना चाहती है | 

इसलिए अमेरिका में तेरे साथ यह सब कुछ हुआ ताकि तू इंडिया वापस आ जाए लेकिन जब उसे लगने लगा की तू ऐसे इंडिया नहीं आएगा तो उसने अपनी चाले यहां भी चलना शुरू कर दी | उसने अपनी पोजीशन और पावर का पूरा उपयोग किया , हमें बर्बाद कर देने के लिए | उसने हमारे ट्रको में अवैध शराब रखकर पकड़वा दी हमारा ट्रांसपोर्ट का धंधा पूरी तरह से बंद हो गया |

रोहित : यंहा मेरी वजह से इतना कुछ हुआ और मुझे इसका पता तक नहीं मुझे अपने क्यू नहीं बताया मामाजी ?

मामाजी : इस सब का तो मुझे भी नहीं पता था फिर में कैसे तुझे कुछ बताता | यह सब कुछ जीजाजी अकेले ही सहते रहे | उन्होंने कभी इसकी भनक भी किसी को होने नहीं दी |  मुझे यह बात मुनीम चाचा ने जीजाजी से छुपकर बताई | सुनकर मुझे विश्वास नहीं हो रहा था ,  की हमारे ट्रकों में अवैध शराब !!! अरे जीजाजी तो उसे भी अपने यहा ड्राइवर नहीं रखते थे जो शराब पीता हो , भला एक इतना आदर्श और सिद्धांतवादी इंसान अवैध शराब का धंधा केसे कर सकता है |

मैं जीजाजी से बात करने ऑफिस पहुंच जाता हूँ (बात करते हुए रोहित के मामाजी फ़्लैश बैक में चले जाते है )

रमेश ( मामाजी का नाम ) : जीजाजी ये सब की हो रहा है और आप ने मुझे आज तक कुछ बताया क्यों नहीं , में जनता हूँ आप कभी ऐसा को काम कर ही नहीं सकते

रोशन सिंह जी (रोहित के पिताजी ) : (अपना गला साफ करते हुए थोड़ी भरी आवाज में ) हा रमेश में भी यही सोच रहा हूं , की वो कोन हो सकता है | और भला हमारे उपर कीचड़ उछाल कर किसी को क्या फयदा हो सकता है | 

हम लोग यही बात कर रहे थे कि कौन हो सकता है पर कुछ समझ में नहीं आ रहा था | 

रमेश: जीजाजी किसी को पुलिस की इस बात पर किसी को भी यकीन नही हो रहा है | में अभी यूनियन लीडर से ही मिल के आ रहा हु | पूरी यूनियन हमारे  साथ है ,  यूनियन लीडर ने तो यहां तक कह दिया है कि 2 दिन मे यदि उन्होंने हमारे  ट्रक  नहीं छोड़े तो हम स्ट्राइक कर देंगे | 

रोशन सिंह जी :: शांत रमेश इस सब की जरूरत ही नही पड़ेगी | मुझे विश्वास है जरूर ही कुछ इस समस्या का हल निकलेगा | चलो घर चलते है मुझे तबियत कुछ ठीक नहीं लग रही है |

रमेश :: हा जीजाजी चलिए घर चलते है |

रोशन सिंह जी :: तुमने अपनी दीदी को तो नही इसके बारे में कुछ बताया ना वह बेवजह अपना B P बड़ा लेगी 

रमेश :: नहीं जीजाजी मेने अभी किसी से भी इस बारे में चर्चा नही की है |

इस बात का अंदेशा गीता को भी लग चुका था कि जीजा जी के व्यक्तित्व पर दाग लगाना इतना आसान नहीं होगा इसलिए वह अपनी अगली चाल भी पहले ही चल चुकी थी | 

अगले दिन जब जीजाजी में और वकील साहब हम तीनों ऑफिस में बैठकर कैश की तैयारी कर रहे थे तभी अपने गांव से भीकू साझीदार , सरपंच साहब और कुछ लोग जीजा जी से मिलने के लिए आए |

रोशन सिंह जी :: आइए आइए , आप सब लोग एक साथ यहां सब खैरियत तो है ?

सरपांच जी :: हमारे खेतो को नहरों से मिलने वाला पानी बंद कर दिया गया है , नहरों की दिशा मोड़ दी गई है यदि जल्द ही पानी नहीं मिला तो खड़ी फसलें बर्बाद हो जाएगी | हमने इस बारे में सिंचाई अधिकारी से भी बात की तो उन्होंने यही कहा कि ये कलेक्टर साहब के आदेश है | अच्छा होगा आप उनसे ही बात करे , हम वो चाहते थे कि आप हमारे साथ कलेक्टर ऑफिस चले और  इस बारे में उनसे बात करे | 

जीजाजी समझ गए की ये जो कोई भी है कोई बहुत पहुंची हुए चीज है और वो हर तरफ से अपनी चाले चल रहा है |
उन्हें ये भी यकीन हो गया था कि ये जो कोई भी है बहुत जल्दी ही सामने आने वाला है | 

फिर हम सभी कलेक्टर साहब से मिलने उनके ऑफिस पहुंचे और वहा उनके आने का इंतजार करने लगे | जैसे ही कलेक्टर साहब वहा आए उन्होंने अपने चपरासी से सिर्फ जीजाजी को अंदर आने के लिए कहा |

कलेक्टर साहब :: आइए रोशन सिंह जी , बैठिए | बताए केसे आना हुआ में आपकी क्या मदद कर सकता हूं |

रोशन सिंह जी :: हम यहाँ क्यू आए है ये बात आप बहुत अच्छी तरह से जानते है , जिसकी भी दुश्मनी है मुझसे है फिर इन सब का क्या कसूर है |

कलेक्टर साहब :: अरे आप तो मेने जितना सोचा था उससे कई ज्यादा समझदार निकले सीधे मुद्दे की बात पर आ गए , तो सुनिए रोशन सिंह जी मेरा भी इन सबमें कोई लेना देना नही है , में तो बस किसी के कर्ज उतार रहा हूं |

रोशन सिंह जी :: बेकसूर गांव के सीधे साधे लोगो को परेशान करके | 

कलेक्टर साहब :: आप एक बार उनसे मिल लीजिए तो वादा करता हूं की गांव में नहरों का पानी तुरंत ही पहुंचा दिया जाएगा | 

रोशन सिंह जी :: में भी यही चाहता हूं , आप बताए कहा मिलेंगे आपके Mr. Unknown 

कलेक्टर साहब :: जोरो से हस्ते हुए जल्द ही मिलेंगे आपसे आपके Mr. unknown , और कल तक गांव में नहरों का पानी भी पहुंच जाएगा | आप सभी को जो भी मेरी वजह से तकलीफ हुई है में उसके लिए माफी चाहता हूं | बताए में आपकी क्या सेवा कर सकता हूं |

रोशन सिंह जी :: जी कोई ताकालुफ्फ की जरूरत नहीं है , अपने इतना कर दिया काफी है अब हमे जाने की अनुमति दीजिए 

और रोशन सिंह जी बाहर आकर सबको बता देते है की कल तक गांव में नहरों में पानी आ जायेगा , सभी उन्हें धन्यवाद देकर चले जाते है | रमेश और रोशन जी भी अपने आफिस वापस आ जाते है | 

रमेश :: नहरों में पानी छोड़ने के लिए क्या सर्त रखी है कलेक्टर साहब ने |

रोशन सिंह जी :: वह जो भी मिलना चाहता है |

तभी रोशन जी के मोबाइल की रिंग बजती है रोशन जी फोन उठाते है :: हेलो कोन 

फोन के दूसरी तरफ से आवाज आती है Mr unknown.....