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जिन्दगी एक डायरी

स्कूल वाला क्रश-4

रोहित रणवीर के  घर से डिनर करके घर  पहुंचता ही है कि थोड़ी देर में ही फोन की घंटी बजती है  रोहित कॉल रिसीव करता है फोन पर  रोहित के पिताजी है |  

एक अजीब सी दर्द भरी आवाज आवाज में रोहित के  पिताजी ' हेलो ' कहते हैं |

रोहित :: हेलो !! क्या हुआ  पापा आपकी आवाज  कुछ ठीक नहीं लग रही , सब ठीक तो है ना ¡¡¡

रोहित को किसी अप्रत्याशित घटना का पूर्वानुमान हो जाता है

रोहित के पापा :: कुछ नहीं बेटा , बस तू आ जा  अब !!!

रोहित :: आप पहले बताइए तो सही क्या हुआ आपने पहले कभी ऐसे बात नहीं की |

रोहित के पापा :: कुछ नहीं बेटा अब इस उम्र में हमें पैसा नहीं तेरा साथ चाहिए घर में बहू की हंसी और बच्चों की किलकारियां चाहिए , बहुत हुआ अब तू लोट आ अपने वतन

रोहित ::  आप बताएंगे क्या हुआ , आपको  कसम है बताइए क्या हुआ

रोहित के पापा :: तेरी मां को दिल का दौरा पड़ा है वह हॉस्पिटल में  एडमिट है | 

सुनते ही रोहित के पैरों तले जमीन खिसक जाती है  कुछ पलों के लिए तो वह अपने होशो हवास  ही खो देता है |  लेकिन अगले कुछ ही पलों में वह अपने आप को संभाल लेता है यह सोच कर कि  जब वह टूट जाएगा  तो  वहां पापा को हिम्मत कौन देगा | रोहित अपने आप को मजबूत करता है अपने जज्बातों पर काबू पा लेता है  पर  अपने मन में गहरा तेज दर्द से उमड़े सैलाब  के फल स्वरुप बहती अश्रु धारा को नहीं रोक पाता है | इसलिए, 'मैं अभी आ रहा हूं  इतना कहता है ' और फोन रख देता है

रोहित इंडिया के लिए इमरजेंसी टिकिट करवाता है और अपना रेजिग्नेशन लेटर टाइप कर एक लिफाफे में बंद कर देता है साथ ही रणवीर के लिए एक मैसेज भी लिख देता है |

रोहित जाने क लिए पैकिंग करता है तभी  उसे एक फाइल में  स्कूल टाइम के कुछ फोटो  दिखते हैं,   साथियों से सलोनी का दिया हुआ लेटर भी मिलता है जिसे देखकर वह फ्लैशबैक में चला जाता है

रोहित i love you 
हां यह सच है कि मैं भी तुमसे  बेइंतहा प्यार करती हूं,  पर मेरी कुछ मजबूरियां है | तुम यह तो जान ही चुके हो कि मेरे पिताजी अब इस दुनिया में नहीं है और मेरी मां मेरे पिताजी की  मौत का जिम्मेदार मेरे बड़े पापा को मानती है | मुझे मेरे बड़े मम्मी पापा ने कभी मां-बाप की कमी महसूस नहीं होने दी | मेरे घर का माहौल तो तुम जान चुके हो यदि इस बारे में घर पर पता चला तो मेरा सपना टूट जाएगा |  मेरी पढ़ाई रुक जाएगी और मैं कभी डॉक्टर नहीं बन पाऊंगी | 

इसलिए अच्छा होगा कि हम एक दूसरे को इन सब बातों से दूर कर अपनी पढ़ाई पर ही ध्यान दें | यदि नसीब में मिलना हुआ तो हम जरूर मिलेंगे |  मैंने तुमसे सच्चा प्यार किया है इसलिए हमें मिलना ही होगा बस कुछ समय हमें एक दूसरे को  भूलकर  अपनी अलग अलग राह पर चलना होगा पर मंजिल हमारी एक ही है यह मैं तुम्हें विश्वास दिलाती हूं | सच्चे प्यार की कहानी का कभी अंत नहीं होता जहां हमें लगता है कि  यह अंत है वह एक नई शुरुआत होती है |  मैं हमेशा तुम्हारा इंतजार करती रहूंगी तुम्हारी ओर  सिर्फ तुम्हारी सलोनी !!!

रोहित इंडिया पहुंचता है एयरपोर्ट  के बाहर रोहित के छोटे मामाजी ( रोहित से 5 शाल ही बड़े है ) गाड़ी लिए रोहित का इन्तजार कर रहे हैं | एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही जैसे ही रोहित की नजर जैसे मामाजी पर पड़ती है रोहित के कदम अपने आप ही तेज तेज पड़ने लगते है , वह जैसे ही मामाजी के पास पहुंचता है दोनों एक दूसरे को पहले तो देखते हैं फिर गले मिलते हैं |

रोहित सामान गाड़ी में रखता हैं और दोनों निकल पढ़ते हे अपने सफर के लिए |

यह सफर वैसे तो कुछ खास नहीं  था पर रोहित के लिए ये साफर यादो की किताब के कुछ पढ़े हुए पन्नों को फिर से पलटने जैसा था | रास्ते की हर डगर उसे रोमांच से भर रहा थी और अनगिनत यादों से जोड़ रही थी |


रोहित और उसके मामा जी दोनों गपशप लगाते हुए आगे बढ़ते हैं |  जैसे ही रोहित अपने स्कूल के सामने से गुजरता  है, उसे बिते समय की हर बात आंखो के सामने दिखाई देने लगती है |  रोहित मामा जी को गाड़ी रोकने के लिए कहता है | मामाजी जैसे ही गाड़ी को रोकते है , रोहित गाड़ी से उतरकर स्कूल के गेट की तरफ बढ़ता है |  गेट खोल कर अंदर स्कूल में जाता है | ग्राउंड में एक बड़े से कदम के पेड़ के नीचे लगी बेंच पर बैठ जाता है और एक गहरी लम्बी साँस अंदर लेता है | उसे अमन, रजनी और सलोनी  का अपने पास में ही होने का एहसास होता हैं |


रोहित को ऐसा लगता है जैसे कल की ही तो बात थी जब वो चारो इस बैंच पर बैठे थे और मस्ती मजाक चल रही थी | अमन रजनी का लंच बॉक्स लेकर उसे चिड़ा रहा है औऱ रजनी अमन से कह रही है ठीक है अब तू  केमिस्ट्री का असाइनमेंट कैसे करता है में भी देखती हु | रोहित टकटकी लगाए हुए सलोनी की तरफ देख रहा है और सलोनी भी बिच बिच में किताब को सामने से हटा कर चुपचाप से रोहित को देखती है 

रोहित को घंटी के बजने की आवाज कान में सुनाई  देती है और सारे बच्चे गेट से अंदर की तरफ चिल्लाते हुए भागते दिखाई देते है !!!!!!!!!!

*** रोहित.... रोहित....रोहित.... अब यही बैठे रहने का इरादा है क्या !! ......चलना नहीं है क्या.... रोहित के मामाजी गेट पर से आवाज देते है |

रोहित मामाजी के आवाज लगाने से फ्लैशबैक से बहार आता है | उसे देख के लगता है जैसे वह एक गहरी नींद से बहार आ रहा हो .............

"हाँ चलो चलते है, वैसे भी कुछ नहीं रखा है यादो पे  पड़ी धूल को हटाने में , जो यादे धुंधली हो चुकी है वो मिट ही जाये तो अच्छा है ", 

रोहित गाड़ी में आ कर बैठ् जाता है, गाड़ी में प्लेयर पर गाना चल रहा होता है

तेरी आँखों के दरिया का उतरना भी ज़रूरी था
मोहब्बत भी ज़रूरी थी बिछड़ना भी ज़रूरी था 
ज़रूरी था की हम दोनों तवाफ़े आरज़ू करते 
मगर फिर आरज़ूओं का बिखरना भी ज़रूरी था 
तेरी आँखों के दरिया का उतरना भी ज़रूरी था 

रोहित आवाज को कम करते हुए :: मामाजी कैसे गाने सुनते है आप भी !

मामाजी :: रोहित ये गाना मेरी नहीं पूरी दुनिया की पसंद से चल रहा है , क्यूंकि ये FM पर बज रहा है |

रोहित उसे बंद कर देता है | अब जैसे जैसे घर के करीब पहुँचने लगते है रोहित की धड़कने बढ़ने लगती है विचारो का बवंडर उसके मन को मन को विचलित कर रहा है मनो जैसे किसी शांत समंदर में तूफान आ गया हो और लहरे अपनी चरम सिमा को कर चुकी हो | वह  मन ही मन खुद से बाते करने लगता है ........" कितने समय बाद मां से मिलूंगा !!!! क्या कहूंगा उनसे मिलकर , पहले तो मैं मां से झगड़ा करूंगा कि वह अपना ध्यान क्यों नहीं रखती | नहीं नहीं ......झगड़ना नहीं है मां से उनकी तबीयत ठीक नहीं है , सब कुछ नॉर्मल ही रहने देना है | बस मां के पैर पढ़कर मां को गले लगा लेना है कुछ नहीं कहना है ,हाँ यही सही रहेगा ..........."

रोहित फिर एक बार अपनी आंखें खोलता है तो उसे आँखों के सामने अपना घर दिखाई देता है मामा जी गाड़ी का हॉर्न बजाते हैं और गेट के सामने गाड़ी को ले जा कर रोक देते हैं |

जैसी गाड़ी का हार्न सुनाई देता है परिवार के सभी लोग दौड़ कर बाहर आ जाते हैं |

रोहित के आने की खुशी में पूरा परिवार इखट्टा हो गया है और सभी लोग रोहित के आने का बड़ी बेशब्री से इंतजार कर रहे है 

रोहित की बुआ हाथो में पूजा की थाली लिए गेट पर खड़ी है, जैसे ही रोहित गेट पर पहुंचता है रोहित की बुआ रोहित के माथे पर तिलक लगाकर उसकी आरती उतारती है फिर रोहित को अंदर घर में प्रवेश करने के लिए कहती है |

रोहित को देखकर सब के चेहरे खुशी से फुले नहीं समा रहे है | रोहित बारी बारी से सबसे मिलता है | पिताजी से पैर छू कर आशीर्वाद लेता है

पिताजी उसे सीने से लगाकर नम आँखों से सदा खुश रहो का आशीर्वाद देते हुए कहते है : आज मेरे बेटे का वनवास पूरा हुआ मेरा राम वापस आया है |

रोहित की छोटी बुआ बहुत ही चंचल और मुंहफट भी है वो तुरंत जवाब देती है :: वनवास से नहीं अमेरिका से आ रहा है आपका राम  |  

जिसे सुनकर सभी जोरो से है देते है और सभी इसी प्रकार की मजाक मस्ती में लग जाते है | रोहित को भी घर का माहौल खुशनुमा देख कर बहुत अच्छा लगता है लेकिन उसकी आंखे माँ को देखने के लिए बेकरार हो रही थी वह  बार-बार यही सोच रह था की माँ कहा है | रोहित किचन की तरफ देखता है तो उसे माँ , बड़ी बुआ के साथ पुड़िया बनाते हुए नाजर आती है |

रोहित पीछे से जाकर मां को लिपट जाता है , माँ समझ जाती है ये रोहित ही है वह  गैस बंद करती है और फिर आंखें बंद कर लेती है

रोहित मां को कंधों से पकड़ कर  मां  को अपनी ओर घुमाता है |

रोहित मां की बंद आंखे देख कर कहता है :: ये क्या माँ ,आंखे बंद कर ली तुमने , देखा नहीं मुझे , में इतनी दूर सात समंदर पर करके सिर्फ तुमसे मिलने तो आया हूँ और तुम हो की मुझे देख भी नहीं रही , क्या हुआ कुछ तो बोलो माँ !

माँ अपनी सांसो को सामान्य कर लड़खड़ाती हुई आवाज में कहती है ::नहीं

रोहित :: पर कब तक

माँ :: अभी तो तेरी आवाज सुन के  ही मेरी धड़कने बेकाबू हो गयी है मेरा दिल कितनी जोरो से धड़क रहा है तुझे क्या बताऊ | आज तेरी आवाज मेरे कानो को ठीक वैसे ही लग रही है जैसे पहली बार तेरी रोने की आवाज लगी थी | अब पता नहीं तुझे देखूंगी तो क्या होगा कही मेरी धड़कने ही ना रुक जाये | 

रोहित :: क्या माँ तुम भी !!! क्या होगा .......कुछ नहीं होगा.......आंखें खोलो देखो मुझे , देखो तुम्हारा बेटा कितना बड़ा और हैंडसम दिखने लगा है |

माँ :: नहीं मैं नहीं आंखे खोलूंगी मुझे पता है में कोई सपना देख रही हु और जैसे ही अपनी आंखे खोलूंगी तू ओझल हो जायेगा 

रोहित :: नहीं माँ यह कोई सपना नहीं है , में सच में तुम्हारे सामने खड़ा हूँ | तुम आंखे खोलो और देखो जल्दी नहीं तो में जा रहा हूँ और रोहित किचन के स्टोर रूम जा कर छुप जाता है ये बोलते हुए में जा रहा हूँ |

रोहित की बुआ भी रोहित का साथ देती है और कहती है रोहित रुक जा मत जा, रुक जा

रोहित की मां को सब एहसास होता है की ये तो सच में रोहित ही था में कोई सपना नहीं देख रह थी वह आंखें खोलती है और रोहित की बुआ से पूछती क्या वह सच में चला गया |

बुआ :: हाँ , और नहीं तो क्या करता बेचारा ?

रोहित को रोकने के लिए माँ किचन से बहार जाने ह लगती है की रोहित अचानक से ही सामने आ जाता है 

रोहित :: माँ ,माँ ,माँ....................मेरी प्यारी माँ , अच्छी माँ , भोली माँ !!!!!!!!!! में यही हूँ , में तो कभी तुमसे दूर गया ही नहीं था न पहले न अब | 

फिर माँ रोहित के चेहरे और बालो में हाथ घूमते हुए उसे जी भर के देखती है | वह अपनी आंखों से बहने वाली आंसुओं को नहीं रोक पाती | रोहित की माँ को देख कर ऐसा लगता है जैसे अपनी दो आँखों में वो पूरा समंदर समाय बैठी हो |
हाँ शायद इन आंसुओं का भह जाना ही ठीक था , न जाने कितने गमो के बादल एक साथ बरस रहे थे | फिर रोहित मां के  पैर छूता है |

रोहित की माँ रोहित को अपने सीने से लगाते हुए कहती है  :: आग तो कलेजे में लगी है | वहाँ  पैरो में क्या रखा है आ मेरे सीने  से लग जा मेरे लाल .......................

रोहित भी हा माँ कह कर माँ से एक छोटे बच्चे की तरह लिपट जाता है |

थोड़ी देर ऐसे ही रुक कर रोहित फिर माँ से तबियत के बारे में पूछने लगता है |

रोहित :: ये सब कैसे हो गया माँ ! इतनी तबियत कैसे ख़राब कर ली तुमने , जरा भी अपना ध्यान नहीं रखती ना |

माँ ::  क्या हुआ है मुझे देख अच्छी भली तो तेरे सामने कड़ी हूँ |

रोहित :: फिर वो पापा का फ़ोन आया था वो !

अचानक से ही रोहित के मामाजी आ जाते है :: लगता है सारी बाते आज ही कर लेने का इरादा है कुछ बाद के लिए भी छोड़ दो , और क्या दीदी तुम भी , रोहित इतनी दूर , अमेरिका से आया है उसे फ्रेश होने दो जरा व कही भागा तो जा नहीं रहा है फिर बाते कर लेना |

माँ :: हाँ में तो भूल ही गयी सब ,रोहित तुम जल्दी से तैयार होकर आ जाओ और में भी खाने की तैयारी करती हूँ ,फीर सब एक साथ ही खाना |

रोहित :: ठीक है माँ |

कह के रोहित जाने लगता है तो रोहित के मामाजी उसे पीछे से आवाज देकर कहते है :: तूने रणवीर को तो फ़ोन करके बता दिया ना की तू इंडिया पहुँच गया है बेचारा खमखा तेरे लिए परेशान  हो रहा होगा |

रोहित पलट के देखता है तब तक रोहित के मामाजी वहा से जा चुके होते है | पर अब तक रोहित के मन में कई प्रश्न जन्म ले चुके थे | वह वाशरूम की तरफ बढ़ते हुए गहरी सोच में खो जाता और खुद से बाते करने लगता है - माँ को देख कर तो नहीं लग रहा की माँ की तबियत ख़राब हुई भी थी कभी और यदि माँ की तबियत खराब नहीं हुई थी तो क्या पापा न मुझसे झूट कहा था पर क्यू , मामाजी रणवीर को कैसे जानते है मेने तो उन्हें रणवीर के बारे में कभी कुछ भी नहीं बताया | फिर पूरा परिवार क्यू इक्कठा हुआ है ये सब मुझसे मिलने तो नहीं आये हुए लगते है जरूर बात कुछ और है।।