स्कूल वाला क्रश
स्कूल वाला क्रश-2
रोहित और अमन अपनी साइकिल से पालमपुर जाने के लिए निकल पड़ते हैं | कुछ समय पश्चात पक्की रोड कच्ची में बदल जाती है, और वह कच्ची रोड भी आगे चलकर खत्म हो जाती है| दोनों देखते हैं कि सामने एक नदी बह रही है | नदी ज्यादा बड़ी नहीं है लेकिन बारिश का समय होने के कारण थोड़ा तेज बहती प्रतीत हो रही है | वहीं नदी के किनारे पर रोहित को एक टूटी फूटी झोपड़ी नजर आती है |
रोहित झोपड़ी के बाहर से आवाज लगाता है,पर कोई बाहर नहीं आता | थोड़ी दूर पर उन्हें एक मछुआरा मछली पकड़ते हुए दिखाई देता है रोहित और अमन उसके पास जाकर कुछ जानकारी लेने की सोचते है |
रोहित:: काका यह पालमपुर गांव किस ओर है |
मछुआरा:: नदिया के उई पार, पर लागत है तुम इहा पहली बार आए हो |
रोहित:: क्यों !!
मछुआरा:: तुम लोग गलत रास्ते से आ गए हो, यहां से उस पार जाने का कोई रास्ता नहीं है |
दोनों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखने लगती है |
मछुआरा:: क्या काम है पालमपुर में, किससे मिलने आये हो
रोहित :: रिश्तेदार रहते हैं हमारे |
मछुआरा :: जाओ वापस लौट जाओ |
अमन थोड़ा गुस्से से:: कोई तो रास्ता होगा तुम भी तो पालमपुर जाते होंगे |
मछुआरा थोड़ा घमंड से :: ओ शहर के छोरो हम मछुआरे हैं ! हम पर गंगा मैया का आशीर्वाद है , हम कभी कोंनो नदिया में डूब नहीं सकत |
रोहित विनम्रता के साथ :: काका कोई तो रास्ता बताओ उस पार जाने का, हमारा जाना बहुत जरूरी है |
मछुआरा उन दोनों को नदी के किनारे किनारे कुछ दूर ले जाता है |थोड़ी दूर चलने के बाद रुक जाता है | मछुआरा यहां पानी कम गहरा है | हम लोग यहीं से गांव जाते हैं बोलो है हिम्मत जाओगे उस पार | छोड़ो बाबूजी !! मैं पार करवा दूंगा लेकिन उसकी कीमत चुकानी होगी |
रोहित :: कैसी कीमत !!
मछुआरा :: ₹1000 लूंगा उस पार ले जाने |
रोहित और अमन दोनों एक-दूसरे का मुंह देखते हैं |
अमन :: ठीक है मिल जाएंगे लेकिन पैसे हम वापस आने के बाद ही देंगे |
मछुआरा :: मान जाता है |
वह दोनों को हाथ पकड़ कर नदी में पार उतर जाता है | पानी पहले तो घुटनों तक रहता है फिर कमर तक आ जाता है | दोनों के लिए इस प्रकार नदी पार करना जीवन का पहला अनुभव है | उनके चेहरों पर चिंता और डर छाने
लगता है लेकिन अमन और रोहित एक दूसरे को देख कर मुस्कुराते है, और साहसी होने का दिखावा करते हैं | जैसे ही वो किनारे पर पहुंचते हैं चैन की सांस लेते हैं |
अमन बोल ही पड़ता है :: हाय रे इश्क तू ने कितनों को डुबाया !!
कितनों को पार लगाया |
एक बार सही सलामत घर पहुंचे, तो इसका स्वाद हम भी चख कर देखेंगे |
रोहित:: तो चख ले मेने कब रोका है, मीना तो तुझ पर जान छिडकती है |
रोहित बोलकर अमन से बचने के लीये भागता है | अमन रेत से छोटा सा पत्थर उठाकर रोहित की तरफ भागते हुए जोर से चिल्लाता है रुक तु रुक |
दोनों सब कुछ भूल कर किनारे पर मस्ती करने लगते हैं यही तो होता है सच्ची दोस्ती का मजा |
दोनों के कपड़े गीले हो जाते हैं वह सुखाने के लिए उन्हें निकाल कर झटकते हैं और झाड़ियों पर डाल देते हैं | अब दोनों के मन में एक ही ख्याल आता है और दोनों नदी में कूद पड़ते हैं | थोड़ी देर पानी में मस्ती करने के बाद सूखने के लीये किनारे पर बैठते हैं |
वही मछुआरा दो पांव पर उकड़ू बैठा हाथ में खैनी घीसते हुए पूछता है :: बाबूजी इ तो बताओ आपको पालमपुर में जाना किसके यहां हैं
रोहित सोच मैं पड़ जाता है |
अमन:: दामोदर चौधरी जी के यहां जाना है |
मछुआरा :: आप दामू भैया के रिश्तेदार हो |
अमन थोड़ा सोचते हुए :: हाँ
यह सुनते ही मछुआरे के हाथ पांव इतनी तेज कांपने लगते हैं कि उसके हाथ से खेनी नीचे गिर जाती है |
वह रोहित और अमन के पैरों पर नाक रगड़ने लगता है, और उनसे अपने किए के लिए माफी मांगता है |
बार-बार एक ही बात कहता है हमको माफ कर दो हमें नहीं पता था कि आप दामू भैया के रिश्तेदार हैं हमें माफ कर दो |
उधर रोहित अमन से पूछता है :: तुझे कैसे पता सलोनी के पापा गांव के चौधरी हैं |
अमन :: तू तो सलोनी को देख कर पता नहीं किन ख्यालों में खो जाता था | उसने एक बार बताया था कि उसके पिताजी गांव के बहुत बड़े चौधरी है |
अमन और रोहित मछुआरे से:: छोड़ो छोड़ो माफ किया |
मछुआरा :: आप ने मुझे सच में माफ कर दिया ना | आप दामू भैया से मेरे बारे में कुछ नहीं कहोगे हां मुझे आपसे पैसे भी नहीं चाहिए यदि उन्हें पता चला कि मैंने उनके रिश्तेदारों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया तों मुझे जान से मार देंगे |
रोहित सब कुछ समझ रहा था वह मछुआरे की बातों से समझ गया कि ये दामोदर चौधरी कोई पहुंची हुई चीज है |
रोहित :: ठीक है पर दामू भैया से तुम इतना क्यों डर रहे हो |
मछुआरा :: दामू भैया तो भगवान हैं हमारे |रोहित :: भगवान है तो भगवान से इतना डरते क्यों हो |
मछुआरा:: दामू भैया अच्छे लोगों के लिए जितने अच्छे हैं, बुरे लोगो के लिए उतने ही बुरे भी है | पालमपुर ही नहीं आसपास के 4 गांवो में दबदबा है उनका | नाम और शोहरत है तो दुश्मन भी उतने ही है | उन्हीं की कृपा से मैं यहां जीवित हूं वरना भैरव सिंह के अत्याचारों से कौन बच पाया है |
अमन बीच में ही बोल पड़ता है अब यह भैरो कौन है ?!!
मछुआरा :: भैरो सिंह पड़ोस ही के गांव में रहता है | वह और उसका पूरा परिवार दामू भैया की दौलत और शोहरत से इतना जलता है कि आए दिन उनको किसी ना किसी प्रकार से नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता रहता है | इसलिए उनके घर में कड़ी सुरक्षा के बंदोबस्त है | कई पहलवान हवेली और उनकी रक्षा में लगे रहते हैं | गांव के बिच में बड़ी सी हवेली है उनकी |
अमन कपडे पहनते हुए रोहित से:: तुझे इतने बड़े स्कूल में और कोई ना मिली | सोच ले भाई अभी भी मौका है चले वापस |
रोहित :: अब यहां तक आ गए हैं तो मिले बिना वापस तो नहीं जाएंगे, जो होगा देखा जाएगा |
रोहित कहता है ::
"लेकर जान हथेली पर इश्कबाज चलते हैं
जब वह बांध के कफन माथे पर घर से निकलते हैं"
और गांव की तरफ चल देता है,अमन भी उसके पीछे चल देता है | रोहित और अमन गांव में प्रवेश करते हैं कच्चा
रास्ता कीचड़ से भरा हुआ है गांव की शुरुआत झोपड़ीयो से होती है, मगर थोड़ा गांव में अंदर जाने पर कुछ अच्छे और बड़े घर दिखाई देते हैं | घरों के बाहर जानवर बंधे हुए हैं गाय और भैंसों की चिल्लाने की आवाज सुनाई देती है | कुछ आगे चलने पर एक चौपाल आती है, जहाँ कुछ बुजुर्ग व्यक्ति बैठकर गप्पे मार रहे हैं और हुक्का गुड़गुडा रहे है | छोटे-छोटे बच्चे वही पास में गिल्ली डंडा खेल रहे हैं | रोहित बातों में बड़ा कुशल है वह जानता है कि किस से कैसी बात करनी है
रोहित हाथ जोड़कर :: राम-राम बा
सभी बुजुर्ग एक साथ बोलते हैं :: राम राम
एक बुजुर्ग बोलता है:: नये जान पढ़ते हो!! पहले कभी देखा नहीं यहाँ,किसके मेहमान हो |
रोहित :: जी दामोदर चौधरी जी के यहां आए हैं |
चौधरी जी का नाम सुनते ही एक बच्चे को बुलाते हैं और उन्हें घर तक छोड़कर आने के लिए कहते हैं
रोहित और अमन उनको धन्यवाद बोल कर बच्चे के साथ चल देते हैं |
बच्चे का मन तो नहीं रहता है कि वह खेल छोड़ें लेकिन गांव में बच्चे बुजुर्गों की बात जरूर मानते हैं वह बच्चा दूर से ही इशारे से बता कर भाग जाता है
रोहित और अमन गेट पर पहुंचते हैं और वहां से हवेली देख कर
दोनों उस गेट से अंदर प्रवेश करते हैं कि 2 हट्टे कट्टे रक्षक दौड़ कर उनके पास आते हैं |
उनमें से एक:: रुको रुको अंदर कहां आ रहे हो, क्या काम है किससे मिलना है
रोहित थोड़ा तेज आवाज में:: दामू भैया से मिलने आए |
उनमें से एक रक्षक:: क्या काम है बोलो भैया की मर्जी होगी तो ही मिल पाओगे |
रोहित:: जो काम है उन्हीं को बताएंगे
इसी बातचीत के बीच में एक बहुत ही भारी आवाज सुनाई देती है :: कौन है किस बात का शोर हो रहा है !!
वह हाथ हिला कर आने का इशारा करते हैं |
रोहित और अमन दोनों उनकी तरफ आगे बढ़ते हैं और वह दोनों रक्षक भी उनके पीछे पीछे चल देते हैं |
सामने दामू भैया सफेद धोती और कुर्ता पहने गले में गमछा माथे पर चंदन की बिंदी हाथ बांधे हुए खड़े हैं | किसी भी प्रकार की चिंता से कोसों दूर चेहरे पर हल्की सी मुस्कान उनकी शोभा बढ़ा रही है | उम्र करीब 50 - 55 वर्ष होगी |
चौधरी जी अपनी आराम कुर्सी पर पैर पर पैर रखकर बैठते हैं और उन दोनों को भी बैठने के लिए कहते हैं फिर अपने एक रक्षक को बुलाते हैं
रक्षक :: जी दामू भैया
दामू भैया :: यह मेहमान है हमारे, अंदर किसी सेवादार से कहो इन्हें पानी पिलाए | और इनकी आवभगत का इंतजाम करो
गांव में लोगो में आज भी अतिथि देवो भव का भाव होता है
सेवादार पानी लाता है और दे कर चला जाता है
दामू भैया :: अब बोलो क्या काम है कैसे हमारे गांव आना हुआ | कहां से आए हो |
रोहित पानी का गिलास हाथ में लिए :: जी हम शहर से आए हैं | हम दोनों सलोनी की स्कूल में ही पढ़ते हैं | वह आज स्कूल नहीं आई |
दामू भैया :: हाँ उसकी आज तबियत ठीक नहीं है |
रोहित :: क्या हम सलोनी से मिल सकते हैं |
दामू भैया गुस्से में तेज आवाज से :: हमारे घर की औरतें गैर मर्दों से यूं ही ना मिला करती है | कुछ काम हो तो बोलो वरना चलते बनो |
रामू भैया को गुस्से में देख तो काल भी वापस लोट जाये यह तो फिर भी दो नादान बच्चे है | डर से उनके हाथ पैर कांपने लगते हैं | रोहित कुछ सोच नहीं पाता लेकिन ऐसी स्थिति में अमन का दिमाग बहुत तेज चलता है वो यह अनुमान लगा लेता है की दामू भैया और यह सब लोग कुछ ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं है | उसके दिमाग में एक योजना तेजी से क्रियान्वित होती है |
अमन बैग से नोटिस निकालता है और कहता है :: इस पेपर पर सलोनी के हस्ताक्षर चाहिए नहीं तो वह अगले साल 12वीं की परीक्षा नहीं दे पायेगी | हमें स्कूल वालों ने इसी काम के लिए भेजा है |
नोटिस पर हिंदी में सिर्फ स्कूल का नाम लिखा है बाकी पूरा मैटर इंग्लिश में लिखा है |
यह बात सुनते ही दामू भैया का गुस्सा पानी की तरह बह जाता है | दरअसल घर में सिर्फ दामू भैया चाहते हैं कि सलोनी पढ़ें | दामू भैया सलोनी की पढ़ाई को लेकर हमेशा चिंतित रहते है |वह भी यही चाहते हैं सलोनी पढ़ लिख कर इस माहौल से दूर अपना नाम कमाएं |
रोहित अमन से कान में फुसफुसाते हुए :: इस पर सलोनी के साइन करवाएगा | तेरा बाप तुझे मार डालेगा |
अमन :: पहले सलोनी से मिलकर यहां से सही सलामत निकलने की सोच मेरे बाप से फिर निपट लेंगे |
दामू भैया के कहने पर रक्षक उन दोनों को उनकी पत्नी शारदा जी से मिलवाता है | वह शारदा जी को उनके आने का पूरा कारण बता कर चला जाता है |
शारदा जी बहुत ही नरम और मीठे स्वभाव की महिला है, उनकी अपनी कोई औलाद नहीं है, शायद इसलिए भी उन्होंने अपनी पूरी ममता सलोनी पर लुटा दी है |
शारदा जी दोनों को सलोनी के रूम में ले जाती है जहां वह एक पलंग पर सो रही होती है | कमरे की हल्की रोशनी मैं सलोनी के चेहरे की चमक और उस चेहरे पर मासूम सी मुस्कान देखकर रोहित तो पता नहीं किन ख्यालों में डूब जाता है |
वह मन ही मन सोचने लगता है :: इस चेहरे पर तो में सो बार मरने से भी न पीछे हटू यह तो पहली बार है |
शारदा जी सलोनी को जगाती है | सलोनी जैसे ही आंखें खोलती है रोहीत और अमन को देख कर चौक जाती है !!!! रोहित और अमन को अपने घर में अपने कमरे में देखना उसके लिए अस्वाभाविक था | इसलिए वह अचरज में पड़ जाती है | उसके लिए यह समझ पाना मुश्किल हो जाता है कि वह सपना देख रही है या हकीकत है | वह एक बार फिर आंखें मसल कर उन्हें वहां खड़ा देखती है तब उसे एहसास होता है सच में अमन और रोहित सामने खड़े हैं
शारदा जी सलोनी को हाथ लगा कर देखती है कि उसे अब बुखार है या नहीं | पर सलोनी का शरीर ठंडा पा कर थोड़ी राहत
की सांस लेती है
शारदा जी सलोनी के सिर पर हाथ रखते हुए कहती है :: बोल मेरी लाडो क्या खाएगी कल रात से तूने कुछ नहीं खाया है |
रोहित को दामू भैया की बात पर विश्वास हो जाता है कि सच में सलोनी की तबीयत खराब है इसी कारण आज स्कूल नहीं आई | पर वह सोचता है कि सलोनी की अचानक तबियत क्यों खराब हुई |
रोहित जानने के लिए पूछता है :: अचानक ही तबीयत कैसे खराब हो गई कल तो स्कूल में बिल्कुल ठीक थी |
सलोनी:: कुछ नहीं ऐसे ही थोड़ा बुखार है मां तो यूँ ही चिंता करती रहती है |
शारदा जी :: तुम दोनों से क्या छुपाना तुम तो सलोनी के दोस्त हो | कल जब सलोनी स्कूल से इसके भैया के साथ आ रही थी तभी भैरो के आदमियों ने इन पर हमला कर दिया था बड़ी मुश्किल से इसके भैया ने भैरों के आदमियों को चकमा देकर सलोनी को बचाकर कर घर ले आए उसी घबराहट में सलोनी की तबीयत खराब हुई ओर तेज बुखार आ गया |
तुम लोग बैठो, बातें करो मैं तुम लोगों के लिए चाय नाश्ता का इंतजाम करवाती हूं ओर शारदा जी वहां से चली जाती है
सलोनी घबराते हुए:: तुम दोनों यहां क्यों आए हो |
रोहित:: तुम स्कूल नहीं आई तो मुझे चिंता हो रही थी की कल तुम्हारे भैया ने हमें साथ में देखा था तो कोई बात तो नहीं हुई |
सलोनी:: नहीं ऐसी कोई बात नहीं है |
रोहित :: सच में कोई बात नहीं है |
सलोनी :: हाँ, पर तुम दोनों यहां कैसे अाये, वह भी स्कूल ड्रेस में स्कूल से भाग कर आए हो क्या इतनी दूर तुम दोनों को आने में डर नहीं लगा !!
सलोनी सवालों का पहाड़ खड़ा कर देती है |
रोहित उसे पूरा वृतांत शुरू से आखरी तक सुनाता है |
सलोनी रोहित के चेहरे पर साफ देख पा रही थी कि वह सलोनी से कितना प्रेम करता है | और कुछ पलों के लिए तो सलोनी भी उसके प्रेम में खो जाती है |
थोड़ी ही देर में शारदा जी अा जाती है और हस्ताक्षर का पूछती है |
अमन बैग से पेपर निकालते हुए बोलता है बातों, बातों में साइन करवाना तो भूल ही गया | लो सलोनी इस पर साइन कर दो |
वह पेपर साइन करने के लिए सलोनी को देता है
सलोनी पेपर पढ़ती है और अमन की तरफ देखती है |
अमन जिसे आंखों से ही रिक्वेस्ट कर रहा था कि सलोनी कुछ ना बोले और पेपर पर साइन कर दें
सलोनी ज्यादा तो नहीं कुछ समझ पाती और उसे कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर लगती है |
वह पेरेंट्स सिग्नेचर के लिए बनी डॉटेड लाइन पर अपने हस्ताक्षर करती है और अमन को दे देती है |
शारदा जी :: चलो नीचे तुम दोनों कुछ खा लो
रोहित जाने से पहले सलोनी को एक बार जी भर के देख लेना चाहता है | वह उसकी चेहरे की मुस्कान और इस दो पल की मुलाकात को अपनी यादो में बसाकर कमरे से बाहर चल देता है |
नीचे दामू भैया उनका इंतजार कर रहे होते हैं |
दोनों को देखकर दामू भैया कहते हैं :: हो गए हस्ताक्षर अब तो सलोनी 12वीं की परीक्षा दे पाएगी ना आओ बैठो नाश्ता करो फिर जाना |
रोहित:: जी अंकल बिल्कुल !
दोनों बिना कुछ बोले बेठ कर नाश्ता करने लगते हैं |
रोहित की नजर दीवार पर लगी एक बड़ी सी तस्वीर पर जाती है तस्वीर इतनी मोहक है कि रोहित से रहा नहीं जाता वह पूछ ही लेता है
रोहित :: अंकल आपको ऐतराज ना हो तो एक बात पूछूं
दामू भैया:: पूछो
रोहित:: यह तस्वीर किसकी है कौन है ये आपके
दामू भैया:: ये तस्वीर मेरे सबसे छोटे भाई शिवा की है जो अब इस दुनिया में नहीं है | दरअसल सलोनी मेरी नहीं शिवा की बेटी है | 3 महीने की थी तबसे मैं और मेरी पत्नी उसे अपनी बेटी की तरह पाल रहे हैं | सलोनी की माँ शिवा की मोत का जिम्मेदार मुझे ठहरती है और सब कुछ छोड़ कर अपने पिता जी के यहाँ चली जाती है | यह बात सलोनी जानती है अब वह मुझे और मेरी पत्नी को अपने मम्मी पापा मानती है |
कुछ देर पश्चात दोनों जाने के लिए दामू भैया से आज्ञा लेते हैं
दामू भैया एक रक्षक को बुलाकर उन दोनों को गांव से बाहर तक सही सलामत छोड़कर आने का आदेश देते है |
दोनों गेट तक पहुंचते ही हैं कि पीछे से आवाज देते हुए सलोनी दौड़ कर आती है | रोहित के मन की तो मुराद पूरी हो जाती है वह पलट कर सलोनी को देखता है उसे लगता है जैसे सलोनी कुछ कहना चाहती हो |
सलोनी के हाथ में एक कॉपी है जो वह रोहित के हाथ में देकर उसे रजनी कों देने के लिए कहती है |
दोनों एक दूसरे की आंखों में देखते हुए, मन ना होते हुए भी विदा लेते हैं |
कुछ दूर चलने पर वह गांव से बाहर आ जाते हैं जहां से एक सीधी सड़क जा रही है इस सड़क की ओर इशारा करते हुए रक्षक जाने को कहता है |
रोहित उन्हें धन्यवाद देता है और दोनो साइकिल पर सवार होकर तेजी से शहर की ओर चल देते हैं |
रोहित को बार-बार सलोनी का दौड़कर गेट पर मिलने आना याद आ रहा | बार बार उसकी आँखों के सामने वही नजारा आ रहा है | रोहित बहुत खुश है उसे लग रहा है कि सलोनी भी उसे प्यार करती है | वह मन ही मन प्यार भरे गीत गुनगुना रहा है
शाम हो रही है दोनों शहर में प्रवेश करते हैं और उस चौराहे पर पहुंचते हैं जहां से दोनों के रास्ते अलग अलग हो जाते हैं | रोहित तो अभी भी सलोनी के ख्यालों में डूबा है अमन को घर की चिंता
सताने लगती है | रजनी का घर अमन के घर के नजदीक ही है इसलिए वह बैग से सलोनी की दी हुई कॉपी बैग से निकालता है | और अमन को देने के लिए हाथ बढ़ाता है | कि अचानक उसकी नजर कॉपी पर लिखे नाम पर पड़ती है | वह कॉपी पर सलोनी लिखा हुआ देख अचरज में पड़ जाता है | वह सोचता है यह कॉपी तो सलोनी की है फिर उसने रजनी को क्यों देने के लिए दी है | रोहित कॉपी को खोल कर देखता है तो उसके अंदर उसे एक खत बंद लिफाफे में मिलता है
अमन के मुंह से निकल जाता है:: वाह भाई तेरी तो लॉटरी लग गई लव लेटर !
रोहित से भी इंतजार नहीं होता वह फटाफट लिफाफा फाड़ देता है उसी लिफाफे में खत मिलता है वह राइटिंग से समझ जाता है कि यह सलोनी नहीं लिखा है |
अमन:: क्या लिखा है जोर से पढ़ना
रोहित:: रुक पढ़ने तो दिया
अमन खत को खींचने की कोशिश करता है |
रोहित खत को बचाते हुए अच्छा जोर से पढ़ता हूं |
रोहित कुछ लाइनें जोर से पढ़ने के बाद मन ही मन पूरा खत पड़ता है
अमन बीच-बीच में चिल्लाता रहता है क्या हुआ जोर से पढ़ना
खत पढ़ने के बाद रोहित उसे जेब में रख लेता है और अमन से बाद में मिलने का वादा करके चला जाता है
अमन जानने की बहुत कोशिश करता है रोहित उसे कुछ नहीं बताता
रोहित मायुस चेहरे से सोच की अनंत गहराई में डूबा हुआ घर पहुंचता है |
घर पर रोहित के मम्मी पापा रोहित का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं |
रोहित उनके चेहरे देखकर समझ जाता है की उन्हें सब कुछ पता है |
रोहित गेट पर ही पहुंचता है की मां उसे आकर डांटने लगती है
"हम अभी स्कूल से ही आ रहे हैं कहा था दिन भर से" |
रोहित के पापा उसकी मम्मी को चुप कराते हुए :: उसे घर में अंदर तो आ जाने दीजिए |
रोहित की मम्मी :: आज आप चुप ही रहना आपके लाड प्यार का नतीजा है जो आज प्रिंसिपल कि इतनी बातें सुनना पड़ी | वो तो शुक्र मनाओ इसके मामा का नहीं तो हाथ में टीसी होती |
रोहित घर में अंदर आता है और बिना डरे मम्मी पापा को पूरी पूरी बात सच सच बता देता है | वह सलोनी का दिया हुआ खत मां के हाथ में देकर अपने कमरे में चला जाता है | रोहित के मम्मी और पापा उस खत को पढ़कर स्तब्ध हो जाते हैं |
कुछ समय पश्चात रोहित कमरे से वापस आता है |
रोहित की मां उठकर रोहित को गले लगाती है और उसे प्यार से सोफे पर बिठाती है |
रोहित अपनी आंखों की नमी दूर करते हुए कहता है :: मुझे कोटा जाना है मामा जी के यहां | मैं वहीं रह कर iit-jee की तैयारी करूंगा |
रोहित के मम्मी पापा तो पहले से ही यह चाहते थे पर रोहित नहीं जाना चाहता था | अब जबकि रोहित खुद जाना चाहता है
तो दोनों ही बहुत खुश है |
रोहित के पापा मैं अभी तेरे मामा जी से बात कर लेता हूं वहां वह तेरा किसी अच्छे कोचिंग इंस्टीट्यूट मैं एडमिशन करवा देंगे उनकी वहां बहुत पहचान है कल संडे है हम कल ही चलते हैं
रोहित हां मैं सर हिला देता है
रोहित अगले दिन बिना किसी को बताए हमेशा हमेशा के लिए कोटा चला जाता है और फिर कभी वह लोट कर वापस नहीं आता |
