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जिन्दगी एक डायरी

प्रेगनेंट

शादी को कुछ ही महीने हुए थे कि अचानक एक दिन कोमल की तबियत रात को ख़राब हो गयी। सुबह जब डॉक्टर के पास गएं तो पता चला कोमल प्रेगनेंट है।

समीर खुश था आखिर उसका परिवार पूरा होने जा रहा था, पर कोमल दुखी नज़र आ रही थी, उसे अपना करियर अपनी ज़िन्दगी सब खत्म होते हुए दिखाई दे रहा था। अक्सर वह ऑफिस में देखती थी कि लड़कियां बच्चे के बाद या तो नौकरी छोड़ देती है या फिर अपने काम को अपना पूरा ध्यान और वक़्त नहीं दे पाती है, अब शायद वह भी उसी भीड़ का एक हिस्सा बनने जा रही थी।

खाने की मेज़ पर जब समीर ने कोमल का उतरा हुआ चेहरा देखा तो उसे लगा कि शायद उसकी तबियत ख़राब होगी, लेकिन जब वहीं उदास चेहरा उसने अगले सुबह, रविवार को देखा तो वह समझ गया कि कुछ गड़बड़ है, गार्डन में हर रविवार की तरह टहलते  हुए उसने कोमल से पूछ ही लिया कि क्या बात है।

 कोमल ने भीगी आंखों से समीर को देखा और उसकी रुलाई फूट गयी, नम आंखों से समीर की ओर मासूमियत से देखते हुए कोमल ने कहा "समीर मैंने भी अपने करियर के लिए उतनी ही मेहनत की है जितनी तुमने पर अब मुझे मेरी मेहनत पानी  में जाती दिखाई दे रही है, शायद मैं इस बच्चे के लिए तैयार नहीं हूं"

समीर चुप था! उसे लगा जैसे उसका सपना टूट रहा है खुद को संभालते हुए उसने कहा "कोमल यह बच्चा हम दोनों का है तुम्हें भी इस बारे में फैसला लेने का उतना ही हक़ है जितना कि मुझे" 

इसके बाद कई बार समीर ने कोशिश की कोमल को समझाने की, उसे विश्वास दिलाने की, कि सब मैनेज हो जायेगा लेकिन कोमल फैसला ले चुकी थी, दोनों ने अपने परिवार से इस बारे में बात नहीं की, समीर हर हाल में कोमल का साथ देना चाहता था।

दोनों शहर के सबसे अच्छे अस्पताल में पहुंच चुके थे डॉक्टर व्यस्त थी इसलिए वह अपनी बारी का इंतज़ार करने लगे, पास के कमरे में बच्चो का डॉक्टर था 

तभी कोमल को एक जाना पहचाना चेहरा दिखाई दिया सामने वाली कुर्सी पर उसकी बॉस आनंदी बैठी थी। साथ में एक औरत थी जिसके हाथ में एक बच्चा था और दूसरी ओर एक आदमी था गोद में बच्चा उठाये ,जो शायद उसका पति था, वह औरत शायद बच्चों की नैनी थी कोमल चौंक गयी, इतनी डायनामिक इतने ऊंचे पद पर कार्यरत आनंदी एक मां है, पर वह तो हर समय खुश रहती थी, अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित थी।हालांकि ज़्यादा समय नहीं हुआ था उसे ऑफिस में, पर वह आनंदी से प्रभावित थी।

लिहाज के कारण वह आनंदी की तरफ मिलने चली ही थी कि उसका नंबर आ गया, डॉक्टर के केबिन में ही एक ओर परदे के पीछे नर्स ने उसका हाइट, वेट ओर ब्लड प्रेशर चेक किया, समीर पीछे कुर्सी पर बैठा था इतने में ही आनंदी केबिन में आयी, शायद वह बच्चों को दिखाकर आ गयी थी।

उसने डॉक्टर से मिलते हुए कहा " गुड मॉर्निगं डॉक्टर, देखिये दोनों बच्चे आपसे मिलने आये हैं" डॉक्टर ने उठकर बच्चों को प्यार करते हुए कहा  की अब बच्चे पहले से बेहतर लग रहे हैं ओर स्वस्थ भी प्रीमैच्योर जन्म के बावजूद उन्होंने सही ग्रोथ ली है।

आनंदी को नहीं पता था की कोमल परदे के पीछे नर्स के पास है, आनंदी ने डॉक्टर से कहा "डॉक्टर ये सब आपके ही कारण हुआ है, मैंने तो इस ज़िम्मेदारी के डर से अबोर्शन करवाने का फैसला कर लिया था, अगर आपने नहीं समझाया होता तो शायद आज मैं इस सुख से वंचित रहती। आज मैं ओर मेरे पति मिलकर अपनी ज़िम्मेदारियों को बांट रहे है। शायद वह मेरे जीवन का सबसे गलत निर्णय होता, मुझे सही दिशा दिखाने के लिए धन्यवाद"

डॉक्टर ने मुस्कुराते हुए कहा "तुम ही नहीं आनंदी आज के दौर में हर मां दोहरी ज़िन्दगी जी रही है ऑफिस और घर संभालकर यह एक कॉमन थॉट है लेकिन हर चीज़ का एक वक़्त होता है, सही वक़्त पर सही चीज़ होनी चाहिए, पति पत्नी मिलकर सब मैनेज कर सकते है"।

इधर आनंदी गयी ओर उधर कोमल का नंबर आ गया, जैसे ही डॉक्टर ने उसे सवालियां नज़र से देखा उसने तपाक से कहा "डॉक्टर, मैं प्रेग्नेंट हूं आगे आपसे परामर्श करना चाहती हूं आगे बताइये क्या करना है"।
चोर नज़रों से उसने पीछे साथ बैठे समीर की तरफ देखा समीर सब समझ चुका था उसे ख़ुशी थी कोमल के इस फैसले पर।

कार में बैठते ही समीर ने जैसे ही गियर पर हाथ रखा, कोमल ने उसके हाथ पर हाथ रख दिया,दोनों एक दुसरे को देखकर मुस्कुराने लगे बिना कहे सारी बातें साफ़ हो गयी थी, परिवार को पूरा करने, आने वाले सदस्य के आने की तैयारी करने, दोनों खुशी खुशी अपने घर की और चल पड़े।