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जिन्दगी एक डायरी

नौ महीने

कोमल और समीर ने जब ये खुश खबरी घर वालों को बताई तो सब बहुत खुश हुएं और उसके बाद जो दौर चालू हुआ डॉक्टर को दिखाना, दवाई लेना, बैठ के पानी पीना, उल्टे मूंह मत सोना। कोमल तो कोमल समीर को भी बहुत सारी हिदायते मिल रही थी। ये सब देखकर कोमल बहुत खुशी थी कि सब लोग उसका कितना ख्याल रख रहे है इस खबर के तीन चार दिन बाद ही परिवार वाले भी आ गएं।

ढ़ेर सारा सामान वो बेबी के लिए लेकर आये थे उनकी खुशियां उनके चेहरों पर साफ़ दिखाई दे रही थी सभी लोग बहुत खुश थे। जिसे देख कोमल बहुत ही अच्छा महसूस कर रही थी वे लोग दो दिन तक रहें और फिर वापस घर चलें गएं।

अब तो समीर भी कोमल का बहुत ख्याल रखने लगे था समय पर डॉक्टर के पास ले जाना, कोमल के खाने-पीने का ध्यान रखना, उसे जूस बनाकर पिलाना, शाम को वॉक पर ले जाना, सब कुछ कर रहा था।

ऐसे ही4 महीने बीत गएं फिरएक दिन कोमल को पेट में हलचल महसूस हुई जिससे वो घबरा गई यह क्या हो गया। बेबी को कुछ हो तो नहीं गया। उसने तुरंत डॉक्टर को फोन लगाया और उन्हें बताया कि उसके पेट में कुछ हलचल हो रही है तो डॉक्टर हंसने लगी और बोली कुछ प्रॉब्लम नहीं है बेबी मूवमेंट कर रहा है। डॉक्टर की बात सुनकर मानों कोमल की जान में जान आ गई हों। उसकी तो जैसे रुलाई ही निकल आयी। कोमल ने फोन रखा और अपने पेट पर हाथ रख महसूस करने की कोशिश करने लगी।

अब तो उसे बस ऑफिस से समीर के आने का इंतजार था जैसे ही समीर शाम को घर आया उसे यह बात बताई जोकि दोनों के लिए एक नया एहसास था। कोमल ने ये बात जब अपनी मां को बताई तो वो उसके पागलपन पर हंस रही थी।

धीरे धीरे 5 महीने गुजर गए और छठा महीना चालू हो गया पेट बाहर निकल गया था। उठने बैठने में परेशानी हो रही थी, ढंग से सो भी नही पा रही थी, थोड़ी चिड़चिड़ी भी हो गई थी। मगर समीर को पता नहीं क्या हो गया था वह कभी भी गुस्सा नही करता था। हर बात को इतनी आसानी मान जाता और बहुत ही शांत रहने लगा था । कोमल की हर ख्वाहिश पूरी करने लगा था।

जैसे ही सातवां महीना शुरू हुआ। कोमल का पेट और बड़ा हो गया था। फिर एक दिन कोमल और समीर चेकअप के लिए डॉक्टर के पास गये उन्होंने कुछ टेस्ट करवाये डॉक्टर ने दूसरे दिन आने को कहा दूसरे दिन डॉक्टर ने बताया हिमोग्लोबिन कम है और बच्चे की ग्रोथ भी कम है।

मगर घबराने की बात नहीं है। थोड़ा आराम करो सफर मत करना। कुछ दिनों बाद कोमल की गोद भराई हुई जोकि उसके लिए बहुत ही खुशनुमा अहसास था सब उसकी गोद भरते है और आशीर्वाद देते है।

नौवां महीना चालू हो गया। अब कोमल बड़ी मुश्किल से चल पा रही थी। बस थोड़ी ही वॉक हुआ करती थी और पूरे टाइम आराम करती थी। कोमल की सास उसे अच्छी-अच्छी बातें बताती रहती। वह कोई भी नकारात्मक बात कोमल के सामने नहीं कहती।

आखिर वह दिन आ ही गया जब कोमल को बेबी होने वाला था और उसे बहुत दर्द होने लगा। जब ये बात कोमल ने अपनी सास को कहा तो उन्होंने कहा यह तो शुरुआत होती है। पहली बार में दो-तीन दिन दर्द होता है जिसे सुनकर कोमल कांप उठीं क्योंकि वो दर्द बहुत ज्यादा था। उन्होंने कोमल से कहा थोड़ा चल फिर लो आराम मिलेगा। मगर कुछ नहीं हुआ धीरे धीरे दर्द बढ़ने लगा तो कोमल की सास ने समीर को फोन किया और हॉस्पिटल आ गए।

डॉक्टर ने बताया कि बेबी आने वाला है पर अभी थोड़ा समय लगेगा कोमल ने पूछा कितना समय और लगेगा क्योंकि उसे अब असहनीय दर्द हो रहा था कुछ ही पलों के इंतजार के बाद रोने की आवाज आई जैसे ही कोमल ने आवाज सुनी उसका सारा दर्द गायब हो गया डॉक्टर ने भी कोमल को बधाई दी और केबिन में चली गई। कोमल और उसका पूरा परिवार खुश था एक नन्ही सी गुड़िया पाकर।