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जिन्दगी एक डायरी

कोमल की शादी-3 (Untold Story)

मैसेज पढ़ मानो कोमल के पांव तले जमीन खिसक गयी। वो जिस रिश्ते को लेकर जहां खड़ी थी समीर वहां से काफी आगे निकल गया था। वो उसके इंतजार में बैठी थी और वो अपनी शादी तय करने वाला रहा उसे बिना बताए। 

कोमल सारी रात रोती रही। समीर को गुस्से में बोले सारे शब्द उसे याद आ रहे थे। वो बार-बार खुद को हीं कोस रही थी। उसे अपनी गलती के लिए पहले हीं माफ़ी मांग लेनी चाहिए थी। पर क्या समीर का प्यार इतना कमजोर था क़ि एक बार दूर हुए तो वापस आने की कोशिश नहीं की। समीर की शादी तय होने वाली थी और उसने बताया भी नहीं। उसे शायद पता भी नहीं चलता अगर वो समीर को मैसेज न करती। 

अगली सुबह होते हीं कोमल ने लड़के वालों से मिलने के लिए हामी भर दी। मां ने लड़के का फोटो दिखाना चाहा तो उसने मना कर दिया।
रविवार की सुबह मिलने का कार्यक्रम तय हो गया। 

कोमल इसी आशा में थी क़ि शायद समीर का मन बदल गया हो उसकी शादी की बात सुनकर और वो उससे मिलने आ जाये। पर वो गलत हीं साबित हुई। समीर ने ना कोई कॉल किया न मैसेज।

कोमल ने उस दिन साड़ी पहनी थी। कुछ देर बाद कोमल की मां उसे लेने आ गयी। कोमल ने अपने मन को शांत किया । आंसुओं को अपने भीतर समेटा और झूठी मुस्कान अपने चेहरे पर लिए अपनी मां के साथ चल पड़ी।

उसने अपना सर झुका कर रखा था। उसने पहली नजर में ध्यान से भी नहीं देखा की कौन कौन आये हैं।

अपना सर तो उठाओ कोमल किसी जानी पहचानी आवाज़ सुन कर कोमल ने अपना सर उठाया तो सामने कोई और नहीं समीर खड़ा था। उसे विश्वाश हीं नहीं हो रहा था कि समीर अपने मम्मी पापा के साथ वहां मौजूद था। 

समीर ने कोमल से शादी की बात कुछ दिन पहले अपने घर वालो को बता दी। फिर कोमल के पापा से मिलकर उन्हें भी सब बता दिया। कोमल जब ऑफिस में थी तो वो अपने मम्मी पापा की मुलाकात कोमल के माता पिता से करवा दी थी। 

तुम्हें क्या लगा कि रिश्ता खत्म हो गया। झगड़ा मेरा या तुम्हारा हो सकता है पर ये रिश्ता हमारा था।

इसे कैसे ख़त्म होने देता समीर ने कोमल हाथ अपने हाथों में लेकर कहा। 
कोमल शांत खड़ी थी और भावुक भी थी। 

क्या तुम मुझसे शादी करोगी? समीर ने घुटनों के बल बैठकर कोमल से पुछा तो कोमल ने रिश्ते के लिए हामी भर दी।