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जिन्दगी एक डायरी

कोमल की शादी-6

कोमल का खुशी खुशी गृहप्रवेश होता है फिर सब थोड़ी देर बाद सब सोने चले जाते है।

कोमल और समीर का कमरा चारों और से फूलों से सजा होता है। समीर बार बार कोमल से अपना इश्क़ बया करता है और कोमल शर्मा जाती है। दोनो एक दूसरे से कई वादे करते है। और भविष्य की सुखद कामना करते है। समीर, कोमल को प्यारी सी पायल पहनाता है। ताकि कोमल जहां भी रहें उसके पायल की आवाज उसका पता बता दें।


अगले दिन घर पर सत्यनारायण की पूजा होती है। जहाँ कोमल को जल्दी उठना होता है। पर थकान की वजह से वह उठ नही पाती। और उसे गहरी नींद में सोता देख समीर उसे सोने देता है।

बाहर हॉल में दूर की कोई बुआ नई बहू के जल्दी न उठने पर ताने देना शुरू करती है। इधर कोमल की नींद खुलती है।
बाप रे!....7 बज गये। समीर तुमने मुझे उठाया क्यों नहीं सब क्या सोचेंगे?

कुछ नहीं सोचेंगे। तुम तैयार हो जाओ मैं जाकर देख लेता हूं।

समीर को देखकर बुआ कहती है लो दुल्हे राजा भी उठ गएं। 

पर बहु का तो कहीं अता पता ही नहीं है। और बढ़-चढ़ कर बोलने लगती है। समीर से रहा नहीं गया।

आपको क्या लगता है बुआजी। ये पूजा ये कार्यक्रम किसके लिए है हमारे लिए न। आप तो सब आराम से सो गए। पर उसके लिए ये जगह नई है। विदाई का गम। इतने दिन की थकान। 

वो भी परेशान हो कर ही उठी है, बेमन और नींद में रहकर पूजा करने से अच्छा है घंटा भर लेट हो जाये।

आप औरत होकर नहीं समझेगी तो कौन समझेगा। एक बार उसे अपनी बेटी बना कर देखिए।

पीछे कोने में खड़ी कोमल सब सुन रही थी। उसकी आंखों मे आंसू थे। वो सोच रहीं थी कि किस जन्म के पुण्य थे जो उसे इतना अच्छा जीवन साथी मिला। आज सही मायनों में उसकी शादीशुदा जिंदगी की नींव रखी थी। क्योंकि आज उसका पति उसके सम्मान के लिए उसके सामने डट कर खड़ा था।