कोमल की शादी
कोमल की शादी-5
उसने गुस्से में कोमल को बहुत कुछ सुना दिया। कोमल बस रोते हुए, समीर को इतना कह गयी कि, अगर किस्मत में होगा तो हम जरूर एक होंगे।
कुछ दिनों तक समीर और कोमल की कोई बात नही हुई। एक दिन समीर अपने दोस्तों के साथ बैठा था। कोमल को वहा न देखकर पूछ बैठा कोमल तो बहुत बिजी हो गयी है शायद।
तभी अनन्या उसे बताती है कि कोमल को देखने लड़के वाले आ रहे वो कल ही उसके घर गयी है।
समीर के तो जैसे पैरो तले जमीन हिल गयी। वो ऐसा कैसे कर सकती है मेरे साथ, उसने मुझे बताना भी जरूरी नही समझा।
तो वो क्या करती? तुम तो उससे बात नही कर रहे थे।
तो वो भी तो कर सकती थी। शायद समीर, कोमल की ही फ़ोन का इंतज़ार कर रहा था। इतने दिन उसने कोमल के बिना कैसे गुज़ारे वही जनता था। प्यार जो इतना करता था। पर अपने ईगो के आगे सोच नही पा रहा था।
उसने तुरंत कोमल को फ़ोन लगाया। हैलो कोमल। इतने जल्दी भूल गयी मुझे की किसी और से शादी करने जा रही हो।
तुम समझते कहा हो समीर किसी और को। मैने मां से कहा था कि मुझे शादी नही करनी अभी। पर कोई आना चाहे तो उसे मना नही कर सकते।
अब बात चाहे कोई भी हो मैं आ रहा हूं कल तुम्हारे घर
पर कल तो मुझे देखने लड़के वाले आ रहे है। उसे चले जाने दो हम फिर आराम से बात करते है।
मैं कुछ नही जानता, तुम सिर्फ मेरी हो। तुम्हे मेरे अलावा कोई देख नही सकता। तुम मना करो। मैं आ रहा हूँ।
बड़ी मुश्किल से कोमल ने अपने घर वालो को मनाया।
अगले दिन समीर और उसके माता पिता कोमल के घर गए।
समीर के पापा- भाईसाहब हमें तो कोमल कब से पसन्द है और हमारा बेटा भी उसे बहुत चाहता है, आप ही फैसला कीजिये अब।
कोमल के पापा - हमे भी ये रिश्ता पसन्द है भाईसाहब बस एक बार गुण मिल जाये तो हम सारी तरह से निश्चिन्त। बेटी का मामला है।
फिर चालू हुआ कुंडली मिलाने का दौर। पापा के रिश्तेदार ही ये काम करते थे। समीर अपने दोनों हाथ जोड़े ऐसा बैठा था जैसे Msc का रिजल्ट हो। उसकी आँखों मे आंसू साफ दिख रहे थे।
कुंडली तो मिलान कर रही है लेकिन....
लेकिन क्या पंडित जी। समीर से रहा नही गया। मैं सब कुछ करने को तैयार हूं। मैं कोमल के बिना नही रह सकता और उसकी आँखों से आँसू निकल गए।
कोमल दूर खड़े सोच रही थी कि इतना प्यार करने वाले लड़के के आगे तो भाग्य को भी बदलना पड़ेगा। हे भगवान! इसे मेरा नसीब बना दे।
पंडित जी- अरे बेटा! शांत हो जाओ। सब कुछ ठीक है। बस एक छोटी सी पूजा करनी है ताकि तुम लोगों की शादी जल्दी हो सके।
समीर की तो खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा। वो पागलों की तरह झूम उठा। वहीं कोमल का हाथ पकड़कर सबके सामने बोला- क्यों मैडम। अब क्या ख्याल है आपका ? अभी भी कोई परेशानी है।
क्या कर रहे हो समीर.....सब देख रहे।
ये हाथ छोड़ने के लिए नही पकड़ा जानेमन अब तो हां करनी पड़ेगी। कोमल धीमे आवाज में हां कहकर, शर्मा कर अंदर चली गयी।
दोनो परिवारों में काफी अच्छा तालमेल बन गया था। एक हफ्ते में ही दोनो की सगाई हो गईं।
अब फिर से कोमल और समीर की बातों और मुलाकातों का दौर शुरू हो गया। पर इस बार सब अलग था।
पहले समीर से बेधड़क बात किया करती थी। पर अब तो कोई उसका नाम भी ले ले तो कोमल कीं धड़कने तेज हो जाती। शायद पहले प्यार का नशा ही कुछ और होता है।
इन सब के बीच, आखिर शादी का दिन आ गया। जब दोनों हमेशा के लिए एक होने वाले थे।
कोमल जैसे ही अपने पापा और भाई का हाथ थामें मण्डप पहुंची, समीर उसे देखता ही रह गया। उसे यकीन नही हो रहा था कि जिस लड़की को उसने दिलों जान से चाहा वो आज हर मायनो में उसकी हो जाएगी।
कोमल ने सबके सामने समीर का हाथ पकड़कर कहा- समीर तुम्हे याद है, मैने तुमसे कहा था कि अगर किस्मत में हुआ तो हम जरूर साथ रहेंगे।
Thank You So Muchuch Sameer तुमनें इस बात को सच कर दिखाया।
मैं पहले दिन से तुम्हे पसन्द करती हूं पर कभी कह नही पाई, मैं जानती हूं तुम्हारे जितनी मोहब्बत मुझे कोई नही दे सकता हैं।
शायद तुम्हारे जितना तो नहीं पर तुमसे बहुत प्यार करती हूं।.....I love you Sameer...
और अपने घुटनों के बल बैठकर उससे पूछती है।
Will you marry me.....Sameer....
समीर की तो खुशी का ठिकाना ही नही रहा, उसे लग रहा था जैसे वो सब कुछ जीत गया हो। एक लड़के के लिए अपने प्रेयसी के इज़हारे मोहब्बत से बड़ी क्या बात हो सकती है।
वो भी सबके सामने हो तो सोने पर सुहागा।
जैसे ही समीर ने कोमल की मांग में सिंदूर भरा, दोनों की आंखों में खुशी के आंसू आ गएं। दोनों एक दूसरे से गले लग कर कभी हंस रहे थे कभी रो रहे थे।
विदाई के वक्त, समीर ने कोमल के परिवार वालों से वादा किया कि वो हमेशा कोमल को खुश रखेगा और उसका सम्मान हमेशा बनाये रखेगा। रोते-मुस्कुराते हुए कोमल की विदाई होती है।
