Welcome To


जिन्दगी एक डायरी

कोमल की शादी-4

उम्म....मेरे मम्मी पापा देखेंगे।
फिर भी कोमल तुम्हारे कुछ सपने होंगे अपने जीवनसाथी को लेकर ?
सपने भी भला कभी सच होते है।

समीर-  तुम जब तक बताओगी नहीं की तुम क्या चाहती हो, तो कैसे होगा।
......देखो समीर मेरे मम्मी-पापा चाहते है कि लड़के में उनकी पसंद भी शामिल हो, सबसे बड़ी बात लड़का हमारी बिरादरी का हो।

तभी समीर डरते हुआ पूछता है किस कम्युनिटी से हो तुम?
कोमल कहती है- ..........।
समीर की तो खुशी का ठिकाना नही रहा क्योकि वो भी उसी कम्युनिटी से था। उसे लगा जैसे किस्मत भी दोनों को साथ लेना चाहती हैं।

कुछ दिनों बाद कोमल का जन्मदिन था। समीर ने मन बना लिया था कि वो उस दिन कोमल से अपने दिल की बात कह देगा और उसे शादी का प्रस्ताव देगा। 

आखिर जन्मदिन का दिन आ गया, समीर ने पार्टी की सारी तैयारी कर रखी थी।
हॉटेल का कमरा पूरी तरह फूलों से सजा था। साथ में निमिष और दोस्त भी थे जिन्होंने सजावट में समीर की मदद की।

सब कुछ जैसा सोचा था वैसा ही हुआ। कोमल सुंदर सी ड्रेस पहन कर आयी। उसकी आँखों पर पट्टी बंधी थी। जैसे ही पट्टी खोली ऊपर से गुलाब के पंखुड़ियों की बौछार हो पड़ी। 

और सब एक साथ happy birtday to you.... गाने लगे।
कोमल तो जैसे खुशी से फुले नहीं समा रही थी, क्योकि इससे पहले किसी ने उसके जन्मदिन पर इतनी तैयारी नही की थी।

केक काटा गया। काफी सारी फोटोज ली गयी। फिर समीर, कोमल का हाथ पकड़ कर उसे ले गया और फूलों से बने दिल के बीच ले जाकर खड़ा कर दिया। उस दिल के चारों और मोमबतियां सजी हुई थी।

कोमल मैं............
कुछ मत कहो समीर, ऐसा कुछ मत कहो। जिसका जवाब मेरे पास न हो।

समीर घुटने के बल बैठकर कोमल का हाथ अपने हाथ मे लेकर कहता है- 
नही कोमल मुझे कहने दो। मुझे तुम्हारा साथ, तुम्हारी बातें, तुम्हारी खुशबू, सब कुछ अच्छा लगने लगा है। 

तुम जब सामने नही होती हो तो मेरी नज़रे बस तुम्हें ढूढ़ती है। मैं जानता हूं कि, हम अच्छे दोस्त है। पर दोस्ती से अच्छी प्यार की शुरआत क्या हो सकती है। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं।

I....I love you....I love you Komal

please Will You Marry Me.... please????


कोमल की आंखों से आंसू झलक रहे थे। उसे समझ नही आ रहा था कि वो क्या कहे। पहली बार किसी लड़के ने उससे इस तरह अपने प्यार का इजहार किया था। कोमल अपने ही खयालो में खो गयी।

कोमल.. कोमल..! ऐसे चुप न रहो, कुछ तो कहो।

देखो समीर मैंने तुमसे कहा था की मैं इस तरह फैसला नहीं कर सकती। मेरे पापा की रजामंदी जरूरी है। तुम्हारे परिवार वालो को भी मैं और मेरा परिवार पसन्द आने चाहिए।

तुम मेरे परिवार की फिक्र मत करो। मैने उन्हें तुम्हारे बारे में सब कुछ बता दिया है, तुम्हारी तस्वीर भी दिखा दी है तुम उन्हें बहुत पसंद हो। तुम बस हाँ कर दो। हम मना लेंगे।

अगर नही माने तो?.....

क्यों नही मानेगें??

तुम नही जानते समीर, कुंडली और गुण आदि नहीं मिले तो शादी नही होगी।

ये कैसी बात कर रही हो कोमल... ये सब चीज़े आज मायने नही रखती।

मैं नही जानती समीर क्या मायने रखता है क्या नही। ये बस एक चीज़ है जो मेरे माँ-पापा ने मुझसे मांगी थी। तुम उनसे पहले मिलो अगर उन्होंने हाँ कही तो मेरी भी हाँ होगी।
नही तो भूल जाना।

समीर को इस तरह कोमल का ना कहना वो भी सब दोस्तो के सामने नागवार गुजरा। शायद वो इस ना के लिए तैयार ही नही था।