Welcome To


जिन्दगी एक डायरी

कॉलेज का आखरी दिन

आज सब एक-दूसरे के गले मिल रहे हैं। आंखों में नमी है और एक "काश" भी जिंदा है , अंदर ही अंदर कि काश वो कुछ और साल साथ में रह पाते , काश ये वक्त आज यहीं थम जाए, काश आज के दिन का भी हम बंक कर सके । सब कुछ लग रहा है मर सा गया है जिंदा है तो काश । 

 कॉलेज में आने के बाद ये सारे दोस्त एक परिवार थे । 

क्लास में आते ही माथे पर शिकन रहती, पर इस बात का सुकून तो रहता कि चलों अपने साथ बहुत दोस्त है जिनके साथ भी ये ही प्रॉब्लम है । 

ये दोस्त या यूं कहें ये पूरा कारवां जो आज बिछड़ रहा है, इन्होंने अपनी जिंदगी का सबसे खूबसूरत सफ़र यहां किया है, बहुत ही खूबसूरत वक्त गुजारा है यहां पर । 

इसके बाद जैसे अब कोई टोपोग्राफी नहीं होगी अब जो होगा खुद करना होगा ।

असाइनमेंट का लोड तो नहीं होगा पर आगे जो लोड होगा शायद इन सबसे ज्यादा हो । 

आज सब कुछ सुनसान है । वो पार्क जहां बैठकर के कितने गप्पे लड़ाते थे, वो कैंटिन जहां कितने ही कप चाय की चुस्कियां ली थी आज सब सुनसान है। किसी भी कमरें में आज शोर नहीं है । आज हा हू की भी आवाज नहीं है ,ना टेबल पीटी जाती रहीं हैं । ना कोई हुटिंग हैं आज । लाइब्रेरी शांत हैं जहां सब सिर्फ किताबों के मिलने वाले दिन जाया करते , वो रास्ते जो गेट से क्लास तक जाने में सब तय किया करते थे वो भी आज सुनसान है वहां सूखे पत्तों की कालीने बिछी है बस । वैसे आज सुबह जल्दी उठने का भी मन नहीं हुआ होगा सुबह की कोई क्लास जो नहीं थी आज ।

Backlogs का खौफ अब शायद खत्म सा है , अब उससे भी भयानक डर है इन सब दिल के टुकड़ों को खो देने का । 

एक-दूसरे को कस के बांहों में भरते हुए , आंखों के आंसू उनके कंधों को सौंप रहे हैं । दोस्तों में कार्बन-कार्बन का डायमंड वाला बंध रहा है , पर आज फूट फूट कर आंसू निकल रहे हैं । हंसी-मजाक की जगह एक मायूसी पसर चुकी है । 

अब किसी की Proxy भी नहीं लगेगी ना किसी तरह का लोचा होगा । 

सब कैद कर रहें है अपने कैमरों में एक एक तस्वीर को । 

समेट के रख रहें हैं एक एक याद को , अभी कोई रो पड़े तो बिखर जाये सब के सब । 

हाथों में है तो एक दूसरे का हाथ , कुछ वादे जो किये जा रहे हैं, मिलने मिलाने के , कुछ बातें हैं जो आज भी अधूरी है इतना सफ़र तय करने के बाद भी आज भी लग रहा है , काश थोड़ा सा और सफर होता ।

सब जा रहें इस पिंजरे को छोड़कर जिसे सबने पहले विकेंड में पिंजरा माना था । 

सब भारी दिल लिए तो कुछ टूटे दिल लिए हुए । कुछ इज़हार भी अधूरे हैं।

काश कुछ वक्त और होता ।