दूसरा पन्ना
दुल्हन की मौत
एक दुल्हन की मौत तब होती है,,जब वाकई उसका सुहाग उसका साथ नही देता,,जिसकी अर्धांगिनी बन कर वो अपने ससुराल आती है और वही पति उसे प्यार तो दूर मान सम्मान तक नही देता।
एक दुल्हन की मौत तब होती है जब उसके माता पिता सब कुछ जानते हुए उसे उसी दलदल में धकेल देते हैं जहाँ वो कभी नही जाना चाहती।
एक दुल्हन की मौत तब होती है,,जब दहेज के लालच में उसका बेशकीमती जिस्म झुलसा दिया जाता है।
एकदुल्हन की मौत तब होती है जब अपनी बहू को कुलक्षणी और कुलटा की उपाधि दी जाती है।
एक दुल्हन की मौत तब होती है जब उसका पति उसे पीटता है।
एक दुल्हन की मौत तब होती है जब उसके अपने देवर ससुर उसे बुरी नजर से देखते हैं।
एक दुल्हन की मौत तब होती है जब लड़का न दे पाने पर उसे बांझ करार कर दिया जाता है।
एक दुल्हन की मौत तब होती है जब दो बेटियाँ लगातार जनने के बाद लोग उसका मुँह तक नही देखना चाहते।
एक दुल्हन की मौत तब होती है जब वो थकं के चूर होने पर आराम करती है और बदले में कामचोर कहलाती है।
जरूरी नही जिस्म जले तभी मौत हो,,मैंने देखा है कुछ दुल्हनें मन से भी मरी होती है।
दुल्हन बस दुल्हन नही वो एक बेटी है माँ है एक बहन है एक औरत है।
जलती तो वो बाद में है,,पर मन से तो काफी पहले मौत को गले लगा देती है।
जरूरी नही सबके साथ ऐसा हो पर अधिकतर महिलाएं इन सब मेसे किसी न किसी बात की शिकार जरूर हुई होंगी।
ऐसा मैं नही सरकारी आंकड़े कहते है,,,।
नोट: मेरी रचना से यदि किसी को ठेस पहुँची हो तो क्षमा करें,,, मैं बस अपने मन की बात लिख रहा हूं।हो सकता हो हर कोई मेरी बात से सहमत न हो।
