दूसरा पन्ना
तुम सारा दिन करती क्या हो
अरे सुनती हो मेरी रुमाल कहां है
अरे बहू मेरा चश्मा कहां है
मेरी शर्ट का बटन टूट गया
मेरी दवाई का टाइम हो गया
मम्मी आज नाश्ते में पिज़्ज़ा बनाना
अरे बहू आज मेरे लिए खिचड़ी ही बनाना
सुनती हो आज कुछ तीखा खाने का मन है
भाभी आज मेरी सहेलियां आएंगी तो आज कुछ अच्छा बनाना
अरे मम्मी मेरा स्कूल बैग कहां है
अरे बहु मेरी पूजा का सामान कहां है
अरे भाभी मेरा नाश्ता नहीं बनाया आपने
अरे सुनती हूं मेरा पर्स कहां है?
अरे झाड़ू पोछा वाली तो आती ही है
कपड़े तो मशीन में ही धुल जाते हैं
अरे कोई चीज सही जगह पर नहीं रख सकती हो क्या तुम
सारा दिन फोन पर ही लगी रहती हो
अरे हमारे जमाने में हम कितनी मेहनत करते थे
सारा काम खुद किया करते थे
तुम्हारे जमाने में काम क्या है
सब कुछ तो मशीनों से ही होता है
हम लोगों को समझ नहीं आता कि
तुम सारा दिन करती क्या हो????
मगर किसी को नहीं पता कि उसने खाना खाया है या नहीं
किसी को नहीं पता कि उसकी तबीयत खराब है
बस सबको सुनाना है सारा दिन करती क्या हो???
