Welcome To


जिन्दगी एक डायरी

तुम सारा दिन करती क्या हो

अरे सुनती हो मेरी रुमाल कहां है 
अरे बहू मेरा चश्मा कहां है
मेरी शर्ट का बटन टूट गया 
मेरी दवाई का टाइम हो गया 

मम्मी आज नाश्ते में पिज़्ज़ा बनाना
अरे बहू आज मेरे लिए खिचड़ी ही बनाना 
सुनती हो आज कुछ तीखा खाने का मन है 
भाभी आज मेरी सहेलियां आएंगी तो आज कुछ अच्छा बनाना

अरे मम्मी मेरा स्कूल बैग कहां है 
अरे बहु मेरी पूजा का सामान कहां है 
अरे भाभी मेरा नाश्ता नहीं बनाया आपने 
अरे सुनती हूं मेरा पर्स कहां है?

अरे झाड़ू पोछा वाली तो आती ही है 
कपड़े तो मशीन में ही धुल जाते हैं 
अरे कोई चीज सही जगह पर नहीं रख सकती हो क्या तुम
सारा दिन फोन पर ही लगी रहती हो 

अरे हमारे जमाने में हम कितनी मेहनत करते थे 
सारा काम खुद किया करते थे 
तुम्हारे जमाने में काम क्या है
सब कुछ तो मशीनों से ही होता है 
हम लोगों को समझ नहीं आता कि 
तुम सारा दिन करती क्या हो????

मगर किसी को नहीं पता कि उसने खाना खाया है या नहीं
किसी को नहीं पता कि उसकी तबीयत खराब है 
बस सबको सुनाना है सारा दिन करती क्या हो???