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जिन्दगी एक डायरी

लालची कौन है (बेटा या ब्राह्मण)

अब जल्दी किजिये पिताजी बैंक जाने के लिये लेट हो जाओगे.. थोड़े ऊंचे स्वर में रमेश बोला।

बेटा, मैं सोच रहा हूं इस बार पेंशन की रकम में से कुछ निकालकर ब्राह्मण को भोज करवा लूं तुम्हारी मां की पुण्यतिथी आ रही है...

कोई जरुरत नहीं फालतू का खर्चा करने की ये ब्राह्मण व्राह्मण सब लालची होते है आप वो रकम मेरे एकाउंट में जमा करवाकर मंदिर चले जाना और भगवान को थोड़ा प्रसाद चढ़ाकर सीधे ही मां की आत्मा की शान्ती की प्रार्थना कर लेना कहते हुए रमेश ने एक बीस का नोट अपने पिता के हाथ में थमा दिया।

अब अगर बात लालची इंसान की हो रही थी तो यहां लालची कौन था ब्राह्मण या उनका बेटा रमेश सोचते सोचते पिताजी बैंक को रवाना हो गये।