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जिन्दगी (Jindgi)
बचपन की बहुत सारी यादें होती है कुछ खट्टी तो कुछ मीठी जब हम लोग छोटे होते है तो हमें किसी बात का बुरा नहीं लगता कोई कुछ भी कहें हमें कोई फर्क नहीं पड़ता और हम खेलते ही रहते है पर जब हम बड़े होते है तो बहुत सी परेशानियां आती है कुछ समझ में ही नहीं आता कि क्या करें दिल की सुनें या किसी और की सुनें
कुछ पता नहीं चलता जैसे जैसे बड़े होते जाते है उतनी ही परेशानियां बढ़ती जाती है जिन्दगी में करना तो बहुत कुछ होता है पर ज्यादा कुछ कर नहीं पाते जिन्दगी किताब के पन्नो की तरह रोज़ बदलती रहती है और फिर एक दिन ये रद्दी की तरह खत्म हो जाती है।।
