दूसरा पन्ना
इंसानियत में स्कोप(Insaniyat Mein Scope)
तकरीबन छः महीने पहले की बात है। सुबह के नौ बज रहे थे। और यही मेरे कॉलेज का समय भी होता है। कॉलेज के अंदर एंट्री करता हूं मेरे साथ और भी कई स्टूडेंट अंदर आते है मुझे 100 का नोट ज़मीन पर पड़ा दिखता है मैं अपने दोस्तों को ये बात बताता हूं उनमें से कुछ कहते है चल आज कैंटीन का जुगाड़ हो गया ख़ैर मैं अपनी क्लास के इंचार्ज के पास गया उन्हें सब बताया
क्लास छूटने के बाद उन्होंनें जो एक बात कही, वो आज तक याद है... बेटा पता है ये नोट सिर्फ तुमको ही क्यूं दिखा, आखिर और किसी की नज़र भी तो पड़ सकती थी इसमें पता हैं क्यूं वो इसलिए क्योंकि तुम्हें इसकी एहमियत और इसकी कीमत पता है।
अक्सर लोग कहते है कि ये सब फ़ालतू के काम है ये सब करने से क्या फ़ायदा..लेकिन बता दूं... कुछ दिन पहले की ही बात है मैं अक्सर शहर से लौटते वक़्त जूस पीने के लिए जूस की दुकान में रुक जाता हूं। उस दिन भी जूस पिया और जूस वाले को पैसे देने के बाद वॉलेट उनके ठेले पर ही भूल गया और जब रात को घर लौटा तो देखा वॉलेट था ही नहीं एकदम सन्न रह गया वॉलेट में 1500 रूपए कैश और कुछ इम्पॉर्टेन्ट कार्ड्स थे। घर में भी किसी से कुछ नहीं बताया गलती भी ख़ुद की थी तो किसी के ऊपर चिल्ला भी नहीं सकते थे। मम्मी ने फेवरेट वाला खाना बनाया था। लेकिन टेंशन इतनी ज़्यादा थी की बिना खाना खाये चुपचाप सो गया। सुबह उठा जल्दी- जल्दी खाना खाया और जूस वाले के पास भागा शायद मिल जाए जूस की दुकान पर एक उम्मीद की आशा से लटका हुआ मुँह लेकर पहुंचा जूस वाले से पूछा क्या कल आपको यहां कोई पर्स मिला..?? वो बोला तो वो काले रंग का पर्स आपका ही है...?? मेरी सांस में सांस आयी। हां वो मेरा ही है। अरे पता है तुझे अगर किसी और की नज़र पड़ी होती तो लेकर फुर्र हो गया होता, लेकिन एक बहुत अच्छी लड़की दुकान में जूस पीने आई थी तो उसकी नज़र पड़ गयी इस पर उसने तुम्हरा पर्स खोला तो उसमें काफ़ी पैसे वगैरह और कुछ कार्ड्स मिले तो उसने मुझसे बोला की ये अपने पास रख लो जो भी लेने आये उसको वापिस कर देना।
उन्होंनें मेरा पर्स वापिस किया और मैंनें उसको थैंक यू बोला मैं जैसे ही चलने लगा तो वो बोला भाई हम ईमानदारी का ही खाते है दूसरे का पैसा हमारे लिए कौड़ी के समान है उस दिन लगा अभी भी इंसानों में इंसानियत ज़िंदा है शायद इसीलिए दुनिया चल रही है ऐसे लोगों को दिल से सलाम क्योंकि आप जैसे लोग ही हमारे लिए सच्चे हीरो है। लोगों के पास संपत्ति तो होती है संतोष नहीं होता। लेकिन कुछ इनके जैसे लोग भी हैं जिनको कम में भी सन्तुष्टि है और ये उसमें ख़ुश भी हैं याद रखिये अगर आपके पास पैसा कम भी है और सुकून बेशुमार हैं तो आप इस दुनिया के सबसे ख़ुशनसीब और अमीर इंसान हैं
इसलिए इंसानियत को अपने अंदर जिन्दा रखिए इसका बहुत स्कोप है।
